Panchakshara Stotram Arth: क्या आप जानते हैं “न-म-शि-वा-य” का असली मतलब? हर श्लोक में छिपा शिव का संदेश जानें अर्थ और पूरा स्तोत्र

Panchakshara Stotram Arth: क्या आप जानते हैं “न-म-शि-वा-य” का असली मतलब? हर श्लोक में छिपा शिव का संदेश जानें अर्थ और पूरा स्तोत्र

Panchakshara Stotram Arth: कभी मंदिर में घंटियों की धुन के बीच, कभी घर के शांत कोने में-“नमः शिवाय” का जप सुनते ही मन अपने-आप ठहर सा जाता है. यही पांच अक्षर, जिन्हें शिवभक्त “पंचाक्षर मंत्र” कहते हैं, भारत की आध्यात्मिक परंपरा का बेहद जीवंत हिस्सा हैं. इस मंत्र की महिमा को शब्दों में पिरोता है पंचाक्षर स्तोत्रम, जिसे परंपरा में आदि शंकराचार्य की रचना माना जाता है. इस स्तोत्र में भगवान शिव के स्वरूप, गुण और तत्वज्ञान को पांच श्लोकों में समेटा गया है-हर श्लोक “नमः शिवाय” के एक अक्षर से जुड़ा है. दिलचस्प बात यह है कि यह स्तोत्र सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन को देखने का एक नजरिया भी देता है-सादगी, करुणा, वैराग्य और आंतरिक शांति की याद दिलाता हुआ.

पंचाक्षर स्तोत्रम क्या है?
पंचाक्षर स्तोत्रम पांच मुख्य श्लोकों का स्तुति-गीत है, जिसमें “न-म-शि-वा-य” इन पांच अक्षरों के जरिए शिव के पांच रूपों और गुणों की वंदना की जाती है. हर श्लोक में शिव के अलग प्रतीक-जैसे भस्म, गंगा, नाग, चंद्र और त्रिनेत्र-का उल्लेख है.

संपूर्ण पंचाक्षर स्तोत्रम (मूल पाठ)
1.
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय.
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥

2.
मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय
नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय.
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय
तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥

3.
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय
दक्षाध्वरनाशकाय.
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय
तस्मै शिकाराय नमः शिवाय॥

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4.
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमुनीन्द्र
देवार्चितशेखराय.
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय
तस्मै वकाराय नमः शिवाय॥

5.
यज्ञस्वरूपाय जटाधराय
पिनाकहस्ताय सनातनाय.
दिव्याय देवाय दिगम्बराय
तस्मै यकाराय नमः शिवाय॥

प्रत्येक श्लोक का सरल अर्थ
1. “न” अक्षर का अर्थ
इस श्लोक में शिव के वैराग्य और सादगी के रूप का वर्णन है-नागों का हार, शरीर पर भस्म, वस्त्रहीन (दिगंबर) और शाश्वत अस्तित्व. संदेश साफ है: बाहरी आडंबर नहीं, भीतर की पवित्रता ही असली पहचान है.

2. “म” अक्षर का अर्थ
यहां शिव के सौम्य और करुणामय रूप को दिखाया गया है-गंगा जल और चंदन से अलंकृत, नंदी और गणों के स्वामी, पुष्पों से पूजित. यह श्लोक बताता है कि शिव भक्तों के बीच सहज और सुलभ देव हैं.

3. “शि” अक्षर का अर्थ
इस श्लोक में शिव के रक्षक रूप की स्तुति है-दक्ष यज्ञ का विनाश करने वाले, नीलकंठ, और वृषभ ध्वजधारी. जीवन में अन्याय और अहंकार के विरुद्ध खड़े होने का संकेत मिलता है.

4. “वा” अक्षर का अर्थ
यहां शिव को ऋषियों और देवताओं द्वारा पूजित, सूर्य-चंद्र-अग्नि जैसे तेजस्वी नेत्रों वाले बताया गया है. अर्थ यह कि शिव ज्ञान, प्रकाश और चेतना के परम स्रोत हैं.

5. “य” अक्षर का अर्थ
अंतिम श्लोक शिव को यज्ञस्वरूप, जटाधारी, पिनाकधारी और सनातन देव के रूप में नमन करता है. संदेश: शिव ही सृष्टि की शुरुआत और अंत दोनों हैं-शाश्वत और सर्वव्यापी.

पंचाक्षर मंत्र का आध्यात्मिक संदेश
“नमः शिवाय” को पंचतत्वों-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश-का प्रतीक माना जाता है. यानी यह मंत्र सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति और चेतना के संतुलन का भाव भी है. जब लोग रोजमर्रा की भागदौड़ में यह मंत्र जपते हैं, तो उन्हें स्थिरता और आत्मविश्वास का अनुभव होता है-मानो भीतर कोई शांत लय चल रही हो.

आज के जीवन में प्रासंगिकता
दिलचस्प है कि हजारों साल पुराना यह स्तोत्र आज भी लोगों के जीवन से जुड़ा है. योग और ध्यान में इसका जप मानसिक तनाव कम करने में सहायक माना जाता है. कई लोग सुबह की शुरुआत इसी मंत्र से करते हैं-एक छोटे से विराम की तरह, जो दिनभर की भागदौड़ से पहले मन को संतुलित कर देता है.

पंचाक्षर स्तोत्रम सिर्फ पांच श्लोकों का भजन नहीं, बल्कि जीवन को देखने का एक सरल दर्शन है-सादगी, संतुलन और आत्मबोध का. हर अक्षर, हर प्रतीक हमें भीतर झांकने का निमंत्रण देता है. शायद यही कारण है कि “नमः शिवाय” सदियों से लोगों के होंठों और दिलों में बसा है.

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