Ganesh Visarjan के दौरान इन 2 मंत्रों का करें जप और आरती, तभी पूरा होता है पूजन, सालों साल रहेगी बप्पा की कृपा
Ganesh Visarjan 2025 Mantra: आज अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा के विसर्जन के साथ ही गणेशोत्सव 2025 का समापन हो जाता है. बप्पा की विदाई ठीक उसी तरह की जाती है, जिस तरह कोई सदस्य घर से दूर जा रहा है. साथ ही विसर्जन के दौरान कुछ मंत्रों का जप भी किया जाता है, ताकि गणेश पूजन पूरा हो सके. गणेशजी का विसर्जन इन्ही दो मंत्रों के साथ पूरा किया जाता है. गणेशजी के ये मंत्र उनके नाम की तरह बेहद शक्तिशाली और चमत्कारी हैं और हर विघ्न व बाधा को दूर करने में सक्षम भी हैं. शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि जब तक गणेश जी का नाम और मंत्र जप होता रहेगा, तब तक उनकी कृपा बनी रहेगी. आइए जानते हैं गणेशजी के मंत्र और आरती के बारे में…
गणपति विसर्जन मंत्र का महत्व
गणपति जी को विघ्नहर्ता कहा गया है औक मंत्र जप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस कार्य के आरंभ और अंत में गणपति का स्मरण हो, वह कार्य सफल होता है. विसर्जन केवल प्रतिमा को जल में प्रवाहित करना नहीं, बल्कि अपनी कामनाओं, दुखों और दोषों का त्याग भी है. मंत्र जप के साथ विसर्जन करने से बप्पा का आशीर्वाद घर में स्थायी रहता है. अगले वर्ष पुनः बप्पा के आगमन का शुभ संकल्प साकार होता है. परिवार में एकता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और घर के वातावरण में सात्विकता और शांति बढ़ती है.
गणपति जी को विघ्नहर्ता कहा गया है औक मंत्र जप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस कार्य के आरंभ और अंत में गणपति का स्मरण हो, वह कार्य सफल होता है. विसर्जन केवल प्रतिमा को जल में प्रवाहित करना नहीं, बल्कि अपनी कामनाओं, दुखों और दोषों का त्याग भी है. मंत्र जप के साथ विसर्जन करने से बप्पा का आशीर्वाद घर में स्थायी रहता है. अगले वर्ष पुनः बप्पा के आगमन का शुभ संकल्प साकार होता है. परिवार में एकता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और घर के वातावरण में सात्विकता और शांति बढ़ती है.

विसर्जन के दौरान मंत्र जप
ॐ यान्तु देवगणा: सर्वे पूजामादाय मामकीम्।
इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनर्अपि पुनरागमनाय च॥
ॐ यान्तु देवगणा: सर्वे पूजामादाय मामकीम्।
इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनर्अपि पुनरागमनाय च॥
गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थाने परमेश्वर।
मम पूजा गृहीत्मेवां पुनरागमनाय च॥

गणेशजी की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय


