Purnima Shradh 2025 Today: पूर्णिमा का श्राद्ध आज, जानें कैसे करें पूर्णिमा का श्राद्ध व तर्पण, महत्व, सूतक काल का रखें ध्यान
पूर्णिमा श्राद्ध को पार्वण श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है. यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया जाता है, जिनका देहांत पूर्णिमा तिथि को हुआ हो. मान्यता है कि इस दिन श्राद्ध कर्म करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं. यह श्राद्ध पितृ पक्ष की शुरुआत से पहले एक महत्वपूर्ण धार्मिक कृत्य है. विद्वानों के अनुसार, श्राद्ध के सभी अनुष्ठान अपराह्न काल (दोपहर 12 बजे के बाद से मध्य रात्रि रात 12 बजे के पहले) समाप्त होने से पहले पूरे कर लेने चाहिए. अनुष्ठान के अंत में तर्पण करना अनिवार्य है, जो पितरों को तृप्त करने का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
पितृपक्ष की शुरुआत और समापन
हर वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा से होती है और समापन आश्विन मास की अमावस्या को होता है. यह पक्ष 15 दिन तक चलता है और हर तिथि को पितरों का तर्पण और श्राद्ध किया जाता है. इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर यानी आज से हो रही है और समापन 21 सितंबर को महालया अमावस्या के दिन होगा.

सूतक काल से पहले करें श्राद्ध और तर्पण
कुतुप काल: प्रातः 11:54 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक रहेगा
सूतक काल: दोपहर 12:57 बजे से शुरू होगा
पूर्णिमा का श्राद्ध या तर्पण 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक करना उत्तम रहेगा क्योंकि इसके बाद सूतक काल मान्य हो जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में कोई भी शुभ व मांगलिक कार्यक्रम नहीं करने चाहिए. ऐसे में सूतक काल से पहले ही पूर्णिमा का श्राद्ध कर लें.
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत – 6 सितंबर, मध्यरात्रि 1 बजकर 42 मिनट से
पूर्णिमा तिथि का समापन – 7 सितंबर, रात 11 बजकर 39 मिनट तक
उदिया तिथि को मानते हुए भाद्रपद पूर्णिमा का पर्व 7 सितंबर दिन रविवार को मनाया जाएगा.
चंद्र ग्रहण 2025 आज
चंद्र ग्रहण का प्रारंभ: 7 सितंबर, रात 9 बजकर 58 मिनट से
चंद्र ग्रहण का समापन: 8 सितंबर, मध्य रात्रि 1 बजकर 26 मिनट पर
चंद्र ग्रहण की कुल अवधि: लगभग 3 घंटे 29 मिनट

इस तरह करें पूर्णिमा का श्राद्ध
श्राद्ध कर्म में पितरों के नाम से दान, तर्पण, और ब्राह्मण भोज कराया जाता है और उन्हें दान-दक्षिणा दी जाती है. यह माना जाता है कि ब्राह्मणों को भोजन कराने से वह सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है. इसके बाद शुभ मुहूर्त में पवित्र नदी या घर पर तर्पण किया जाता है. इस दिन सात्विक भोजन और दान का विशेष महत्व है. श्राद्ध का एक महत्वपूर्ण भाग कौए (यम का दूत), गाय और कुत्ते को भी भोजन कराना है, क्योंकि इन्हें पूर्वजों का प्रतिनिधि माना जाता है.यह धार्मिक अनुष्ठान न केवल पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का अवसर है, बल्कि यह परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है.


