Shivaratri Panchamrit Offering Rules: शिवरात्रि पर पंचामृत चढ़ाने से पहले जान लें ये नियम, वरना पूजा का फल रह जाएगा अधूरा!

Shivaratri Panchamrit Offering Rules: शिवरात्रि पर पंचामृत चढ़ाने से पहले जान लें ये नियम, वरना पूजा का फल रह जाएगा अधूरा!

Shivaratri Panchamrit Offering Rules: शिवरात्रि की रात आते ही मंदिरों में घंटियां, घरों में भजन और हर तरफ “बम बम भोले” की गूंज शुरू हो जाती है. बहुत से लोग पूरे साल इस दिन का इंतजार करते हैं, ताकि भोलेनाथ पर दूध, जल और पंचामृत चढ़ाकर मन की इच्छा कह सकें, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना सही तरीके और नियम जाने पंचामृत चढ़ाना कई बार उल्टा भी पड़ सकता है? अक्सर लोग भक्ति में तो सच्चे होते हैं, मगर छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं. जैसे कौन-सा बर्तन इस्तेमाल करना है, किस क्रम में अर्पण करना है, या पंचामृत बनाते समय किन चीजों का ध्यान रखना है. पूजा सिर्फ भाव से नहीं, सही विधि से भी जुड़ी होती है. इस शिवरात्रि अगर आप सच में चाहते हैं कि आपकी प्रार्थना सीधे भोलेनाथ तक पहुंचे, तो पहले ये जरूरी बातें जान लीजिए.

पंचामृत चढ़ाने की परंपरा क्यों खास मानी जाती है
पंचामृत पांच चीजों से बनता है-दूध, दही, घी, शहद और शक्कर. मान्यता है कि ये पांचों मिलकर शरीर, मन और वातावरण को पवित्र करते हैं. शिवलिंग पर इसे चढ़ाने का मतलब है अपनी इच्छाएं, कड़वाहट और अहंकार सब शिव को सौंप देना. गांवों में आज भी बुजुर्ग कहते हैं कि “भोलेनाथ को साफ मन पसंद है, दिखावा नहीं.” इसलिए पंचामृत सिर्फ एक प्रसाद नहीं, एक भावना है, लेकिन भावना के साथ तरीका भी सही होना चाहिए.

आम गलतियां जो लोग हर साल दोहराते हैं
बासी या फ्रिज का सामान इस्तेमाल करना
कई लोग जल्दी में फ्रिज का पुराना दूध या दही निकाल लेते हैं. पूजा में हमेशा ताजा चीजें ही रखी जाती हैं. बासी सामग्री से पूजा अधूरी मानी जाती है.

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स्टील या प्लास्टिक के बर्तन
पंचामृत बनाने और चढ़ाने के लिए तांबे, पीतल या चांदी का बर्तन अच्छा माना जाता है. प्लास्टिक या स्टील से बचना चाहिए. मंदिरों में आपने भी देखा होगा कि अभिषेक खास धातु के पात्र से होता है.

क्रम गड़बड़ कर देना
पहले जल, फिर दूध, उसके बाद दही, घी, शहद और अंत में शक्कर मिला पंचामृत. कई लोग सब कुछ एक साथ डाल देते हैं, जो परंपरा के मुताबिक ठीक नहीं माना जाता.

क्या महिलाएं या बच्चे पंचामृत चढ़ा सकते हैं?
इसको लेकर बहुत भ्रम है. सच ये है कि साफ-सफाई और श्रद्धा हो तो कोई भी चढ़ा सकता है, लेकिन घर के बड़े अक्सर कहते हैं कि स्नान, साफ कपड़े और शांत मन जरूरी है. जल्दबाजी या गुस्से की हालत में पूजा करने से बचना चाहिए.

पूजा से पहले ये छोटी बातें बड़ा फर्क डालती हैं
अक्सर लोग मोबाइल पर भजन चलाकर ही पूजा निपटा देते हैं, लेकिन शिवरात्रि की रात को कुछ मिनट शांति से बैठना, “ॐ नमः शिवाय” जपना और मन को स्थिर करना ज्यादा असरदार माना जाता है. एक और बात-पंचामृत चढ़ाने के बाद उसे इधर-उधर न फेंकें. इसे प्रसाद की तरह बांटा जाता है या तुलसी, पीपल जैसे पेड़ की जड़ में डाला जाता है.

असली भक्ति दिखावे में नहीं
शहरों में आजकल बड़े-बड़े दूध के डिब्बे चढ़ाने का ट्रेंड दिखता है, लेकिन पुजारी बताते हैं कि एक चम्मच पंचामृत भी सच्चे मन से चढ़ाया जाए तो वही काफी है. ज्यादा से ज्यादा चढ़ाने की होड़ का कोई मतलब नहीं. भोलेनाथ को “भोला” यूं ही नहीं कहा जाता. वो भाव देखते हैं, मात्रा नहीं.

अंत में याद रखने वाली बात
शिवरात्रि साल में एक बार आती है, मगर इसका असर पूरे साल की सोच पर पड़ता है, अगर पूजा नियम से, सादगी से और सच्चे मन से की जाए तो मन को अलग शांति मिलती है. वरना सब सिर्फ रस्म बनकर रह जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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