Iran-US War में सारी हदें पार! रामायण-महाभारत युद्ध के क्या थे नियम? कैसे टूटीं मर्यादाएं
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Iran-US War Rules vs Ramayana And Mahabharata: ईरान के साथ चल रहे अमेरिका और इजरायल के युद्ध में सारे नियम टूट गए हैं. ईरान के मिनाब में प्राइमरी स्कूल पर मिसाइल हमले की दुनियाभर में निंदा हुई. पौराणिक काल के रामायण और महाभारत युद्ध के कुछ नियम थे, जिनका पालन करना था. लंका युद्ध में नियमों का पालन हुआ, लेकिन कुरुक्षेत्र युद्ध में सारी मर्यादाएं टू गईं.
ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल युद्ध में सारे नियम टूट गए हैं, रामायण-महाभारत युद्ध के कौन से नियम थे? (Photo: AI)
Iran-US War Rules vs Ramayana And Mahabharata: ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के भीषण युद्ध चल रहा है, जिसमें युद्ध के सारे नियम टूट गए हैं. आज के युद्ध में स्कूल, अस्पतालों के साथ नागरिकों से संबंधित स्थानों को निशाना नहीं बनाते हैं, लेकिन अमेरिकी हमले में ईरान के मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर मिसाइल हमला किया गया, जिसमें 160 से अधिक स्कूली छात्राओं की मौत हो गई. इसके अलावा भी ईरान में काफी जान-माल का नुकसान हुआ है, वहीं इजरायल के साथ खाड़ी के देशों में भी युद्ध की आग पहुंची है. ईरान और अमेरिका-इजरायल के युद्ध से पहले पौराणिक काल में भी भीषण युद्ध लड़े गए, जिसके लिए कुछ नियम होते थे, जिनका पालन दोनों पक्ष करते थे. त्रेतायुग में भगवान राम और लंका के राजा रावण के बीच युद्ध हुआ तो वहीं द्वापर युग में महाभारत का भीषण युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच लड़ा गया, लेकिन कुरुक्षेत्र में सारी मर्यादाएं टूट गई थीं.
राम-रावण युद्ध के नियम
- त्रेतायुग के समय जब भगवान राम और रावण के बीच युद्ध हुआ था, तो उसके कुछ नियम थे. उस धर्म-युद्ध में मर्यादा और क्षत्रिय धर्म का पालन किया गया.
- लंका युद्ध सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक लड़ा जाता था. सूर्यास्त होते ही दोनों पक्षों के सैनिक अपने-अपने शिविर में चले जाते थे, वहां पर वे आराम करते थे और घायलों का इलाज होता था.
- एक योद्धा से एक ही योद्धा के लड़ने का नियम था. रथ सवार योद्धा रथ वाले से ही लड़ेगा, वहीं पैदल सैनिक पैदल सैनिक के साथ युद्ध करेगा. इसके पीछे बराबरी के युद्ध का सिद्धांत था.
- मूर्छित शत्रुओं पर हमला नहीं किया जाता था. मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए या राम-लक्ष्मण नाग पाश में बांध दिए गए तो इंद्रजीत ने उन पर हमला नहीं किया.
- शरण में आए शत्रु को जीवनदान देना. विभीषण जब अपने कुछ सहयोगियों के साथ प्रभु राम की शरण में आए तो उनको अभय दान दिया गया.
- दूत को नहीं मार सकते, उनका सम्मान करना होता था. हनुमान जी और अंगद की घटनाएं इसका उदाहरण हैं. ऐसे ही रावण के गुप्तचर शुक और सारण राम सेना का भेद लेने आए तो विभीषण ने उनको पकड़ लिया. वे उनको दंड देना चाहते थे, लेकिन प्रभु राम ने उनको जीवनदान दे दिया.
- निहत्थे शत्रु पर वार नहीं किया जाता था. शत्रु अगर शस्त्र विहीन है, तो उस पर हमला नहीं किया जाता था. युद्ध के प्रारंभ में ही रावण प्रभु राम से लड़ने आया था, तो भगवान राम ने उसे पस्त कर दिया और वह निहत्था हो गया, तब भगवान राम उसे मार सकते थे, लेकिन उन्होंने मर्यादा का पालन करते हुए उसे जीवनदान दे दिया और कहा कि अभी तुम थक चुके हो, अगले दिन शस्त्र लेकर आना.
- महिलाओं और निर्बलों पर शस्त्र नहीं उठाते थे.
महाभारत युद्ध के नियम
- द्वापर में कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत का युद्ध हुआ. कुरुक्षेत्र के युद्ध से पहले दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से कुछ नियम बनाए थे, जिसका पालन करना अनिवार्य था.
- सूर्योदय के समय शंख बजने के साथ युद्ध शुरू होगा और सूर्यास्त पर शंख बजने के साथ युद्ध का समापन होगा.
- सूर्यास्त के बाद दोनों पक्षों के लोग एक दूसरे के शिविर में जा सकते थे और मिल सकते थे. निहत्थे योद्धा पर प्रहार नहीं किया जाएगा.
- यदि कोई युद्ध भूमि से पीठ दिखाकर भाग रहा है तो उस पर हमला नहीं किया जाएगा. बराबरी का युद्ध करने का नियम था. रथ वाले रथ के योद्धा से, पैदल सैनिक पैदल वाले से ही लड़ेगा.
- एक योद्धा से एक ही योद्धा युद्ध करेगा. एक योद्धा से कई योद्धा का लड़ना अधर्म होगा.
- शरण में आए हुए व्यक्ति को अभयदान देना होगा. उस पर प्रहार नहीं किया जाएगा. सेवकों पर हमला नहीं किया जाएगा.
- युद्ध में घायलों को अपने शिविर में ले जाने की अनुमति थी. उस समय में कोई हमला नहीं करेगा.
- युद्ध के लिए सामने वाले योद्धा को चेतावनी देना जरूरी था. उस पर अचानक से हमला नहीं करना था.
- दिव्यास्त्रों का प्रयोग विशेष परिस्थिति में ही करने की अनुमति थी. साथ ही समान सामर्थ्य के योद्धा के सामने ही दिव्यास्त्रों का प्रयोग करना था.
कुरुक्षेत्र में कैसे टूटीं युद्ध की सारी मर्यादाएं?
कुरुक्षेत्र में जैसे-जैसे महाभारत का युद्ध दिन पर दिन बढ़ने लगा तो उसमें युद्ध की सारी मर्यादाएं टूटने लगीं. चक्रव्यूह के समय कौरव सेना के कई महारथियों ने घेरकर अभिमन्यु का वध किया. वहीं भीष्म पितामह को परास्त करने के लिए पांडवों ने शिखंडी की मदद ली, शिखंडी को आगे करके भीष्म पर बाणों से छलनी कर दिया गया.
वहीं द्रोणाचार्य के वध के समय भी छल किया गया. अश्वत्थामा के वध की गलत सूचना दी गई, जिससे द्रोणाचार्य शोक में टूब गए और शस्त्र त्याग दिए, तभी धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया. ऐसे ही दुर्योधन के वध के समय भीम ने गदा युद्ध के नियम को तोड़ते हुए उसकी जंघा पर प्रहार किया, जिसस वह मारा गया. गदा युद्ध में कमर से नीचे प्रहार नहीं किया जाता था.
द्रोण वध से बौखलाए अश्वत्थामा ने रात्रि के समय शिविर में सो रहे पांडवों के 5 पुत्रों की हत्या कर दी थी, जो युद्ध के नियमों के खिलाफ था.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. डिजि…और पढ़ें


