अगर कुंडली में है गजकेसरी योग, तो जानिए किस भाव में बनता है और क्या-क्या लाभ मिल सकते हैं
गजकेसरी योग क्या है?
गजकेसरी योग दो महत्वपूर्ण ग्रहों की युति या विशेष स्थिति से बनता है – गुरु और चंद्रमा. जब चंद्रमा और गुरु एक ही राशि में होते हैं या जब चंद्रमा गुरु से चौथे, सातवें या दसवें भाव में होता है, तब यह राजयोग बनता है. इस योग का नाम ही दर्शाता है कि व्यक्ति में हाथी जैसी समझदारी और सिंह जैसी ताकत होती है. यह योग जितना मजबूत होता है, उतना ही बड़ा असर दिखाता है.
1. पहले भाव में (लग्न भाव)
अगर यह योग पहले भाव में बनता है, तो व्यक्ति आकर्षक व्यक्तित्व का होता है. ऐसे लोग आमतौर पर नेता, अभिनेता या पब्लिक फिगर बनते हैं. इनकी बातों में दम होता है और लोग इन्हें फॉलो करते हैं. जीवनशैली बहुत शाही होती है और ये लोग सही रास्ते पर चलते हैं.
दूसरे भाव में यह योग व्यक्ति को अच्छा वक्ता बनाता है. ऐसे लोग अमीर घरानों से होते हैं या धन कमाने की गजब क्षमता रखते हैं. इनकी वाणी में मिठास होती है और इनका सामाजिक स्तर ऊंचा होता है.
3. तीसरे भाव में
तीसरे भाव में यह योग साहस, पराक्रम और सफलता का संकेत देता है. ऐसे व्यक्ति के भाई-बहनों को भी अच्छा लाभ मिलता है. ये लोग मेहनती होते हैं और समाज में मान-सम्मान पाते हैं.
यह भाव माता, संपत्ति और सुख से जुड़ा होता है. यहां गजकेसरी योग बनने पर व्यक्ति को अच्छे घर, वाहन और जमीन का लाभ मिलता है. मां का साथ और आशीर्वाद जीवन भर बना रहता है.
5. पंचम भाव में
इस स्थान पर यह योग बुद्धिमत्ता और शिक्षा से जुड़ा होता है. ऐसे लोग बहुत तेज दिमाग वाले होते हैं. ये लेखक, शिक्षक या वैज्ञानिक जैसे पेशों में सफलता पाते हैं. इनकी संतान भी सफलता की ऊंचाइयों को छूती है.
यह योग थोड़ा कमजोर हो जाता है लेकिन फिर भी सकारात्मक प्रभाव रहता है. शत्रु पर विजय मिलती है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं धीरे-धीरे दूर होती हैं. संघर्षों के बावजूद जीत मिलती है.
7. सातवें भाव में
इस भाव में योग बनने पर जीवनसाथी बहुत अच्छे विचारों वाला और ऊंचे पद पर होता है. विवाह किसी प्रतिष्ठित परिवार में होता है और दांपत्य जीवन सुखद रहता है.
यह योग गूढ़ ज्ञान, तंत्र-मंत्र और आध्यात्म में रुचि देने वाला होता है. अचानक धन लाभ या कोई छुपा हुआ फायदा भी मिल सकता है. रहस्यमय विषयों में गहरी पकड़ होती है.
9. नवम भाव में
यह भाव भाग्य से जुड़ा होता है और इस योग के बनने पर व्यक्ति बेहद भाग्यशाली बनता है. धार्मिक कार्यों में रुचि होती है और जीवन में कई बार बिना मेहनत के भी सफलता मिलती है.
दशम भाव कर्म का स्थान होता है. यहां योग बनने पर व्यक्ति मेहनती होता है और ऊंचे पदों पर पहुंचता है. पिता का साथ और मार्गदर्शन भी खूब मिलता है. ऐसे लोग समाज में एक आदर्श बनते हैं.
यह योग बहुत धन देने वाला साबित होता है. व्यक्ति के पास आय के कई स्रोत होते हैं और उन्हें कम मेहनत में अच्छा लाभ मिलता है. इच्छाएं जल्दी पूरी होती हैं और आर्थिक स्थिति हमेशा मजबूत रहती है.
12. बारहवें भाव में
यहां यह योग थोड़े कमजोर असर वाला होता है. व्यक्ति को अपने घर से दूर जाकर ही सफलता मिलती है. ये लोग धर्म-कर्म के कार्यों में खर्च करने वाले होते हैं. जीवन में त्याग की भावना होती है.


