Som Pradosh Vrat 2026: रवि योग में सोम प्रदोष व्रत आज, जानें महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त

Som Pradosh Vrat 2026: रवि योग में सोम प्रदोष व्रत आज, जानें महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त

Som Pradosh Vrat 2026: आज सोम प्रदोष व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में यह व्रत भगवान भगवान शिव को समर्पित होता है और इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है. जिस तरह भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी तिथि का महत्व है, उसी तरह प्रदोष व्रत शिवजी को समर्पित है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस बार सोम प्रदोष व्रत के दिन रवि नामक योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. आइए जानते हैं सोम प्रदोष व्रत का महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र और आरती…

सोम प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर होता है. मान्यता है कि प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में की गई पूजा का कई गुना अधिक फल मिलता है. इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में शांति व समृद्धि आती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से पितृ दोष दूर होता है और परिवार में सुख-शांति और संपन्नता आती है. कुंडली में अगर चंद्रमा शुभ स्थिति में नहीं है तो सोम प्रदोष व्रत अवश्य करना चाहिए.

सोम प्रदोष व्रत 2026 आज
त्रयोदशी तिथि की शुरुआत – 30 मार्च, सुबह 7 बजकर 9 मिनट से
त्रयोदशी तिथि का समापन – 31 मार्च, सुबह 6 बजकर 55 मिनट तक
त्रयोदशी तिथि का प्रदोष काल 30 मार्च दिन सोमवार को पड़ रहा है इसलिए सोम प्रदोष व्रत आज है.

सोम प्रदोष व्रत 2026 शुभ संयोग
सोम प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है और इस दिन सोमवार का व्रत भी किया जाएगा. साथ ही इस दिन रवि नामक योग बन रहे हैं, जो अशुभ नक्षत्रों या तिथियों के दोषों को समाप्त कर कार्यों में सफलता, सुख-समृद्धि और तेज प्रदान करता है. सोम प्रदोष व्रत के दिन कुंभ राशि में मंगल, राहु और बुध ग्रह की युति बन रही है. वहीं मीन राशि में सूर्य और शनि ग्रह की युति बन रही है.

सोम प्रदोष पूजा मुहूर्त
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त – शाम 7 बजकर 20 मिनट से 9 बजकर 23 मिनट तक
प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद 45 मिनट के भीतर और 1.5 घंटे तक करना श्रेष्ठ माना गया है. उदाहरण के लिए अगर सूर्यास्त 7:10 PM है, तो प्रदोष काल 7:10 PM से 8:40 PM तक रहेगा.

सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि
सोम प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूरे दिन व्रत का संकल्प लें. फिर पास के शिवालय में जाकर शिवलिंग समेत शिव परिवार की पूजा अर्चना करें. पूजा के समय शिवलिंग का दूध, गंगाजल, शहद आदि चीजों से अभिषेक करें. फिर 11 या 21 बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, फल, सुपारी, लौंग, इलायची, फूल, धूप, दीप, गंध, चावल आदि नौवेघ अर्पित करें. इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें और शिवजी की आरती उतारें. शाम के समय प्रदोष काल में शिवजी की पूजा करना विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है. इस समय ऐसे ही पूजा अर्चा करें, पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए अपनी मनोकामनाएं व्यक्त की जाती हैं.

शिवजी के मंत्र:
ॐ नमः शिवाय
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमः
ऊँ ऐं ह्रीं शिव-गौरीमय-ह्रीं ऐं ऊँ
ऊँ नमो धनदाय स्वाहा
शिवजी रुद्र मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

प्रदोष स्तुति:
शिवाय नमस्तुभ्यं प्रदोषं पूजितं मया। क्षमस्व अपराधं मे करुणासागर प्रभो॥

शिवजी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ॐ जय शिव ओंकारा॥

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