कहीं आप तो नहीं फेंक देते पूजा के बाद दीपक की राख? अगर जान लेंगे इसके ये 5 दिव्य गुण, तो कभी नहीं फेकेंगे आप
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पूजा के बाद धूपबत्ती की राख और दीपक की बत्ती को पेड़ के नीचे, जमीन में या नदी में प्रवाहित करें, फेंकना अशुभ है. इससे कर्ज, नजर दोष और शत्रु भय दूर हो सकते हैं.
जानिए, पूजा के बाद बची राख क्या करना चाहिए. (AI)हिंदू धर्म में पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का विशेष महत्व होता है. पूजा में रोली, अक्षत, फल, फूल और नारियल का खासकर इस्तेमाल किया जाता है. इन सामग्री के बिना कोई भी पूजा अधूरी माना जाती है. अक्सर ऐसा होता है कि पूजा के दौरान धूपबत्ती और दीया जलाई जाती है. इसके बाद इसकी राख को लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो यकीन मानिए कि आप बड़ी गलती कर रहे हैं. अब सवाल है कि आखिर, पूजा के बाद बची राख और जली हुई बत्ती का क्या करना चाहिए? पूजा हो जाने के बाद इस राख को क्यों नहीं फेंकना चाहिए? क्या पूजा के बाद बची राख फेंकना अशुभ साबित हो सकता है? आइए जानते हैं कि पूजा के बाद बची राख और बत्ती का क्या करना चाहिए-
पेड़ के पास रखें बची राख और बत्ती
जब भी आप पूजा करता हैं, उसके बाद धूपबत्ती की राख और दीपक की जली बत्ती को पेड़ के नीचे छिपाकर रख दें. इससे कर्ज से छुटकारा मिल सकता है और शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है.
राख से नजर उतारकर फेंके
पूजा करने के बाद बची हुई राख को इकट्ठा करके जिस भी जातक को नजर लगी हो. उसके ऊपर से 11 बार उतारें और उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ फेंक दें. इससे नजर दोष से छुटकारा मिल सकता है और आपके जीवन में आ रही सभी समस्याओं से भी मुति मिल जाएगी.

शत्रु भय दूर करने के लिए दक्षिण में फेंके
अगर आपको हमेशा शत्रु भय बना रहता है, तो बची हुई राख और बत्ती को हाथ में लें और अपने शत्रु का नाम लेते हुए दक्षिण दिशा की तरफ फेंक दें. इससे आपको लाभ हो सकता है और शत्रु की पराजय होगी.
जमीन के अंदर रखें
पूजा के बाद जली हुई दीपक की बत्ती और धूपबत्ती की राख को एकत्रित करें और जमीन के नीचे रख दें. साथ ही शनिदेव के मंत्रों का जाप जरूर करें. इससे आपको कभी धन हानि का सामना नहीं करना पड़ेगा.
कपड़े में बांधकर नदी में प्रवाहित करें
पूजा करने के बाद बची राख और दीपक की बत्ती को इधर-उधर गलती से भी नहीं फेंकना चाहिए. यह अशुभमाना जाता है. इसलिए आप इसे एक कपड़े में दोनों को रख दें और एक हफ्ते बाद उसे नदी में प्रवाहित कर दें. इससे ग्रहदोष से छुटकारा मिल सकता है.
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