Holika Dahan 2026: UP में यहां नहीं होता होलिका दहन, शिवजी के झुलस जाते हैं पैर, 5000 साल

Holika Dahan 2026: UP में यहां नहीं होता होलिका दहन, शिवजी के झुलस जाते हैं पैर, 5000 साल

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UP में यहां नहीं होता होलिका दहन, 5000 साल पुरानी परंपरा का महाभारत से संबंध

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Holika Dahan 2026: होली का पर्व आते ही देशभर में एक अनोखा उत्सव देखने को मिलता है. घर घर होली के मौके पर कई परंपराओं का पालन किया जाता है लेकिन यूपी का एक गांव है, जहां होलिका दहन नहीं किया जाता. यहां होली तो मनाई जाती है लेकिन होलिका दहन करना वर्जित है. आइए जानते हैं यूपी के इस गांव के बारे में…

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Holika Dahan 2026: होली आते ही पूरे देश में रंगों और उत्सव की धूम मच जाती है. लोग होलिका दहन के लिए लकड़ियां और उपले जमा करने लगते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में एक गांव ऐसा है, जहां होलिका दहन नहीं किया जाता. पूरे गांव में होली धूमधाम से खेली जाती है, लेकिन होलिका जलाना यहां की परंपरा में शामिल नहीं है. जी हां, आपने सही सुना, यूपी के इस गांव में होलिका दहन तो नहीं किया जाता लेकिन होली धूमधाम से खेली जाती है. दरअसल इस अनोखी परंपरा का संबंध महाभारत काल से जुड़ा है इसलिए यहां होलिका दहन नहीं किया जाता. आइए जानते हैं यूपी के इस गांव में आखिर होलिका दहन क्यों नहीं किया जाता.

अनोखी परंपरा महाभारत काल से जुड़ी
हम बात कर रहे हैं सहारनपुर जिले में स्थित बरसी गांव की. यहां की यह अनोखी परंपरा महाभारत काल से जुड़ी हुई है. गांव में होलिका दहन नहीं किया जाता, इसलिए लोग आस-पड़ोस के गांवों में जाकर होलिका जलाते हैं. इसके बाद लोग अगले दिन होली का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाते हैं. इसका कारण है गांव का प्रसिद्ध पश्चिम मुखी शिव मंदिर.

5000 साल पुराना है यह मंदिर
यह मंदिर बेहद खास है क्योंकि इसमें स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है. कहा जाता है कि लगभग 5000 साल पहले इस मंदिर का निर्माण कौरवों ने करवाया था, लेकिन महाभारत युद्ध के समय पांडव पुत्र भीम ने मंदिर के मुख्य द्वार में अपनी गदा फंसाकर उसे पूर्व से पश्चिम की दिशा में घुमा दिया. इस वजह से यह देश का एकमात्र पश्चिम मुखी शिव मंदिर बन गया. आम तौर पर शिवलिंग पूर्व मुखी होते हैं, लेकिन बरसी का शिवलिंग इस दिशा में होने के कारण बहुत अलग और पवित्र माना जाता है.

इसलिए नहीं किया जाता होलिका दहन
स्थानीय मान्यता है कि अगर इस गांव में होलिका दहन किया जाएगा, तो होलिका की आग से भगवान शिव के पांव झुलस सकते हैं. इसी विश्वास के कारण पिछले 5000 साल से यहां होलिका दहन नहीं किया जाता. यह परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण है.

भगवान कृष्ण आए थे यहां
बरसी का नाम भी इसी पवित्रता और भगवान कृष्ण के स्वागत से जुड़ा है. कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के समय भगवान कृष्ण जब यहां आए, तो उन्होंने इस गांव को बहुत पसंद किया और इसे बृजधाम की तरह पवित्र माना, तभी से इसे बरसी कहा जाने लगा. बरसी गांव में होली के दिन पूरे गांव में धुलंडी की धूम मचती है. लोग खूब रंग खेलते हैं और एक-दूसरे को गुझिया और मिठाई खिलाते हैं.

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Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



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