Nagchandreshwar Mandir: साल में सिर्फ एक दिन के लिए खुलता है उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर, जानें क्या है यहां की पौराणिक कथा

Nagchandreshwar Mandir: साल में सिर्फ एक दिन के लिए खुलता है उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर, जानें क्या है यहां की पौराणिक कथा

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Nagchandreshwar Mandir: नागचंद्रेश्वर मंदिर का साल में केवल एक दिन खुलना एक रहस्यमयी और अद्भुत परंपरा है. यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह हमारी प्राचीन संस्कृति और इतिहास का भी प्रतीक ह…और पढ़ें

नागचंद्रेश्वर मंदिर

Nagchandreshwar Mandir: उज्जैन, मध्य प्रदेश का एक प्राचीन शहर अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. यहां स्थित महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. इसी मंदिर के तीसरे खंड पर स्थित है नागचंद्रेश्वर मंदिर जो साल में केवल एक दिन नागपंचमी के अवसर पर ही खुलता है. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं.

नागचंद्रेश्वर मंदिर का इतिहास और मान्यता

माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण परमार राजा भोज ने 1050 ईस्वी के आसपास करवाया था. मंदिर में स्थापित नाग देवता की प्राचीन प्रतिमा अत्यंत ही दुर्लभ और अद्भुत है. इस प्रतिमा में भगवान शिव नाग के आसन पर विराजमान हैं, जो इसे और भी विशेष बनाता है. मान्यता है कि यहां नागराज तक्षक स्वयं निवास करते हैं और नागपंचमी के दिन वे प्रत्यक्ष रूप से यहां उपस्थित होते हैं.

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साल में एक दिन खुलने का रहस्य

नागचंद्रेश्वर मंदिर के साल में केवल एक दिन खुलने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं. एक कथा के अनुसार, सर्पराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया और साथ ही यह भी कहा कि वे नागपंचमी के दिन इस मंदिर में निवास करेंगे. तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि इस दिन नागराज तक्षक के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोले जाते हैं.

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एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार, नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागों की अपार शक्ति का वास है इसलिए आम दिनों में इस मंदिर को बंद रखा जाता है ताकि इस शक्ति का दुरुपयोग न हो. केवल नागपंचमी के दिन ही विशेष पूजा-अर्चना के साथ मंदिर के कपाट खोले जाते हैं ताकि श्रद्धालु नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें.

कालसर्प दोष से मुक्ति

यह भी माना जाता है कि नागपंचमी के दिन नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है. इसलिए इस दिन लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से यहां आते हैं और नाग देवता की पूजा-अर्चना करते हैं.

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