Sankashti Chaturthi November 2025 Date: कब है गणाधिप संकष्टी चतुर्थी? ​शिव योग में होगी पूजा, जानें तारीख, मुहूर्त, चंद्रोदय समय

Sankashti Chaturthi November 2025 Date: कब है गणाधिप संकष्टी चतुर्थी? ​शिव योग में होगी पूजा, जानें तारीख, मुहूर्त, चंद्रोदय समय

Sankashti Chaturthi November 2025 Date: नवंबर 2025 की संकष्टी चतुर्थी यानि गणाधिप संकष्टी चतुर्थी मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है. इस दिन व्रत रखकर विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा की जाती है और रात के समय में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बार व्रत का पारण होता है. इस बार गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन शिव और सिद्ध योग बन रहे हैं. उज्जैन स्थिति महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी से जानते हैं ​कि गणाधिप संकष्टी चतुर्थी कब है? गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त, चंद्रोदय समय क्या है?

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी तारीख

पंचांग के अनुसार, गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के लिए मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर को सुबह 7 बजकर 32 मिनट से हो रही है और यह तिथि 9 नवंबर को तड़के 4 बजकर 25 मिनट पर खत्म हो रही है. इस वजह से गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत 8 नवंबर शनिवार को रखा जाएगा.

शिव योग में गणाधिप संकष्टी चतुर्थी

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन शिव और सिद्ध योग बन रहे हैं. उस दिन शिव योग प्रात:काल से लेकर शाम 6 बजकर 32 मिनट तक है, उसके बाद से सिद्ध योग है. शिव योग जप, ध्यान, साधना आदि के लिए शुभ फलदायी है, जबकि सिद्ध योग में किए गए कार्य सफल होते हैं.

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर मृगशिरा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 02 मिनट तक है, उसके बाद से आर्द्रा नक्षत्र है.

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी मुहूर्त

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:53 ए एम से लेकर 05:46 ए एम तक है. उसके बाद अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक है. यह उस दिन का शुभ समय है.

सुबह में गणेश पूजा का शुभ-उत्तम मुहूर्त 08:00 ए एम से 09:21 ए एम तक है. वहीं दोपहर में पूजा का मुहूर्त 12:05 पी एम से लेकर शाम 04:09 पी एम तक है. इसमें भी लाभ-उन्नति का मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 26 मिनट से दोपहर 02 बजकर 48 मिनट तक है. चतुर्थी पर निशिता मुहूर्त देर रात 11:39 पी एम से लेकर मध्य रात्रि 12:31 ए एम तक है.

भद्रा में गणाधिप संकष्टी चतुर्थी

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन भद्रा लग रही है. भद्रा का प्रारंभ सुबह 06:38 ए एम से लेकर 07:32 ए एम तक है. हालां​कि इस भद्रा का वास स्वर्ग में है, जिसका बुरा प्रभाव धरती पर नहीं होगा. ऐसे में आप शुभ कार्य कर सकते हैं. उस दिन का राहुकाल 09:21 ए एम से लेकर 10:43 ए एम तक है.

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर चांद निकलने का समय

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने वालों को चंद्रोदय का इंतजार रहेगा. चतुर्थी को शाम 07 बजकर 59 मिनट पर चांद निकलेगा. उस समय आप चंद्रमा की पूजा करें और अर्घ्य दें.

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का महत्व

  1. जो व्यक्ति गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा करता है, उसके सभी कष्ट और संकट दूर हो जाते हैं.
  2. स्कंद पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत विधि-विधान से करने पर जीवन में सुख-शांति आती है. गणपति कृपा से मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं.
  3. गणेश जी के आशीर्वाद से जीवन में शुभता आती है. कार्य सफल होते हैं, करियर में भी उन्नति होती है.

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