Holi 2026: धुलंडी पर चंद्र ग्रहण का साया, जानें सूतक काल और मंदिर बंद होने का समय, ये 4 राशि वाले जातक बरतें सावधानी!
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Chandra Grahan on Holi 3 March 2026 Timing & Sutak: 3 मार्च को धुलंडी के दिन साल का पहला खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा. शाम 5:59 से शुरू होने वाले इस ग्रहण के कारण सुबह 9 बजे से ही सूतक लग जाएगा और मंदिरों के पट बंद रहेंगे. मेष, कर्क, तुला और मकर राशि वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
भीलवाड़ा. इस वर्ष रंगों का महापर्व होली और धुलंडी एक विशेष खगोलीय संयोग के बीच मनाई जाएगी. 3 मार्च 2026 को जब पूरा शहर धुलंडी के रंगों में सराबोर होगा, उसी दिन वर्ष का पहला खंडग्रास चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है. रंग, उमंग और आस्था का यह अनोखा मेल शहरवासियों के लिए उत्सुकता का विषय बना हुआ है. एक ओर लोग गुलाल और अबीर के साथ खुशियां मनाने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रहण के कारण धार्मिक नियमों और परंपराओं को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं.
खगोलीय जानकारी के अनुसार, चंद्र ग्रहण 3 मार्च को शाम 5 बजकर 59 मिनट पर प्रारंभ होगा और 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. हालांकि ग्रहण की अवधि लगभग 48 मिनट की ही होगी, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसका अत्यधिक महत्व माना जा रहा है. यह ग्रहण भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, रूस और पाकिस्तान सहित कई देशों में दिखाई देगा. भारत में दृश्यता होने के कारण इसका धार्मिक प्रभाव और सूतक पूरी तरह मान्य रहेगा.
राशियों पर प्रभाव और ज्योतिषीय गणना
भीलवाड़ा नगर व्यास और ज्योतिषाचार्य पंडित कमलेश व्यास के अनुसार, यह ग्रहण विशेष रूप से मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है. इन राशियों के लोगों को मानसिक तनाव, कार्यों में बाधा और आर्थिक उलझन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. पंडित व्यास ने सलाह दी है कि ग्रहण काल में संयम रखें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. वहीं, गर्भवती महिलाओं को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने और घर के भीतर रहने की सलाह दी गई है.
9 घंटे पहले बंद होंगे मंदिरों के पट
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाता है. ग्रहण शाम को लगने के कारण सुबह लगभग 9 बजे से ही सूतक प्रभावी हो जाएगा. इसी कारण भीलवाड़ा के प्रमुख मंदिरों के कपाट सुबह 9 बजे ही बंद कर दिए जाएंगे. सूतक काल के दौरान मूर्ति स्पर्श, पूजा-अर्चना और भोजन करना वर्जित माना जाता है. ग्रहण की समाप्ति के बाद मंदिरों में विधिवत शुद्धिकरण और धुलाई की जाएगी, जिसके बाद ही शाम की आरती और दर्शन पुनः शुरू हो सकेंगे.
सावधानी के साथ मनाएं होली
धुलंडी के दिन शाम के समय ग्रहण लगने से रंगोत्सव के कार्यक्रमों में कुछ बदलाव संभव है. ज्योतिषाचार्यों ने अपील की है कि होली के उत्साह के बीच धार्मिक परंपराओं का सम्मान करें. ग्रहण काल के दौरान अनावश्यक विवादों से दूर रहना और मानसिक शांति बनाए रखना श्रेष्ठ रहेगा. प्रशासन और मंदिर समितियों ने भी लोगों से संयमित तरीके से होली मनाने और ग्रहण के नियमों का पालन करने का आग्रह किया है.
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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें


