Janmashtami Vrat: जन्माष्टमी का व्रत गलती से टूट जाए तो क्या होगा? खंडित उपवास का फल मिलेगा या नहीं? जानें उपाय

Janmashtami Vrat: जन्माष्टमी का व्रत गलती से टूट जाए तो क्या होगा? खंडित उपवास का फल मिलेगा या नहीं? जानें उपाय

जन्माष्टमी का व्रत 16 अगस्त दिन शनिवार को है. द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था. उस दिन वृषभ राशि में चंद्रमा और बुधवार दिन था. हर साल जन्माष्टमी के अवसर पर लोग व्रत रखते हैं और मध्य रात्रि में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाते हैं और पारण करके व्रत को पूरा करते हैं. शास्त्रों के अनुसार अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं. जन्माष्टमी के व्रत को नियमपूर्वक करते हैं, इसमें फल, दूध, दही, पानी का उपयोग कर सकते हैं, अन्न खाने की मनाही होती है. लेकिन कोई गलती से अन्न खा ले या गलती से जन्माष्टमी का व्रत बीच में ही टूट जाए तो क्या होगा? इस स्थिति में जन्माष्टमी व्रत का फल उसे मिलेगा या नहीं? आइए जानते हैं कि उपाय क्या है?

जन्माष्टमी व्रत टूट जाए तो क्या करना चाहिए?

हिंदू धर्म में कोई भी व्रत सूर्योदय से सूर्योदय तक मान्य होती है. लेकिन कुछ व्रतों में यह नियम लागू नहीं होता है. जन्माष्टमी व्रत सूर्योदय से सूर्योदय तक रखते हैं. इस बीच में व्रती ने गलती से अन्न खा लिया और व्रत टूट गया तो उसे पश्चाताप होता है, उसे दुख होता है कि उसका उपवास भंग हो गया. जिस मनोकामना की पूर्ति के लिए व्रत रखा था, वह खंडित हो गया.

भगवान श्रीकृष्ण से करें क्षमा प्रार्थना

इस स्थिति में व्रती को भगवान श्रीकृष्ण यानि श्रीहरि विष्णु से क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए. उस समय आप स्वयं को पवित्र करके भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष आसन पर बैठ जाएं. उनसे जन्माष्टमी व्रत खंडित होने के लिए क्षमा प्रार्थना करें.

भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करके इस मंत्र को पढ़ें-

1. मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन। यत्पूजितं मया देवा परिपूर्ण तदस्तु मे॥

2. ॐ श्री विष्णवे नमः क्षमा याचना समर्पयामि॥

3. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप तुलसी की माला से कम से कम 5 या 11 बार करें.

क्षमा प्रार्थना और मंत्र जाप के बाद भगवान श्रीकृष्ण को प्रणाम करें. उनसे निवदेन करें कि हे प्रभु! भूलवश जन्माष्टमी का व्रत खंडित हो गया है, आप मुझ पर दया करें और अपनी कृपा करें. इस गलती के लिए मुझे क्षमा करें.

अब आप चाहें तो जन्माष्टमी व्रत को आगे जारी रखें. रात्रि के समय में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाएं. भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान कराएं. विधि विधान से पूजन करें. तुलसी, माखन, मिश्री, पंजीरी का भोग लगाएं और आरती करें. उसके बाद लोगों को प्रसाद बांट दें. स्वयं प्रसाद के रूप में फल ग्रहण करें.

जन्माष्टमी के अगले दिन सूर्योदय होने पर स्नान आदि से निवृत होकर पूजा पाठ करें. विष्णु मंदिर में जाकर पीले वस्त्र, केला, गुड़, चना, मिश्री, बेसन के लड्डू आदि का दान करें. एक बार फिर जन्माष्टमी व्रत खंडित होने की क्षमा मांग लें. उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें. ईश्वर अपने भक्तों को क्षमा दान देते हैं. वे भक्तों की भावना को देखते हैं. आपने सच्चे मन से क्षमा मांगी और व्रत को पूरा किया तो आपकी मनोकामना पूर्ण हो सकती है.

यह उपाय उन लोगों के लिए है, जिनका जन्माष्टमी व्रत भूलवश या गलती से टूट गया हो. उनका ऐसा करने का कोई उद्देश्य नहीं था.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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