Pitru Paksha 2025: भगवान शिव की नगरी में यहां श्राद्ध से भटकती आत्मा को मिलती है मुक्ति और होती है मोक्ष की प्राप्ति

Pitru Paksha 2025: भगवान शिव की नगरी में यहां श्राद्ध से भटकती आत्मा को मिलती है मुक्ति और होती है मोक्ष की प्राप्ति

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Kashi Pishach Mochan Kund: भगवान शिव की नगरी में एक चमत्कारी कुंड है. यह कुंड एक ऐसा दिव्य स्थल है, जहां स्नान और तर्पण से जीवन की भूत-प्रेत बाधाएं, पितृ दोष और मानसिक क्लेश दूर होकर आत्मिक शांति और समृद्धि मिल…और पढ़ें

भगवान शिव की नगरी में यहां श्राद्ध से भटकती आत्मा को मिलती है मुक्ति
आज से पूर्णिमा श्राद्ध की शुरुआत हो चुकी है और इसी के साथ भगवान शिव की नगरी काशी में लोगों की भीड़ उमड़ रही है. जिन लोगों की पितृपक्ष की तिथि पूर्णिमा को आती है, वे आज श्राद्ध और पिंडदान कर रहे हैं. पितृ पक्ष का प्रारंभ आज से यानी भाद्रपद पूर्णिमा से हो रहा है और इसका समापन 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा. इस अवसर पर काशी के प्राचीन और श्रद्धा-स्थल पिशाच मोचन कुंड पर प्रतिदिन 25 से 30 हजार श्रद्धालु जुटते हैं. यहां वे विधि-विधान से अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं. मान्यता है कि पिशाच मोचन कुंड में किए गए श्राद्ध से पितरों को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.

भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से मिलती है मुक्ति
काशी का पिशाच मोचन कुंड वाराणसी में स्थित है और मान्यता है कि यहां स्नान करने से पिशाच बाधा, भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है. शास्त्रों में इसे ऐसा तीर्थ कहा गया है जहां पूर्वजों की आत्माओं की शांति के लिए विशेष श्राद्ध और तर्पण किए जाते हैं. कहते हैं कि स्वयं भगवान विष्णु ने इस कुंड को पिशाच मोचन का वरदान दिया, ताकि जो भी यहां श्रद्धा से स्नान और पूजा करे, उसके जीवन से अशुभ बाधाएं दूर हो जाएं.

हर दिन हजारों की संख्या में पहुंचते हैं लोग
पिशाच मोचन कुंड के शास्त्री ने बताया कि मरने के बाद काशी में मुक्ति तो मिलती है, लेकिन अगर कोई परिवार का सदस्य पिशाच मोचन पर पिंडदान और श्राद्ध करता है तो उससे उनके मृत परिजन को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है. यह परंपरा अनादिकाल से चल रही है. उन्होंने कहा कि जो भी प्रेत या ब्रह्म दोष होते हैं, पिशाच मोचन कुंड पर पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मुक्ति मिलेगी. पिशाच मोचन कुंड पर एक दिन में करीब 25 से 30 हजार लोग पहुंचते हैं.

सोमवार से पितृपक्ष की शुरुआत
सोमवार से 15 दिन के लिए पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है. यहां बड़ी संख्या में लोग पिंडदान करने पहुंचते हैं. विशेष विधि विधान यह है कि अगर पितृ प्रेत योनि में भी हैं तो पिशाच मोचन कुंड पर पिंडदान से मुक्ति मिलती है. जो लोग अनजाने में या पिछले जन्मों के कारण पिशाच दोष या प्रेतबाधा से पीड़ित होते हैं, वे इस कुंड में स्नान और तर्पण करके शांति प्राप्त करते हैं. यह स्थान विशेष रूप से पितृपक्ष और अमावस्या के अवसर पर अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें

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