Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष में गया जी के अलावा इन 6 स्थानों पर भी होता है श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान, जानें और भी बातें

Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष में गया जी के अलावा इन 6 स्थानों पर भी होता है श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान, जानें और भी बातें

इस समय पितृ पक्ष चल रहा है. पितृ पक्ष के समय में लोग अपने पितरों की शांति और तृप्ति के लिए बिहार के गया जी में श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि करते हैं. अधिकतर लोगों को गया जी के बारे में पता है, लेकिन देश में और भी ऐसी जगहें हैं, जहां पर पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. इससे पितरों को तृप्ति और मोक्ष प्राप्त होता है. कहा जाता है कि अपने जीवन काल में एक बार जरूर इन जगहों में से किसी एक जगह पर जाकर पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करना चाहिए. आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष में किन जगहों पर पूजा करनी चाहिए?

पितृ पक्ष में पूजा करने वाले स्थान

1. गया जी: बिहार का गया जी पितृ श्राद्ध का सबसे बड़ा और उत्तम तीर्थ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गया जी में विष्णुपाद मंदिर और फल्गु नदी है, जहां पर तर्पण करने से पितरों को मोक्ष मिलता है.
2. वाराणसी: भगवान शिव की नगरी काशी को मुक्ति का धाम कहा जाता है, जहां बाबा विश्वनाथ विराजते हैं. जो लोग वाराणसी में अपने पितरों को गंगा के किनारे तर्पण देते हैं और उनके​ लिए श्राद्ध करते हैं, वे महादेव की कृपा से मोक्ष प्राप्त करते हैं. वे लोग जन्म और मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं.

3. नासिक: पितरों की मुक्ति के लिए भगवान त्र्यंबकेश्वर की नगरी नासिक भी महत्वपूर्ण है. यह गोदावरी नदी के तट पर बसा है. जो लोग नासिक में अपने पितरों के लिए पूजा, तर्पण, श्राद्ध आदि करते हैं, उनके पितरों को तृप्ति मिलती है.

4. पुष्कर: राजस्थान का पुष्पकर भी​ पितरों की मुक्ति का स्थान है. जो लोग पुष्कर में पितरों के लिए पूजा, स्नान, दान आदि करते हैं, वे तृप्त होते हैं. यहां पुष्कर में ब्रह्मा जी का तीर्थ स्थल भी है.

5. प्रयागराज का त्रिवेणी संगम: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का त्रिवेणी संगम भी पितरों के उद्धार के लिए जाना जाता है. प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है. जो लोग प्रयागराज में पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करते हैं, उनको विष्णु कृपा से तृप्ति और मुक्ति मिल जाती है.

6. गोकर्ण: कर्नाटक के गोकर्ण को भी गया तीर्थ के नाम से जानते हैं. गोकर्ण में भी पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करते हैं. गोकर्ण को दक्षिण का काशी कहा जाता है.

7. सिद्धपुर: गुजरात के सिद्धपुर को श्राद्ध तीर्थ कहा जाता है. इस ​जगह पर भी लोग पितरों के उद्धार के लिए तर्पण और श्राद्ध करते हैं.

इन जगहों के अलावा उज्जैन, हरिद्वार, रामेश्वरम आदि स्थानों पर भी पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं. ​किहीं कारणों से आप इन स्थानों पर नहीं जा सकते हैं तो आप पितृ पक्ष में अपने घर पर ही पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करें. आपके पितर तृप्त होकर आपको आशीर्वाद देंगे.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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