Shattila Ekadashi 2026 : माघ कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी आज, क्यों माना जाता है यह दिन व्रत, दान के लिए खास, जानें महत्व और पूजा विधि

Shattila Ekadashi 2026 : माघ कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी आज, क्यों माना जाता है यह दिन व्रत, दान के लिए खास, जानें महत्व और पूजा विधि

Shattila Ekadashi 2026 : हिंदू पंचांग में एकादशी का विशेष स्थान है और हर एकादशी का अपना अलग महत्व माना जाता है. आज मनाई जा रही षटतिला एकादशी माघ महीने के कृष्ण पक्ष में आती है. यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है और माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ किए गए व्रत और दान से जीवन की कई परेशानियों से राहत मिलती है. षटतिला एकादशी का नाम सुनकर ही साफ हो जाता है कि इस दिन तिल का खास महत्व रहता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार तिल का उपयोग पूजा, स्नान, भोजन और दान में करने से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं. आज के समय में जब भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव और अस्थिरता बढ़ रही है, ऐसे में षटतिला एकादशी जैसे व्रत आत्मिक शांति पाने का एक माध्यम बन सकते हैं. यह एकादशी केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, सेवा भाव और सकारात्मक सोच को अपनाने की प्रेरणा देती है. माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से पुराने पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख समृद्धि का मार्ग खुलता है. खास बात यह है कि इस व्रत को गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी सरल तरीके से किया जा सकता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

षटतिला एकादशी की तिथि
पंचांग के अनुसार माघ कृष्ण एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी, मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 17 मिनट से हो रही है. यह तिथि 14 जनवरी, बुधवार को शाम 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. उदय तिथि के अनुसार षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा. यह नए साल की पहली एकादशी है, इसलिए व्रती इस दिन विशेष नियमों का पालन करते हैं.

षटतिला एकादशी के पूजा मुहूर्त
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. इस समय स्नान करके व्रत का संकल्प लेना श्रेष्ठ माना जाता है. भगवान विष्णु की पूजा का उत्तम समय सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक है. इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं बन रहा है. राहुकाल दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 1 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, इस दौरान पूजा से बचना चाहिए.

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पूजा विधि
-षटतिला एकादशी की पूजा विधि बहुत कठिन नहीं है. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.
-स्नान के पानी में थोड़ा सा तिल मिलाएं. इसके बाद साफ वस्त्र पहनें.
-अब पूजा स्थान को स्वच्छ करें. भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं.
-तिल से बना दीपक विशेष फलदायी माना जाता है.
-भगवान विष्णु को फूल, तुलसी दल और तिल से बनी चीजें अर्पित करें.
-इसके बाद विष्णु सहस्रनाम या सरल मंत्रों का जाप करें.
-व्रत रखने वाले लोग दिन में एक बार फलाहार करते हैं या फिर केवल जल पर रहते हैं.
-शाम के समय फिर से दीपक जलाकर भगवान की आरती करें.

अगर संभव हो तो इस दिन दान जरूर करें. तिल, गुड़, कंबल या भोजन का दान करना शुभ माना जाता है. पूजा के दौरान मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें और सकारात्मक भाव बनाए रखें.

षटतिला एकादशी पर बनने वाले 3 शुभ योग
1. षटतिला एकादशी के दिन तीन शुभ योग बन रहे हैं, जो इस व्रत को और फलदायी बना देते हैं. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और वृद्धि योग का संयोग रहेगा.

2. सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग सुबह 7 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 15 जनवरी को सुबह 3 बजकर 3 मिनट तक रहेंगे. इन योगों में की गई पूजा, दान और जप का विशेष फल मिलता है.

3. इसके अलावा सुबह से शाम 7 बजकर 56 मिनट तक गण्ड योग रहेगा, इसके बाद वृद्धि योग शुरू होगा. इस दिन सुबह अनुराधा नक्षत्र रहेगा, जो 15 जनवरी को सुबह 3 बजकर 3 मिनट तक रहेगा, इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र प्रारंभ होगा.

व्रत के नियम और सावधानियां
इस दिन मांसाहार और शराब से दूरी रखना जरूरी माना जाता है. व्रत के दौरान क्रोध और गलत बोल से बचना चाहिए. जो लोग पूरे दिन का व्रत नहीं रख सकते, वे हल्का सात्विक भोजन कर सकते हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा दिखावे के लिए नहीं, बल्कि मन की शुद्धता के साथ की जाए.

Shattila Ekadashi

षटतिला एकादशी का महत्व
धार्मिक कथाओं के अनुसार, षटतिला एकादशी का संबंध दान और तप से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि इस दिन तिल का छह अलग अलग रूपों में उपयोग करना शुभ फल देता है. इनमें तिल से स्नान, तिल का उबटन, तिल का हवन, तिल का भोजन, तिल का दान और तिल से दीपक जलाना शामिल है. इस कारण इसे षटतिला एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से व्रत रखता है, उसके जीवन में धन से जुड़ी परेशानियां धीरे धीरे कम होने लगती हैं. साथ ही मन को स्थिरता मिलती है और नकारात्मक विचारों से दूरी बनती है. कई लोग इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को तिल, कपड़े या भोजन का दान भी करते हैं, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है.

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