Holi Date and Muhurat: धुलंडी के दिन सूतक बिगाड़ेगा रंगों का मजा! भद्रा और चंद्र ग्रहण के बीच कैसे होगा होलिका दहन?
धुलंडी के दिन सूतक बिगाड़ेगा रंगों का मजा! भद्रा और चंद्र ग्रहण के बीच कैसे ..
Holi 2026 Date and Muhurat: इस वर्ष होली के पावन पर्व पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का एक अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस खगोलीय और ज्योतिषीय स्थिति के कारण लोगों के बीच त्यौहार की सही तिथि और मुहूर्त को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक और विख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने इस दुविधा को दूर करते हुए बताया कि होली का पर्व 2 और 3 मार्च को मनाया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि सोमवार 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, जबकि अगले दिन मंगलवार 3 मार्च को धुलंडी यानी रंगों का त्यौहार मनाया जाएगा. ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर होलिका पूजन का विशेष महत्व होता है. शास्त्रसम्मत नियमों के अनुसार होलिका दहन भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को करना ही श्रेष्ठ माना गया है. 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 5:56 बजे से प्रारंभ होगी. इसी समय से भद्रा काल भी शुरू हो जाएगा जो अगले दिन सुबह 5:32 बजे तक रहेगा. डॉ. व्यास ने बताया कि इस बार प्रदोष काल में होलिका दहन के लिए केवल 12 मिनट का समय उपलब्ध रहेगा. शाम 6:24 बजे से शाम 6:36 बजे के बीच का समय दहन के लिए सर्वश्रेष्ठ है. इसके अलावा परंपरा के अनुसार मध्यरात्रि 01:23 बजे से 02:34 बजे के बीच भद्रा पुच्छ के दौरान भी होलिका दहन किया जा सकता है. इस वर्ष रंगों का त्यौहार धुलंडी 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण के साये में मनाया जाएगा. डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:48 बजे समाप्त होगा. भारत में दिखाई देने के कारण इसका धार्मिक महत्व होगा और इसका सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले यानी मंगलवार सुबह 6:20 बजे से ही लागू हो जाएगा. सूतक काल के दौरान मंदिरों के दर्शन और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं. हालांकि जयपुर में चंद्रोदय के समय ग्रहण केवल 18 मिनट के लिए ही दृश्यमान होगा, इसलिए धुलंडी के उत्सव पर इसका कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा.


