क्या आपके घर पर लगा है काले रंग का नजरबट्टू, जानें इसका शिवजी से संबंध और नए घर पर लगाने क

क्या आपके घर पर लगा है काले रंग का नजरबट्टू, जानें इसका शिवजी से संबंध और नए घर पर लगाने क

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क्या आपके घर पर भी लगा है काले रंग का नजरबट्टू, जानें इसका शिवजी से संबंध?

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Nazar Battu Vastu Tips: क्या आपके घर के मुख्य दरवाजे या दीवार पर काले रंग का नजरबट्टू लगा है और क्या आप जानते हैं इसका संबंध सीधे भगवान शिव से जोड़ा जाता है? कहा जाता है कि यह ना सिर्फ बुरी नजर से बचाने के लिए लगाया जाता है, बल्कि नए घर में प्रवेश के समय सही विधि से लगाने पर शिवजी की विशेष कृपा मानी जाती है. आज हम बताएंगे नजरबट्टू का धार्मिक महत्व और इसे लगाने का सही तरीका…

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Nazar Battu Vastu Tips: जब कोई नया घर बनवाता है या अपने घर को बुरी नजर या दोष से बचाने के लिए कुछ लोग उल्टी गुड़िया टांगते हैं तो कुछ लोग राक्षस जैसा दिखने वाला मुखौटा टांगते हैं, जिसे नजरबट्टू कहा जाता है. मान्यता है कि इस मुखौटा को घर पर लगाने से बुरी नजर या दोष दूर रहता है और परिवार पर कोई संकट नहीं आता. हालांकि बहुत से लोगों को इस मुखौटे को लगाने की सही विधि के बारे में जानकारी नहीं होती इसलिए इसका सीधा फल नहीं मिल पाता. आइए जानते हैं आखिर इस मुखौटे को क्या कहते हैं और भगवान शिव का इससे क्या संबंध है…

भगवान शिव से क्या है संबंध?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसका सीधा संबंध भगवान शिव से है. महापुराणों में उल्लेख है कि शिवजी के क्रोध से एक अत्यंत शक्तिशाली और भूखा राक्षस प्रकट हुआ था. जब उस राक्षस ने शिवजी की शरण ली, तो महादेव ने उसे स्वयं का ही मांस खाने को कहा. आदेश का पालन करते हुए उसने अपने पूरे शरीर को खा लिया, केवल उसका मुख (चेहरा) बच गया. शिवजी उसकी इस भक्ति और आज्ञाकारिता से अत्यंत प्रसन्न हुए और उसे ‘कीर्तिमुख’ नाम दिया. महादेव ने उसे वरदान दिया कि जो भी मेरे द्वार पर आएगा, उसे पहले तुम्हारी पूजा करनी होगी और जो तुम्हें अपने घर के मुख्य द्वार पर लगाएगा, उसके घर को कभी किसी की बुरी नजर या नकारात्मक ऊर्जा नहीं छू पाएगी.

नजरबट्टू लगाने की सही विधि
कीर्तिमुख की खास बात यह है कि आप इसे घर पर किसी भी समय लगा सकते हैं. इसे लगाने के लिए किसी स्पेशल तिथि या फेस्टिवल की बाध्यता नहीं होती है. आप इसे किसी भी सामान्य शुभ दिन पर लगा सकते हैं. घर पर कीर्तिमुख को लगाने से पहले गंगाजल से धो लें और भगवान शिव का ध्यान रखें, फिर इसे मुख्य द्वार के बीचों बीच लगा दें. कीर्तिमुख हमेशा तांबे, पीतल या मिट्टी का होना चाहिए. इसका चेहरा थोड़ा उग्र और मुंह खुला होना चाहिए.

नजरबट्टू लगाने के फायदे
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मेन गेट पॉजिटिव और नेगेटिव ऊर्जा के प्रवाह का मार्ग होता है. यहां काले रंग की राक्षस जैसा दिखने वाला मुखौटा स्थापित करने से यह एक फिल्टर की तरह काम करता है. यह बाहर से आने वाली नेगेटिव एनर्जी और ग्रहों के बुरे प्रभावों को सोख लेती है और केवल पॉजिटिव एनर्जी को ही घर में प्रवेश करने देता है. यही कारण है कि आपको ज्यादातर घरों पर उल्टी गुड़िया या फिर बुरी नजर से बचने के लिए यह मुखौटा देखने को मिल जाएगा.

ऐसी स्थिति में हटा दें नजरबट्टू
राक्षस जैसे दिखने वाले मुखौटे को हमेशा घर के मुख्य द्वार के ऊपर, सड़क से गुजरने वालों की सीधी नज़र में रखना चाहिए. यह महज़ एक मुखौटा नहीं है, बल्कि घर की सेफ्टी का काम भी करता है. अगर यह मुखौटा टूट जाए या इसका रंग फीका पड़ जाए तो इसका मतलब है कि इसकी पॉवर खत्म हो रही है. ऐसे में तुरंत एक नया मुखौटा बाजार से लाएं और उसको बदल दें, ताकि घर की निरंतर सुरक्षा सुनिश्चित रहे.

नजरबट्टू को लेकर
घर के सामने किसी विकृत या डरावने राक्षस की मूर्ति रखने के पीछे एक गहरा साइकोलॉजी कारण है. जब कोई अजनबी आपके घर को देखता है तो उसकी पहली नजर सुंदर दीवारों या सजावट पर नहीं बल्कि उस विकृत मूर्ति पर पड़ती है. उस क्षण, उसके दिमाग को एक तरह का झटका लगता है और उसका ध्यान भटक जाता है. इसी वजह से, उसकी ईर्ष्या या तीव्र निगाह, जो आपके घर पर होनी चाहिए थी, उस मूर्ति पर आकर रुक जाती है.

घर में कलात्मकता का टच
हालांकि कुछ लोग इसे अंधविश्वास कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे सामाजिक और आध्यात्मिक लाभ हैं. घर में कलात्मकता का स्पर्श जोड़ने के अलावा, ये मुखौटा मन में साहस और सुरक्षा की भावना भी पैदा करता है. इसलिए, चाहे वैज्ञानिक रूप से हो या आध्यात्मिक रूप से, यह कहा जा सकता है कि घर के मेन गेट पर नजर दोष वाला मुखौटा का होना लाभदायक ही रहता है.

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Parag SharmaChief Sub Editor

पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें



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