Phalguna Amavasya 2026 Pitru Puja: फाल्गुन अमावस्या पर लगेगा सूर्य ग्रहण, तो कैसे होगा पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध? जान लें तरीका
फाल्गुन अमावस्या पर लगेगा सूर्य ग्रहण, कैसे होगा पितरों के लिए तर्पण-श्राद्ध?
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Phalguna Amavasya 2026 Pitru Puja: फाल्गुन अमावस्या तिथि 16 फरवरी को 5:34 पीएम से 17 फरवरी को 5:30 पीएम तक है. ऐसे में फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी को है और उस दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा. सूर्य ग्रहण लगने पर पितरों के लिए फाल्गुन अमावस्या का तर्पण, श्राद्ध आदि कैसे होगा?
फाल्गुन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगेगा, तो पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कैसे होगा?
Phalguna Amavasya 2026 Pitru Puja: फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी दिन मंगलवार को है. इस बार फाल्गुन अमावस्या के दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है. फाल्गुन अमावस्या के दिन सुबह में स्नान और दान किया जाता है. पितरों की तृप्ति और पितृ दोष से मुक्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, दान आदि करते हैं. लेकिन इस बार फाल्गुन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण होने से पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, स्नान, दान आदि कैसे होगा? इसके लिए आपको सबसे पहले यह जानना होगा कि फाल्गुन अमावस्या तिथि कब से कब तक है और सूर्य ग्रहण का समय क्या है?
फाल्गुन अमावस्या की तिथि
इस बार फाल्गुन अमावस्या की तिथि 16 फरवरी सोमवार को शाम में 5:34 बजे से लेकर 17 फरवरी मंगलवार को शाम 5:30 बजे तक है. अमावस्या का सूर्योदय 17 फरवरी को 06:58 ए एम पर होगा. ऐसे में फाल्गुन अमावस्या का स्नान और दान 17 फरवरी को होगा.
फाल्गुन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का समय
17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण दोपहर में 3 बजकर 26 मिनट से लगेगा. इस सूर्य ग्रहण का समापन शाम 7:57 बजे होना है.
भारत में नहीं दिखाई देगा सूर्य ग्रहण
साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इस वजह से इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. यदि यह भारत में दिखाई देता तो इसका सूतक काल 12 घंटे पहले यानि तड़के 3 बजकर 26 मिनट से लग जाता. अब सूतक काल नहीं लगेगा, तो किसी भी कार्य पर रोक नहीं होगी. आप सामान्य तरीके से ही पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध आदि कर सकते हैं.
फाल्गुन अमावस्या पर पितृ पूजा, तर्पण, श्राद्ध
- फाल्गुन अमावस्या के दिन आप ब्रह्म मुहूर्त 05:16 ए एम से 06:07 ए एम या फिर सूर्योदय के बाद भी स्नान कर लें.
- इसके बाद साफ कपड़े पहनें. हाथ में कुशा की पवित्री धारण करें, फिर काले तिल, सफेद फूल और पानी से अपने पितरों के लिए तर्पण दें.
- ध्यान रखें कि पानी कुशा की मदद से पितरों को देनी है. इससे मिलने वाला जल पितरों को प्राप्त होता है और इसे पाकर वे तृप्त हो जाते हैं. आपको अपने सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों का स्मरण करके तर्पण देना चाहिए.
- तर्पण देने के बाद पितरों के देवता अर्यमा की पूजा करें. पितृ सूक्त का पाठ करें. उसके बाद पितरों के नाम से वस्त्र, अन्न, फल आदि का दान करें.
- जो लोग पितरों का श्राद्ध नहीं किए हैं, वे फाल्गुन अमावस्या पर विधि विधान से पितरों का श्राद्ध और पिंडदान करें. इससे आपके पितर प्रसन्न होंगे और तृप्त होकर आशीर्वाद देंगे. जिससे आपके परिवार की उन्नति होगी.
- पितरों के लिए आप श्राद्ध, पिंडदान आदि का कार्य दिन में 11:30 बजे से लेकर दोपहर 2:30 बजे के बीच कर लेना चाहिए.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 12 वर्षों का अनुभव है. डिजिटल पत्रक…और पढ़ें


