Pind Daan in Gaya: पितृपक्ष के पहले दिन गया में उमड़ा आस्था का सैलाब, तीनों लोकों में दुर्लभ गया में पिंडदान

Pind Daan in Gaya: पितृपक्ष के पहले दिन गया में उमड़ा आस्था का सैलाब, तीनों लोकों में दुर्लभ गया में पिंडदान

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Pind Daan in Gaya: पितृपक्ष के पहले दिन गया में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. पितृपक्ष में गया में पिंडदान और श्राद्ध करने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि गया में पिंडदान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और घर में…और पढ़ें

पितृपक्ष के पहले दिन गया में आस्था का सैलाब, क्यों है तीनों लोकों में दुर्लभ
Pind Daan in Gaya: पितृपक्ष का प्रारंभ रविवार यानी सात सितंबर से शुरू हो गया है और समापन 21 सितम्बर को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के साथ होगा. पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अवधि होती है, जिसे विशेष रूप से पूर्वजों (पितरों) के तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए निर्धारित किया गया है. जन्म से ही मनुष्य देवऋण, ऋषि ऋण और पितृऋण से बंधा माना जाता है. श्राद्ध और तर्पण से पितृ ऋण की शांति होती है. मान्यता है कि पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.

पितृपक्ष के पहले दिन तीर्थयात्रियों का जमावड़ा
पितृपक्ष मेला का शुभारंभ होते ही आस्था का सागर उमड़ पड़ा. पहले ही दिन गया के विष्णुपद स्थित देवघाट पर सुबह से ही तीर्थयात्रियों का जमावड़ा होने लगा और लोगों ने पिंडदान किया. दूरदराज ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात सहित अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया पहुंचे. सबकी एक ही कामना रही पूर्वजों की आत्मा की मोक्ष प्राप्ति. धार्मिक ग्रंथों में गया के महत्व का विस्तार से उल्लेख है.

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गया में पिंडदान का महत्व
मान्‍यता है कि बिहार के गया में किया गया पिंडदान तीनों लोकों में भी दुर्लभ है. यहां पिंडदान करने से पितरों की मुक्ति और साधक को मोक्ष प्राप्ति होती है. देवघाट पर रविवार को श्रद्धालुओं ने खीर से विशेष पिंडदान किया. मान्यता है कि पितृपक्ष के पहले दिन खीर से किया गया पिंडदान पितरों को तृप्त करता है. कई श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों और अकाल मृत्यु को प्राप्त परिजनों के चित्र सामने रखकर भी विधि-विधान से पिंडदान किया.

सुरक्षा की पूरी व्यवस्था
तीर्थयात्रियों ने कहा कि गया में पिंडदान करने से मन को शांति मिलती है. पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का भाव जागता है. कई श्रद्धालुओं ने पहली बार गया पहुंचकर इस अद्भुत परंपरा का अनुभव किया. जिला प्रशासन ने देवघाट पर श्रद्धालुओं के बैठने के लिए टेंट लगाए हैं. पीने का स्‍वच्‍छ पानी, शौचालय, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की उचित व्यवस्था की गई है. सुरक्षा को लेकर भी पुख्ता इंतजाम हैं. एनडीआरएफ की टीम से लेकर पुलिस बल तक तैनात है.

पितरों को मिलती है संतुष्टि
पुजारी संदीप शास्त्री ने बातचीत के दौरान बताया कि आज हमने फल्‍गु नदी के किनारे प्रथम दिवस का पिंडदान किया. पितृपक्ष के दौरान यहां आकर पिंडदान मात्र करने से पितरों को संतुष्टि मिलती है.पिंडदान करने आई रीता गोयल ने बताया कि मैं ओडिशा के राउरकेला से आई हूं. यहां पर पितरों की मोक्ष के लिए पिंडदान के लिए आई हूं. गया में हमारे सात पीढ़ियों के लोग पिंडदान करने के लिए आ चुके हैं.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें

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