Makar Sankranti 2026: 5 शुभ संयोग में मकर संक्रांति आज, जानें मुहूर्त, स्नान का समय, पूजा विधि, मंत्र, दान से लेकर सबकुछ

Makar Sankranti 2026: 5 शुभ संयोग में मकर संक्रांति आज, जानें मुहूर्त, स्नान का समय, पूजा विधि, मंत्र, दान से लेकर सबकुछ

Makar Sankranti 2026: आज 15 जनवरी गुरुवार को मकर संक्रांति है. आज के दिन 5 शुभ संयोग बने हैं, जिसकी वजह मकर संक्रांति का पावन पर्व और भी पुण्य फलदायी हो गया है. मकर संक्रांति के अवसर पर आप गंगा स्नान कर लेते हैं तो यह आपके पापों को मिटाने वाला और पुण्य प्रदान करने वाला होता है. इस दिन गंगा स्नान का महत्व इस बात से समझ सकते हैं कि मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करना स्वर्ग में स्नान के समान माना गया है. मकर संक्रांति के दिन स्नान के बाद सूर्य देव की पूजा करते हैं, पितरों के लिए तर्पण करते हैं, उसके बाद दान पुण्य करते हैं. फिर दही चूड़ा, तिल के लड्डू, खिचड़ी खाते हैं और पतंग उड़ाते हैं. आइए जानते हैं मकर संक्रांति पर बनने वाले 5 शुभ संयोग, मुहूर्त, स्नान, दान, पूजा विधि और मंत्र के बारे में.

मकर संक्रांति पर बने 5 शुभ संयोग

  1. आज मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी व्रत का पारण और माघ कृष्ण द्वादशी तिथि है. व्रती लोग पारण करके षटतिला एकादशी व्रत को पूरा करेंगे. उनको सूर्य देव के साथ भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होगा.
  2. मकर संक्रांति पर गुरुवार का व्रत भी है. इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. वैसे मकर संक्रांति पर प्रयागराज के संगम में स्नान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है.
  3. मकर संक्रांति के दिन वृद्धि योग है. वृद्धि योग में आप जो भी शुभ कार्य करते हैं, उसके फल में बढ़ोत्तरी होती है. इस दिन वृद्धि योग प्रात:काल से लेकर रात 08:38 पी एम तक है. इस योग में स्नान और दान करने से आपके पुण्य में वृद्धि होगी.
  4. इस बार में मकर संक्रांति ज्येष्ठा नक्षत्र में है, जो पूरे दिन रहेगा. ज्येष्ठा नक्षत्र को एक शुभ नक्षत्र माना जाता है. इसके स्वामी ग्रह बुध और देव इंद्र हैं.
  5. मकर संक्रांति के दिन शुक्रादित्य योग भी बनेगा. मकर राशि में शुक्र और सूर्य की युति होगी, जो शुभ फलदायी होगी.
  • मकर राशि में सूर्य का गोचर: 14 जनवरी, बुधवार, रात 9:20 बजे
  • मकर संक्रांति का पुण्य काल: सूर्योदय से प्रारंभ, दोपहर तक रहेगा
  • मकर संक्रांति का सूर्योदय: 07:15 ए एम पर
  • मकर संक्रांति स्नान मुहूर्त: प्रात: 05:27 बजे से 06: बजकर 21 मिनट तक, इसके बाद भी स्नान और दान कर सकते हैं.
  • शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह में 07:15 बजे से सुबह 08:34 बजे तक

मकर संक्रांति पर स्नान कैसे करें?

मकर संक्रांति के दिन आप गंगा, यमुना, क्षिप्रा, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, सिंधु, ब्रह्मपुत्र आदि जैसे पवित्र नदियों में स्नान कर सकते हैं. प्रयागराज के संगम में मकर संक्रांति स्नान बहुत ही अच्छा होत है. जो लोग नदी स्नान नहीं कर सकते हैं, वे लोग घर पर पानी में गंगाजल और काला तिल मिला लें और उससे स्नान कर लें.

मकर संक्रांति पूजा मंत्र

  • ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
  • ओम सूर्याय नम:
  • ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकरः

मकर संक्रांति पूजा विधि

मकर संक्रांति का स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनें. उसके बाद मकर संक्रांति पूजा सामग्री का प्रबंध कर लें. अब एक लोटे में साफ पानी भर लें और उसमें काला तिल, गुड़, लाल चंदन और लाल रंग का फूल डाल लें. सूर्य देव के मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्घ्य दें.

सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद आसन पर बैठ जाएं. सूर्य चालीसा और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें. उसके बाद गायत्री मंत्र का जाप करें. घी का एक दीपक जला लें या कपूर जलाकर सूर्य देव की आरती करें. पूजा के समापन पर क्षमा प्रार्थना करें. सूर्य देव से धन, धान्य, आरोग्य, करियर में उन्नति आदि का आशीर्वाद लें.

मकर संक्रांति का दान

मकर संक्रांति की पूजा के बाद काला तिल, सप्तधान्य या चावल, गुड़, लाल रंग के कपड़े, कंबल, गरम वस्त्र, खिचड़ी, तिलकुट आदि किसी गरीब ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें. आज तिल का दान करने से सूर्य देव और शनि देव दोनों की कृपा प्राप्त होती है.

भगवान सूर्य की आरती

जय कश्यप-नन्दन, ओम जय अदिति-नन्दन।
त्रिभुवनतिमिरनिकन्दन भक्तहृदय चन्दन।।

सप्तअश्वरथ राजित एक चक्रधारी।
दुःखहारी सुखकारी, मानस मलहारी।।
ओम जय कश्यप-नन्दन

सुरमुनिभूसुरवन्दित विमल विभवशाली।
अघदलदलन दिवाकर दिव्य किरणमाली।।
ओम जय कश्यप-नन्दन

सकलसुकर्मप्रसविता सविता शुभकारी।
विश्वविलोचन मोचन भवबन्धनभारी।।
ओम जय कश्यप-नन्दन

कमलसमूहविनाशक नाशक रूम तापा।
सेवत सहज हरत अति मनसिज सन्तापा।।
ओम जय कश्यप-नन्दन

नेत्र व्याधिहर सुरवर भू-पीड़ाहारी।
वृष्टिविमोचन सन्तत परहित व्रतधारी।।
ओम जय कश्यप-नन्दन

सूर्यदेव करुणाकर अब करुणा कीजै।
हर अज्ञानमोह सब तत्त्वज्ञान दीजै।।

जय कश्यप-नन्दन, ओम जय अदिति-नन्दन।
त्रिभुवनतिमिरनिकन्दन भक्तहृदय चन्दन।।

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