Makar Sankranti Bhog: काशी से लेकर जगन्नाथ मंदिर तक, मकर संक्रांति पर उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक इस खास भोग की परंपरा
Last Updated:
Makar Sankranti Bhog: मकर संक्रांति के पर्व का हिंदू धर्म में खास महत्व है. इस दिन उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक कई धार्मिक कार्यक्रम किए जाते हैं. कुछ मंदिरों में 84 प्रकार के व्यंजन का भोग लगया जाता है तो कुछ मंदिरों में मौसमी सब्जियों के मिश्रण से बनी सब्जी का भोग लगाया जाता है. आइए जानते हैं मकर संक्रांति पर उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक खास भोग की परंपरा…
मकर संक्रांति का त्योहार भारत के अलग-अलग मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर बहुत ही अनोखे और भव्य तरीके से मनाया जाता है. दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को पोंगल कहा जाता है और चार दिनों तक लगातार अलग-अलग तरीके से इस सूर्य प्रधान उत्सव को मनाया जाता है. इस दौरान कई बड़े मंदिरों में विशेष भोग भी लगाया जाता है. सूर्य देव जब धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. इस दिन गंगा स्नान, तीर्थ स्नान, दान-पुण्य का विशेष फल मिलता है. महाभारत में वर्णन है कि भीष्म पितामह ने उत्तरायण की प्रतीक्षा कर देह त्याग किया, जिससे इस काल की महिमा सिद्ध होती है. आइए जानते हैं उत्तर से लेकर दक्षिण तक के मंदिरों में इस दिन कौन से कार्य किए जाते हैं…

ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में मकर संक्रांति का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन विशेष वेशभूषा से लेकर 84 प्रकार के व्यंजन भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए जाते हैं, जिसे मकर चौरासी भोग कहा जाता है. इसमें चावल, गुड़, केला, नारियल, बड़ी, झिली, गजा, काकेरा, अमलू, फल और ढेर सारी मिठाई शामिल होती हैं. इसके अलावा, अरिसा पीठा का भोग लगता है, जो चावल के आटे और गुड़ से बनाया जाता है. मकर संक्रांति को भगवान जगन्नाथ को चार अलग-अलग समय पर अलग-अलग भोग लगाए जाते हैं.

दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक सबरीमाला में मकर संक्रांति के मौके पर भगवान अयप्पा को विशेष आभूषणों से सजाया जाता है और अरवाणा पायसम और अप्पम का भोग लगाया जाता है. अरवाणा पायसम चावल, घी और गुड़ से बना एक प्रसाद होता है, जो मीठा और गाढ़ा हलवे की तरह होता है, जबकि अप्पम चावल के आटे और गुड़ से बना मीठा व्यंजन होता है, जो भगवान को अतिप्रिय है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

उत्तर प्रदेश के गोरखनाथ मंदिर में विशेष अनुष्ठान के अलावा भोग स्वरूप तिल, गुड़ और चावल-उड़द की दाल की खिचड़ी का भोग लगाया जाता है. मकर संक्रांति पर खिचड़ी का भोग लगाने की परंपरा बहुत पुरानी है और लगभग उत्तर भारत के हर घर में मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाई जाती है और खिचड़ी का दान भी दिया जाता है.

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भी बाबा विश्वनाथ को सब्जियों के साथ बनी खिचड़ी का भोग लगता है, जिसमें मौसमी सब्जियों का मिश्रण होता है. यह उदड़ दाल की खिचड़ी से काफी अलग होती है. इसके अलावा, भगवान शिव को तिल और गुड़ से बनी मिठाइयां भी अर्पित की जाती हैं.

गुजरात के सोमनाथ और द्वारकाधीश मंदिर में भगवान शिव और विष्णु को 56 भोग अर्पित किए जाते हैं. इसके अलावा, ऊंधियू और जलेबी का विशेष भोग लगता है. ऊंधियू एक मिक्स सब्जी है, जिसे बनाने में लगभग 6 से 8 सब्जियां जरूर शामिल होती हैं. मंदिर में सात अनाज वाली खिचड़ी का भी भोग लगता है. इसके अलावा, तिल और मूंगफली की चिक्की, काली तिल के लड्डू और चावल-मूंग की दाल की खिचड़ी का भोग भी लगता है.


