Pitru Paksha 2025 Eating Tips: पितृपक्ष में भूलकर भी ना खाएं ये सब्जियां, इन दालों से भी बनाकर रखें दूरी

Pitru Paksha 2025 Eating Tips: पितृपक्ष में भूलकर भी ना खाएं ये सब्जियां, इन दालों से भी बनाकर रखें दूरी

Pitru Paksha 2025 Eating Tips Rules: पितृपक्ष का समय हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है. हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत होती है और अमावस्या तिथि को समापन होता है. साल 2025 में पितृपक्ष की शुरुआत 8 सितंबर से हो चुकी है और समापन 21 सितंबर को होगा. इस पखवाड़े में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं, तर्पण करते हैं और श्रद्धा से भोजन अर्पित करते हैं. मान्यता है कि इस दौरान खानपान का भी खास ख्याल रखना चाहिए, वरना पूर्वजों की कृपा कम हो सकती है. आर्युवेद के अनुसार, पितृपक्ष में कुछ सब्जियां और दाल ऐसी हैं, जिनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए. आइए जानते हैं पितृपक्ष में किन सब्जियों और दाल को नहीं खाना चाहिए…

पितृपक्ष में खान पान का विशेष ध्यान
पितृपक्ष में पूर्वजों को याद करते हुए तर्पण, श्राद्ध और दान करते हैं, ताकि पितरों का आशीर्वाद बना रहे. मान्यता है कि पितृपक्ष में पितर परिजनों के यहां आते हैं और श्राद्ध व तर्पण ग्रहण करते हैं. इस दौरान पितरों के साथ साथ ब्राह्मण, कौआ, गाय, बिल्ली और कुत्ते को भी जरूर भोजन कराएं, इसको पंचबलि श्राद्ध कहा जाता है और यह बहुत जरूरी होता है. पितृपक्ष में खान-पान का भी विशेष ध्यान रखा जाता है. धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में साफ कहा गया है कि पितृपक्ष में सात्विक भोजन ही करना चाहिए. इसका मतलब है कि खाने में सादगी और पवित्रता रहे. इसीलिए कई सब्जियां और दालें इस अवधि में वर्जित मानी जाती हैं.

पितृपक्ष में ना खाएं ये सब्जियां
पितृपक्ष के दौरान बैंगन, खीरा, करेला, लहसुन, प्याज, कटहल इस तरह की सभी सब्जियां वर्जित बताई गई हैं. इन्हें अशुभ माना जाता है और पितृपक्ष में इनसे परहेज करने की सलाह दी जाती है.मान्यता है कि इस दौरान खाई जाने वाली हर चीज पितरों को भी प्राप्त होती है. अगर असात्विक या अशुभ मानी जाने वाली वस्तु खा ली जाए तो पितरों को संतोष नहीं मिलता.

पितृपक्ष में इन दालों से बचकर रहें
पितृपक्ष के दौरान उड़द की दाल, मसूर की दाल, काले सरसों के दान, काला नमक, सफेद व काला चना को खाने से मना किया जाता है. मान्यता है कि ये दालें पितरों को अर्पण करने योग्य नहीं होतीं, इसलिए इनका सेवन नहीं किया जाता. पितृपक्ष में पितरों को ध्यान में रखते हुए भोजन करना चाहिए. यही कारण है कि इस समय दाल, अनाज और सब्जियों में भी शुद्ध और सात्विक विकल्प ही चुने जाते हैं.

पितरों की कृपा से होती है उन्नति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध और पितरों की सेवा से जीवन में उन्नति होती है. अगर पितरों का तर्पण और श्राद्ध न किया जाए तो चंद्रमा और अन्य ग्रह अशुभ फल देने लगते हैं, जिससे मानसिक अशांति, परिवार में कलह और संपत्ति संबंधी अड़चन आती हैं. अगर कुंडली के 7वें भाव का चंद्रमा अशुभ हो, तो व्यक्ति को पितरों का श्राद्ध करना, बुजुर्गों और बच्चों का आशीर्वाद लेना तथा धार्मिक स्थानों पर दान करना चाहिए. इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है और ग्रहों के दोष शांत होते हैं.

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