Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर पाना है महादेव का आशीर्वाद? कर लें ये खास पूजा, बनने लगेंगे सारे काम

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर पाना है महादेव का आशीर्वाद? कर लें ये खास पूजा, बनने लगेंगे सारे काम

Maha Shivratri 2026: फाल्गुन की ठंडी हवा में जब भक्ति का संगीत घुलने लगता है और मंदिरों की घंटियां देर रात तक गूंजती हैं, तब समझिए महाशिवरात्रि आ गई है. साल 2026 में 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि साधना, संयम और शिवत्व को भीतर महसूस करने का अवसर है. लोग मानते हैं कि इस रात की गई सच्ची प्रार्थना सीधे महादेव तक पहुंचती है. लेकिन आखिर इस पावन रात्रि का वास्तविक महत्व क्या है? किस पूजा से भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं? भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से समझते हैं महाशिवरात्रि 2026 का आध्यात्मिक और धार्मिक रहस्य.

ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य: आस्था की जीवंत कथा
महानिर्वाणी अखाड़े के महासचिव महंत रविंद्र पुरी महाराज बताते हैं कि जब-जब भक्तों ने सच्चे मन से भगवान शिव का आवाहन किया, तब-तब उन्होंने ज्योति के रूप में लिंग स्वरूप धारण कर दर्शन दिए. यह केवल कथा नहीं, बल्कि भक्ति की शक्ति का प्रतीक है.

राम और अर्जुन की तपस्या
जब भगवान राम को लंका विजय से पहले शक्ति की आवश्यकता हुई, तब उन्होंने रामेश्वरम में बालू का शिवलिंग बनाकर पूजा की. उनकी आराधना से प्रसन्न होकर शिव ने विजय का आशीर्वाद दिया. यही रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के प्राकट्य की कथा मानी जाती है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

इसी तरह महाभारत काल में अर्जुन ने पाशुपतास्त्र प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया. भगवान शिव किरात (भील) के वेश में प्रकट हुए और अर्जुन की परीक्षा ली. मल्लयुद्ध के बाद उन्हें वरदान दिया गया. जहां यह घटना हुई, वह स्थान आज मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजित है.

महाशिवरात्रि पर महादेव को कैसे करें प्रसन्न?
शास्त्रों में शिव को ‘आसान देव’ कहा गया है. वे भव्य अनुष्ठानों से अधिक सच्चे भाव से प्रसन्न होते हैं. एक लोटा गंगाजल, कुछ बेलपत्र और श्रद्धा बस इतना काफी है.

पंडित जी के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात शिव और शक्ति के मिलन की प्रतीक है. यही कारण है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है.

मनोकामना पूर्ति के सरल उपाय
-धन और समृद्धि के लिए शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें.
-सुख-शांति के लिए भांग चढ़ाएं.
-मोक्ष की कामना रखने वाले धतूरा अर्पित करें.
-सामान्य पूजन में जल, कच्चा दूध, शहद और घी से अभिषेक करें.

धार्मिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर किया गया एक अभिषेक वर्ष भर की शिवरात्रियों के बराबर पुण्य देता है.

एक भील की कथा: अनजाने में हुआ पूजन
पौराणिक कथा के अनुसार एक भील शिकार की प्रतीक्षा में पूरी रात बेल के पेड़ पर बैठा रहा. अनजाने में उसके द्वारा गिराए गए बेलपत्र नीचे स्थित शिवलिंग पर गिरते रहे. वह रात्रि महाशिवरात्रि थी. भोलेनाथ ने उसकी अनजानी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे सुख-समृद्धि का वरदान दिया. यह कथा बताती है कि शिव भावना के भूखे हैं, औपचारिकता के नहीं.

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात हमारे भीतर की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करने का समय है. फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ‘शिव चौदस’ भी कहा जाता है. इस रात चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि का मार्ग खोलती है.

रात्रि जागरण केवल परंपरा नहीं, बल्कि चेतना को जागृत रखने का अभ्यास है. जब चारों ओर सन्नाटा होता है, तब साधक अपने भीतर के शिव से जुड़ने की कोशिश करता है. महाशिवरात्रि पर सच्चे मन से एक दीप जलाकर भी “ओम नमः शिवाय” का जाप किया जाए, तो शायद वही सबसे बड़ी पूजा है.

Source link

Previous post

Aaj ka Tula Rashifal: चंद्रमा का राशि परिवर्तन लाएगा नया जोश, दोपहर बाद खुलेंगे सफलता के रास्ते, निवेश में बरतें सावधानी

Next post

Holashtak 2026 : किस दिन से लग रहा होलाष्टक? नोट कर लें तारीख, इस दौरान भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, जानें होली की पौराणिक कथा

You May Have Missed