Janmashtami Vrat: जन्माष्टमी का व्रत गलती से टूट जाए तो क्या होगा? खंडित उपवास का फल मिलेगा या नहीं? जानें उपाय
जन्माष्टमी व्रत टूट जाए तो क्या करना चाहिए?
हिंदू धर्म में कोई भी व्रत सूर्योदय से सूर्योदय तक मान्य होती है. लेकिन कुछ व्रतों में यह नियम लागू नहीं होता है. जन्माष्टमी व्रत सूर्योदय से सूर्योदय तक रखते हैं. इस बीच में व्रती ने गलती से अन्न खा लिया और व्रत टूट गया तो उसे पश्चाताप होता है, उसे दुख होता है कि उसका उपवास भंग हो गया. जिस मनोकामना की पूर्ति के लिए व्रत रखा था, वह खंडित हो गया.
भगवान श्रीकृष्ण से करें क्षमा प्रार्थना
भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करके इस मंत्र को पढ़ें-
2. ॐ श्री विष्णवे नमः क्षमा याचना समर्पयामि॥
क्षमा प्रार्थना और मंत्र जाप के बाद भगवान श्रीकृष्ण को प्रणाम करें. उनसे निवदेन करें कि हे प्रभु! भूलवश जन्माष्टमी का व्रत खंडित हो गया है, आप मुझ पर दया करें और अपनी कृपा करें. इस गलती के लिए मुझे क्षमा करें.
जन्माष्टमी के अगले दिन सूर्योदय होने पर स्नान आदि से निवृत होकर पूजा पाठ करें. विष्णु मंदिर में जाकर पीले वस्त्र, केला, गुड़, चना, मिश्री, बेसन के लड्डू आदि का दान करें. एक बार फिर जन्माष्टमी व्रत खंडित होने की क्षमा मांग लें. उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें. ईश्वर अपने भक्तों को क्षमा दान देते हैं. वे भक्तों की भावना को देखते हैं. आपने सच्चे मन से क्षमा मांगी और व्रत को पूरा किया तो आपकी मनोकामना पूर्ण हो सकती है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


