उगते सूर्य को देते हैं अर्घ्य, तो यहां जानिए सही तरीका, महंत ने बताए आसान नियम

उगते सूर्य को देते हैं अर्घ्य, तो यहां जानिए सही तरीका, महंत ने बताए आसान नियम

फरीदाबाद: सनातन परंपरा में भगवान सूर्य की आराधना को स्वास्थ्य, सम्मान और समृद्धि का आधार माना गया है. मान्यता है कि रोजाना सूर्य देव को अर्घ्य देने से शरीर निरोगी रहता है जीवन में सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है. विशेष रूप से रविवार के दिन उगते सूर्य को जल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है.

पहला सुख निरोगी काया और दूसरा सुख घर में माया

लोकल 18 से बातचीत में बल्लभगढ़ उदासीन साधु आश्रम के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं शास्त्रों में कहा गया है पहला सुख निरोगी काया और दूसरा सुख घर में माया होता है. इसका अर्थ है कि सबसे पहले शरीर स्वस्थ होना चाहिए और दूसरा घर में धन-संपत्ति का होना जरूरी है.

भगवान सूर्य की करें आराधना

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं इन दोनों सुखों की प्राप्ति के लिए भगवान सूर्य की आराधना करनी चाहिए. रविवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए. इसके बाद तांबे का लोटा लेकर उसमें शुद्ध आरओ का पानी भरना चाहिए. पानी में थोड़ा गुड़, गुलाब की पंखुड़ियां, लाल पुष्प और थोड़ी सी रोली डालनी चाहिए. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सूर्य देव को खारा या नमक वाला पानी अर्पित नहीं करना चाहिए इसलिए शुद्ध और मीठा पानी ही प्रयोग करना चाहिए.

अर्घ्य देते समय इन बातों का रखें ध्यान

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं अर्घ्य देते समय एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर को थोड़ा ऊपर उठाना चाहिए. इसके बाद उगते सूर्य को तीन बार जल अर्पित करते हुए ओम घृणि सूर्याय नमः ओम आदित्याय नमः और ओम भास्कराय नमः मंत्रों का जाप करना चाहिए. पूरा जल भगवान सूर्य को अर्पित कर देना चाहिए.

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि जल अर्पित करने के बाद सूर्य देव को नमस्कार करना चाहिए. इसके बाद सूर्य मुद्रा बनाकर पहले बाईं आंख से और फिर दाईं आंख से भगवान सूर्य के दर्शन करने चाहिए. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि इसके बाद समर्पण मुद्रा से भी सूर्य देव के दर्शन करना शुभ माना जाता है.

अर्पित जल को इन कामों में करें इस्तेमाल

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सूर्य देव को अर्पित किया गया जल यदि शरीर पर लगाया जाए, तो इसका विशेष महत्व माना गया है. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि जिस स्थान पर चर्म रोग हो वहां इस जल को लगाने से लाभ मिलता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव की आराधना और सूर्य मुद्रा से दर्शन करने से व्यक्ति रोगों से मुक्त रहता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

सूर्य नमस्कार के फायदे

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि जो व्यक्ति नियमित रूप से भगवान सूर्य को नमस्कार करता है, समर्पण मुद्रा दिखाता है और सूर्य मुद्रा से दर्शन करता है उसके जीवन में दरिद्रता नहीं आती. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं ऐसा व्यक्ति हमेशा संपन्न रहता है और उसका शरीर भी निरोगी बना रहता है.

भगवान सूर्य को दूर से ही प्रणाम करना चाहिए

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं यदि किसी मंदिर में भगवान सूर्य की प्रतिमा स्थापित हो, तो प्रतिमा के चरणों को स्पर्श नहीं करना चाहिए. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि भगवान सूर्य को दूर से ही प्रणाम करना चाहिए और श्रद्धा के साथ उनकी आराधना करनी चाहिए.

Source link

You May Have Missed