Premanand Ji Maharaj: दुनियाभर में क्यों आती हैं कोविड-19 जैसी महामारी? चौंका देगी इसकी वजह, प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कारण!

Premanand Ji Maharaj: दुनियाभर में क्यों आती हैं कोविड-19 जैसी महामारी? चौंका देगी इसकी वजह, प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कारण!

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Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज दुनियाभर में बेहद प्रसिद्ध हैं और अपने हर एक भक्त के सवाल का जवाब बड़ी ही सहजता से देते हैं. उनके अनुसार दुनियाभर में होने वाली प्राकृतिक आपदा के पीछे भी कारण होता है.

क्यों आती है कोविड-19 जैसी बीमारी?

हाइलाइट्स

  • प्राकृतिक आपदाएं भगवान की विनाश लीला का हिस्सा हैं.
  • महामारी भी विनाश लीला का एक रूप है.
  • व्यक्तिगत कर्मों से आपदाओं को जोड़ना ठीक नहीं.

Premanand Ji Maharaj: आज की दुनिया में महामारी जैसे संकट हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं. कभी कोविड-19 जैसी भयंकर बीमारी तो कभी अन्य वायरसों के कारण हम लोग चिंतित रहते हैं. ऐसे में एक भक्त ने प्रेमानंद जी महाराज से यह सवाल पूछा कि आखिर महामारी क्यों आती हैं? इस सवाल का प्रेमानंद जी ने बड़ा सहज और गूढ़ उत्तर दिया, जो न सिर्फ हमारे विचारों को खोलता है, बल्कि जीवन के कई पहलुओं को समझने में मदद करता है. आइए जानते हैं कि प्रेमानंद जी महाराज महामारी की उत्पत्ति को किस दृष्टिकोण से देखते हैं.

भगवान की 3 लीलाएं
प्रेमानंद जी महाराज ने महामारी के बारे में बात करते हुए भगवान की तीन लीलाओं का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि भगवान की तीन लीलाएं हैं: सृजन लीला, पालन लीला और विनाश लीला. जहां सृजन लीला के अंतर्गत भगवान दुनिया और जीवन की रचना करते हैं, वहीं पालन लीला के माध्यम से वह इस संसार का संरक्षण करते हैं. लेकिन विनाश लीला वह लीला है, जिसके कारण समय-समय पर इस संसार में विघटन और विनाश के संकेत होते रहते हैं.

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विनाश लीला का रूप
प्रेमानंद जी ने बताया कि भगवान की विनाश लीला किसी न किसी रूप में अवश्य प्रकट होती है. इस लीला के कारण ही प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप, बाढ़ और समुद्रों का उफान आना जैसी घटनाएं होती हैं. उदाहरण के लिए, जब समुद्र अपनी सीमा पार कर जाता है और ज्वार-भाटा उठता है, तो यह भी उसी विनाश लीला का हिस्सा होता है. इसी प्रकार महामारी जैसे वायरस भी इस लीला का एक रूप होते हैं.

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कर्म और भगवान का दृष्टिकोण
प्रेमानंद जी महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार की घटनाओं को किसी के व्यक्तिगत कर्मों से जोड़कर देखना ठीक नहीं है. चाहे कोई व्यक्ति पुण्यात्मा हो या पापात्मा, चाहे वह गृहस्थ हो या संन्यासी, हर किसी को भगवान की विनाश लीला का सामना करना पड़ सकता है. जैसे महामारी आई, वह भगवान की लीला के रूप में उत्पन्न हुई. इसे हम सिर्फ एक संकट के रूप में न देख कर, एक अदृश्य शक्ति का हिस्सा समझ सकते हैं, जो हमारे जीवन को बदलने का काम करती है.

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