अक्षत् में साबुत चावल क्यों चढ़ाते हैं, जौ, गेहूं या अन्य अनाज क्यों नहीं? जानें कारण
अक्षत् में साबुत चावल क्यों चढ़ाते हैं, जौ, गेहूं या अन्य अनाज क्यों नहीं?
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Akshat Me Chawal Kyu Chadhta Hai: आपने देखा होगा कि मांगलिक कार्यों में अक्षत् का उपयोग होता है, जिसमें साबुत चावल होता है. उसमें एक भी टूटे चावल नहीं लेते हैं. अक्षत् में साबुत चावल ही क्यों रखा जाता है? आइए जानते हैं अक्षत् में साबुत चावल का महत्व और मंत्र.
अक्षत् में साबुत चावल का महत्व. (Photo: AI)
Akshat Me Chawal Kyu Chadhta Hai: हिंदू धर्म के सभी मांगलिक कार्यों में साबुत चावल का अक्षत् के रूप में प्रयोग किया जाता है. देवी और देवताओं को अक्षत् अर्पित करते हैं, तो कोई अतिथि के लिए या विशेष अवसर या त्योहार पर तिलक में अक्षत् का उपयोग होता है. दुल्हन की विदाई हो या फिर गृह प्रवेश उसमें भी अक्षत् प्रयोग में लाते हैं. सवाल यह है कि अक्षत् में साबुत चावल ही क्यों चढ़ाते हैं, जौ, गेहूं या अन्य अनाज क्यों नहीं?
अक्षत् का अर्थ
अक्षत् का मतलब है, जिसकी क्षति न हो, जो टूटा न हो, जो अपूर्ण न हो, जो अखंडित हो. इस वजह से अक्षत् में साबुत चावल लेते हैं, उसके लिए टूटे हुए चावल का उपयोग नहीं किया जाता है.
अक्षत् में साबुत चावल क्यों चढ़ाते हैं?
साबुत चावल को सबसे पवित्र और शुद्ध अन्न माना जाता है क्योंकि वह धान की खोल में सुरक्षित रहता है, जबकि जौ, गेहूं के साथ ऐसी बात नहीं. वहीं साबुत चावल का सफेद रंग पवित्रता, सादगी और शांति का प्रतीक है, जिसे सात्विकता से जोड़कर भी देखते हैं. यह सुख और समृद्धि का भी प्रतीक है. जब हम भगवान को साबुत चावल अर्पित करते हैं तो उनसे धन-धान्य से घर भरने की प्रार्थना करते हैं.
साबुत चावल जीवन में पूर्णता प्रदान करने के लिए भी अर्पित करते हैं. साबुत चावल को धन और वैभव की देवी माता लक्ष्मी से जोड़कर देखते हैं. इस वजह से दुल्हन जब मायके से ससुराल जाती है तो अपने साथ अक्षत् लेकर जाती है, ताकि उस परिवार में सुख-समृद्धि आए. इस वजह से दुल्हन को घर की लक्ष्मी कहा गया है. अक्षत् में साबुत चावल अर्पित करने से दरिद्रता का नाश होता है.
जब हम किसी का तिलक करते हैं तो उसमें अक्षत् लगाते हैं, इसका अर्थ यह है कि आप सकुशल रहें. आपके जीवन में सुख और समृद्धि आए, घर धन और धान्य से भरा रहे. आपकी सेहत ठीक रहे और आपकी कोई क्षति न हो. आपको कोई हानि न हो.
अक्षत् चढ़ाने का मंत्र
अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुंकुमाक्ता: सुशोभिता:।
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर॥
इस मंत्र का अर्थ यह है कि सभी देवों में श्रेष्ठ परमेश्वर, कुंकुम से सुशोभित यह अक्षत् मैं आपको श्रद्धा और भक्ति से चढ़ा रहा हूं, आप से ग्रहण करें.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें


