आखिर क्यों हर साल 14 जनवरी को सूर्य की पहली किरण इस मंदिर पड़ती है, लाखों श्रद्धालुओं का लगा रहता तांता

आखिर क्यों हर साल 14 जनवरी को सूर्य की पहली किरण इस मंदिर पड़ती है, लाखों श्रद्धालुओं का लगा रहता तांता

Last Updated:

वैसे तो आपने कई मंदिरों के चमत्कारों के बारे में सुना होगा लेकिन आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां मकर संक्रांति के दिन सूर्य की पहली किरण इस मंदिर पर पड़ती है. आइए जानते हैं इस खास मंदिर के बारे में…

मध्य प्रदेश की धरती पर कई ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर हैं, जहां भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं. प्रदेश सभ्यता और आध्यात्म का केंद्र है, जहां खजुराहो की विरासत और बाबा महाकाल का आशीर्वाद भी है लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश के खरगोन को नवग्रह की नगरी भी कहा जाता है? यहां देश का एकमात्र सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर है. इस मंदिर की संरचना ज्योतिषीय सिद्धांतों पर आधारित है, जहां सूर्य देव नवग्रहों के साथ विराजमान हैं. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से कुंडली में ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है. साथ ही इस मंदिर में मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य की पहली किरण पड़ती है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…

मकर संक्रांति का सीधा संबंध सूर्य भगवान से होता है, क्योंकि इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में परिवर्तन करते हैं. इस लिहाज से खरगोन के सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर में भक्तों का तांता लगता है. माना जाता है कि मकर संक्रांति के पहले दिन इसी मंदिर पर सूरज की पहली किरण पड़ती है.

300 साल पुराने इस मंदिर में त्रिदेव, 12 राशि और बारह ग्रहों की पूजा की जाती है. अगर ग्रह असंतुलित है और किसी भी प्रकार के कष्ट दे रहे हैं तो इस मंदिर में दान और पूजा करने से मुश्किलों का हल मिलता है. मंदिर में हर ग्रह के नाम पर एक पोटली दान की जाती है. पोटली में ग्रह से जुड़ी चीजें होती हैं, जो कष्टों के निवारण में सहायक हैं. सूर्य प्रधान मंदिर होने की वजह से ही मकर संक्रांति के दिन मंदिर में लाखों भक्तों की भीड़ सूर्य भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए आती है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारत की शैली से प्रेरित होकर बनाई गई है. मंदिर में प्रतिमाओं का आकार और शैली भी दक्षिण भारत से मिलती-जुलती है. मंदिर की दीवारों पर बारीक नक्काशी और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी देखने को मिलती हैं, जो इसे मध्य प्रदेश के बाकी मंदिरों से अलग बनाती है. मंदिर के तीन शिखर भी इसे अद्भुत बनाते हैं. तीन शिखर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं.

पौराणिक कथा की मानें तो मां बगलामुखी ने एक पंडित को स्वप्न में आकर मंदिर बनाने का आदेश दिया था. यही वजह है कि मंदिर के गर्भगृह में भगवान सूर्य की प्रतिमा के साथ मां बगलामुखी की प्रतिमा भी मौजूद है. इसके अलावा, बाकी 8 ग्रहों की प्रतिमा और सवारी भी मंदिर में स्थापित की गई हैं.

बता दें कि साल 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी दिन बुधवार को मनाया जाएगा. मकर संक्रांति का महत्व धार्मिक, ज्योतिषीय और सांस्कृतिक तीनों दृष्टियों से अत्यंत महान माना गया है. सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. यहीं से सूर्य की उत्तरायण गति आरंभ होती है, जिसे शास्त्रों में देवताओं का दिन कहा गया है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
homedharm

आखिर क्यों हर साल 14 जनवरी को सूर्य की पहली किरण इस मंदिर पड़ती है

Source link

Previous post

Kharmas 2026 Jyotish Upay: धन, शादी, करियर में आ रहीं अड़चन से चाहिए छुटकारा? खरमास में करें ये आसान ज्योतिष उपाय

Next post

आखिर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने किस काम के लिए की PM मोदी की तारीफ, साथ ही कर दी मांग

You May Have Missed