Sidh Peeth Chauth Mata Mandir: करवा चौथ का व्रत रखें या ना रखें, इस दो मंदिर में चौथ माता के दर्शन मात्र से मिलता है पति की लंबी आयु का वरदान
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Karwa Chauth 2025: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को हर वर्ष करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और करवा माता की पूजा अर्चना करती हैं. उज्जैन और राजस्थान में चौथ माता के ऐसे मंदिर हैं, जहां दर्शन करने मात्र से ही पति की लंबी आयु का वरदान मिलता है. आइए जानते हैं इन मंदिरों के बारे में…
Sidh Peeth Chauth Mata Mandir: 10 अक्टूबर दिन शुक्रवार को देशभर में करवाचौथ का त्योहार मनाया जाएगा. यह पर्व हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. यह त्योहार खासतौर पर उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में मनाया जाता है. इस दिन पति की लंबी आयु के लिए पत्नियां निर्जला उपवास करती हैं और रात में चांद को देखकर निर्जला उपवास खोलती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजस्थान और उज्जैन में चौथ माता को समर्पित ऐसा मंदिर है, जहां महिलाएं अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लेने जाती हैं.

राजस्थान का सिद्धपीठ चौथ माता मंदिर
राजस्थान के माधोपुर जिले के चौथ शहर के बरवाड़ा कस्बे में सिद्धपीठ चौथ माता का मंदिर है. यह मंदिर खासतौर पर पति की लंबी आयु के वरदान के लिए प्रसिद्ध है. माना जाता है कि जो भी महिलाएं चौथ माता का आशीर्वाद लेती हैं, उनके पति की आयु क्षीण नहीं होती. यह मंदिर अरावली पर्वत की पहाड़ियों पर बसा है और मंदिर के प्रांगण तक पहुंचने के लिए भक्तों को लंबी सीढ़ियों को चढ़कर जाना होता है. करवाचौथ के मौके पर इस मंदिर में महिलाओं की भीड़ उमड़ जाती है.
चौथ माता, मां गौरी का दूसरा रूप हैं. माना जाता है कि इस मंदिर में मांगी गई इच्छा कभी अधूरी नहीं रहती. नवरात्रि के मौके पर भी मंदिर में खास भीड़ रहती है. ये मंदिर इसलिए भी खास है क्योंकि इस मंदिर का निर्माण शासक भीम सिंह ने कराया था. मंदिर की बनावट राजस्थान की कला और पुराने पारंपरिक काल को दर्शाती है.

उज्जैन में स्थित करवा चौथ माता का मंदिर
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी मां पार्वती को समर्पित करवा चौथ माता का मंदिर है. यह मंदिर उन्हेल बायपास के पास के जीवनखेड़ी गांव में बना है, लेकिन फिर भी यहां की मान्यता बहुत ज्यादा है. इस मंदिर में मां पार्वती अपनी दोनों बहुएं, ऋद्धि और सिद्धि के साथ विराजमान हैं और भगवान गणेश भी साथ हैं. इस मंदिर की खास बात ये है कि ये मंदिर सिर्फ करवाचौथ के दिन ही खुलता है और साल के बाकी दिन बंद रहता है. ये मंदिर डॉ. कैलाश नागवंशी नाम के शख्स ने बनाया है और मंदिर को अपनी मां को समर्पित किया है.
मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें
मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें


