Ravan Kuldevi: उज्जैन में विराजमान हैं मां प्रत्यंगिरा, रावण की कुलदेवी, शत्रुओं के नाश के लिए दर्शन करते हैं भक्त

Ravan Kuldevi: उज्जैन में विराजमान हैं मां प्रत्यंगिरा, रावण की कुलदेवी, शत्रुओं के नाश के लिए दर्शन करते हैं भक्त

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उज्जैन में मां प्रत्यंगिरा, रावण की कुलदेवी, शत्रु नाश के लिए दर्शन करते भक्त

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Ravan Kuldevi: उज्जैन में मां प्रत्यंगिरा देवी का मंदिर है. मान्यता है कि मां प्रत्यंगिरा निकुंबला देवी का ही रूप हैं, जिनकी उत्पत्ति भगवान नरसिंह को शांत कराने के लिए हुई थी. इनको रावण का कुलदेवी भी कहा जाता है. इस देवी के दर्शन करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.

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रावण की कुलदेवी मां प्रत्यंगिरा.

Ravan Kuldevi: देश में कई ऐसे प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जिनका इतिहास महाभारत और रामायण काल से जुड़ा है. पांडवों ने देशभर में कई शिव और मां भवानी के मंदिरों की स्थापना की है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उज्जैन में मां भगवती के ऐसे अद्भुत रूप की पूजा होती है, जो दिखने में भगवान नरसिंह की छवि लगती हैं. खास बात यह है कि मंदिर में मौजूद मां, असुर रावण की कुलदेवी हैं, जो अजेयता और शत्रु विनाश का वरदान देती हैं.

रौद्र रूप में हैं मां प्रत्यंगिरा

उज्जैन में महाकाल और मां बगलामुखी के प्रसिद्ध मंदिरों के बीच मां प्रत्यंगिरा देवी का मंदिर स्थित है. यह मंदिर भैरवगढ़ रोड स्थित बगलामुखी धाम के नजदीक ही है. मां प्रत्यंगिरा देवी का रूप मां के बाकी अवतारों से अलग और क्रोध को दिखाने वाला है. मां का चेहरा सिंह के जैसा है और बाकी का शरीर देवी के समान है. मां का ये प्रतिरूप सिंह की गर्जना की तरह दिखता है. देशभर में मां के कई रूद्र और क्रोधित अवतारों की पूजा होती है, लेकिन मां प्रत्यंगिरा देवी सबसे अलग हैं.

तंत्र की देवी के रूप में होती है पूजा

मां प्रत्यंगिरा को मां बगलामुखी की तरह तंत्र की देवी के रूप में पूजा जाता है. माना जाता है कि मां के दर्शन के बाद शरीर की सारी नकारात्मक ऊर्जा का विनाश होता है. अगर किसी ने तंत्र किया है तो मंदिर में विशेष अनुष्ठान के साथ उसका काट भी किया जा सकता है. भक्त अकाल मृत्यु के भय और शत्रु पर विजय पाने के लिए भी मां प्रत्यंगिरा की पूजा करते हैं. तांत्रिक भी अपनी साधनाओं को सिद्ध करने के लिए भी मंदिर में रात में अनुष्ठान करते हैं.

मां प्रत्यंगिरा की कथा

पौराणिक कथा की मानें तो जब परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने भगवान नरसिंह का रूप लिया था, तब हिरण्यकश्यप के वध के बाद भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ था. भगवान नरसिंह के क्रोध की वजह से देवता और असुर दोनों घबरा गए थे. तब सभी देवताओं के आह्वान के बाद मां प्रत्यंगिरा प्रकट हुई, जिन्होंने भगवान नरसिंह को शांत कराया था.

रावण की कुलदेवी हैं निकुंबला

खास बात ये है कि प्रत्यंगिरा देवी को निकुंबला देवी का ही रूप माना जाता है, जिनकी पूजा रावण और उसके पुत्र मेघनाद ने की थी. रामायण में मां निकुंबला देवी का जिक्र भी है कि कैसे युद्ध पर जाने से पहले रावण और उसके पुत्र मेघनाद ने विजय पाने के लिए मां के विशेष अनुष्ठान किए थे.

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कार्तिकेय तिवारी

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 12 वर्षों का अनुभव है. डिजिटल पत्रक…और पढ़ें

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