Makar Sankranti 2026 Donation: 14 या 15 जनवरी, जिस दिन भी मनाएं मकर संक्रांति, इन वस्तुओं के दान से चमकेगा भाग्य, बदल जाएगा बुरा वक्त!
मकर संक्रांति पर क्या दान करें?
ज्योतिषाचार्य पाण्डेय के अनुसार, जो लोग मकर संक्रांति के दिन अपनी क्षमता के अनुसार दान करते हैं, उनको पुनर्जन्म के समय दान की गई वस्तु का 100 गुना प्राप्त होता है. मकर संक्रांति के दिन आप अपने लिए और पितरों के लिए भी दान कर सकते हैं. पितरों के लिए किया गया दान आपको पितरों के आशीर्वाद का भागी बना सकता है. इससे आपको पितरों से जुड़े कष्टों से मुक्ति मिल सकती है. मकर संक्रांति पर कुछ वस्तुओं का दान कर सकते हैं, जिसके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है.
मकर संक्रांति पर काले तिल का दान.
काले तिल या तिल के लड्डू: मकर संक्रांति के दिन स्नान के बाद काले तिल या तिल के लड्डू का दान कर सकते हैं. तिल या तिल के लड्डू के दान से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं, वहीं शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है. इससे आपकी कुंडली में शनि के दोषों के कम करने में मदद मिल सकती है. तिल को पापनाशक माना जाता है. इस वजह से इस दिन तिल दान और तिल खाना महत्वपूर्ण है. इस दिन गुड़ वाले तिल के लड्डू का दान करना चाहिए. गुड़ का संबंध सूर्य देव से है. काला तिल और गुड़ दान करते हैं तो सूर्य और शनि दोनों की कृपा से आपके अच्छे दिन आते हैं.

मकर संक्रांति पर चावल, दाल, हल्दी का दान.
खिचड़ी: मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का दान भी किया जाता है. खिचड़ी में चावल, दाल, हल्दी और नमक मुख्य से रूप होते हैं. जब आप दान करें तो खिचड़ी बनाकर नहीं, खिचड़ी बनाने की वस्तुओं को दान करें. गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में चावल, दाल, तिल खिचड़ी के रूप में बाबा गोरखनाथ को चढ़ाते हैं.

मकर संक्रांति पर जौ, गेहूं, तिल, मूंग, चावल, चना और ज्वार या बाजरा का दान.
सप्तधान्य: सप्तधान्य सात प्रकार के अनाज से मिलकर बनता है. इसमें जौ, गेहूं, तिल, मूंग, चावल, चना और ज्वार या बाजरा शामिल होता है. मकर संक्रांति के दिन आप सप्तधान्य का दान कर सकते हैं. इससे नवग्रह शांत करने में मदद मिलती है.

मकर संक्रांति पर अन्न और वस्त्र का दान.
पितरों के लिए दान: मकर संक्रांति पर आप अपने पितरों के लिए भी दान कर सकते हैं. अपने पितरों का स्मरण करके अन्न और वस्त्र का दान करना चाहिए.
नोट: जो लोग 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाएंगे और वे एकादशी व्रत रखते हैं तो वे स्नान बाद चावल का दान करके उसे रख लें और अगले दिन 15 तारीख को किसी पंडित जी को दान कर दें. ध्यान रहे कि 14 जनवरी को घर पर खिचड़ी भी न बनाएं.


