Makar Sankranti Surya Jal: मकर संक्रांति पर सूर्य को जल क्यों चढ़ाया जाता है? जानिए इसकी कहानी और इससे होने वाले फायदे
Makar Sankranti Surya Jal: भारत में त्योहार सिर्फ परंपरा नहीं होते, बल्कि जीवन जीने का तरीका भी सिखाते हैं. मकर संक्रांति ऐसा ही एक पर्व है, जो हर साल जनवरी के महीने में आता है और अपने साथ नई शुरुआत, नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच लेकर आता है. इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग नामों से त्योहार मनाया जाता है, कहीं खिचड़ी बनती है तो कहीं तिल के लड्डू, कहीं पतंग उड़ती है तो कहीं स्नान-दान का खास महत्व होता है. लेकिन इन सबके बीच एक बात हर जगह समान रहती है, वो है सूर्य देव की पूजा और उन्हें जल अर्पित करना. मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर लोग खुले आसमान के नीचे सूर्य को अर्घ्य देते हैं. तांबे के लोटे में जल भरकर, उसमें फूल और अक्षत डालकर सूर्य की ओर जल चढ़ाया जाता है. देखने में यह एक साधारण धार्मिक काम लगता है, लेकिन इसके पीछे गहरा धार्मिक, पौराणिक और मानसिक कारण छिपा हुआ है. यही वजह है कि सदियों से यह परंपरा बिना रुके चली आ रही है. आज के दौर में जब लोग हर बात का तर्क और कारण जानना चाहते हैं, तब यह सवाल भी उठता है कि आखिर मकर संक्रांति पर ही सूर्य पूजा को इतना जरूरी क्यों माना गया है? क्या सिर्फ आस्था की बात है या इसके पीछे जीवन से जुड़ा कोई गहरा संदेश भी है?
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति को हिंदू धर्म में बेहद खास माना गया है. इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसी बदलाव को सूर्य का उत्तरायण होना कहा जाता है. उत्तरायण का समय सकारात्मक ऊर्जा, शुभ शुरुआत और आत्मिक जागरण से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि इस समय किया गया स्नान, दान और पूजा कई गुना फल देता है. धार्मिक दृष्टि से सूर्य को जीवन का आधार माना गया है. धरती पर जो भी जीव हैं, उनका अस्तित्व कहीं न कहीं सूर्य की रोशनी पर टिका हुआ है. मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा करने से व्यक्ति अपने जीवन में रोशनी, स्पष्ट सोच और आत्मविश्वास को अपनाने का संकल्प लेता है. यही वजह है कि इस दिन सूर्य को जल चढ़ाने को बहुत फलदायी माना गया है.
सूर्य देव को जल चढ़ाने की परंपरा क्यों बनी
सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है. सुबह की हल्की धूप शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद मानी जाती है. जब व्यक्ति खुले आसमान के नीचे खड़े होकर सूर्य को देखता है और शांत मन से जल अर्पित करता है, तो मन अपने आप स्थिर होने लगता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जल जीवन का प्रतीक है और सूर्य ऊर्जा का. जब जल को सूर्य की किरणों के सामने अर्पित किया जाता है, तो यह जीवन और ऊर्जा के मेल का संकेत बन जाता है. माना जाता है कि इससे मन की नकारात्मकता कम होती है और भीतर से सुकून महसूस होता है.
मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं में मकर संक्रांति से जुड़ी एक खास कहानी मिलती है. कहा जाता है कि सूर्य देव और उनके पुत्र शनिदेव के रिश्ते हमेशा तनाव भरे रहे. शनिदेव अपनी माता छाया के साथ रहते थे, और सूर्य देव को यह बात पसंद नहीं थी. गुस्से में सूर्य देव ने शनिदेव के निवास स्थान को नुकसान पहुंचाया. बाद में जब सूर्य देव को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने मकर संक्रांति के दिन शनिदेव के घर जाकर संबंध सुधारने की कोशिश की. इसी वजह से माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश खास होता है. यह दिन रिश्तों में सुधार, अहंकार छोड़ने और अपने गुस्से पर काबू पाने का संदेश देता है.
यही कारण है कि मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा करने से पारिवारिक रिश्तों में मिठास आने की मान्यता है.
सूर्य को जल चढ़ाने से क्या फायदे माने जाते हैं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर सूर्य को अर्घ्य देने से कई लाभ होते हैं. माना जाता है कि इससे मानसिक तनाव कम होता है और आत्मबल मजबूत होता है. जो लोग रोजमर्रा की जिंदगी में दबाव महसूस करते हैं, उनके लिए यह एक मानसिक संतुलन बनाने का तरीका बन जाता है. इसके अलावा सूर्य पूजा से स्वास्थ्य में सुधार की भी बात कही जाती है. खासकर आंखों से जुड़ी परेशानी और कमजोरी में राहत की मान्यता जुड़ी हुई है. सूर्य को नियमित रूप से जल देने से व्यक्ति में अनुशासन और समय की अहमियत समझने की आदत भी विकसित होती है.
सूर्य देव को सही तरीके से अर्घ्य कैसे दें
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने का तरीका बहुत सरल है.
-सुबह सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें
-साफ और हल्के रंग के कपड़े पहनें
-तांबे का लोटा लें और उसमें साफ जल भरें
-जल में लाल फूल और अक्षत डालें
-सूर्य की ओर मुख करके धीरे-धीरे जल अर्पित करें
-इस दौरान “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें
पूरी प्रक्रिया के दौरान मन को शांत रखें और किसी तरह की जल्दबाजी न करें.

आज के समय में सूर्य पूजा का संदेश
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा हमें रुककर खुद से जुड़ने का मौका देती है. यह हमें याद दिलाती है कि जीवन में रोशनी तभी आती है, जब हम अहंकार छोड़कर संतुलन अपनाते हैं. सूर्य को जल चढ़ाना सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि खुद को नई शुरुआत के लिए तैयार करने का प्रतीक भी है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


