Dhanteras 2025: यहां शिव परिवार के साथ विराजते हैं कुबेर देव, धनतेरस पर इतने बजे होती है तंत्र पूजा, आज तक नहीं लगा ताला

Dhanteras 2025: यहां शिव परिवार के साथ विराजते हैं कुबेर देव, धनतेरस पर इतने बजे होती है तंत्र पूजा, आज तक नहीं लगा ताला

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Dhanteras 2025: दिवाली का पर्व आने वाला है, ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां धन के देवता कुबेर शिव परिवार के साथ दर्शन देते हैं. इनके दर्शन करने मात्र से ही सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं. यह मंदिर आर्थिक परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए वरदान है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…

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भारत में 33 कोटि देवी-देवताओं को पूजा जाता है और हर त्योहार एक अलग देवी-देवता को समर्पित होता है. धनतेरस और दीवाली के त्योहार पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है, क्योंकि दोनों को ही धन की देवी-देवता माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश की धरती पर विराजमान भगवान कुबेर अनोखे रूप में भक्तों के दर्शन देते हैं और हर मनोकामना को पूरा करते हैं? यह मंदिर आर्थिक परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए वरदान है. दिवाली के दिन इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से हर समस्या दूर होती है और कुबेर देव का आशीर्वाद भी मिलता है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…

दिवाली पर होती है विशेष पूजा
मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में खिचलीपुरा में भगवान कुबेर का चमत्कारी मंदिर है. माना जाता है कि अगर कोई आर्थिक परेशानी से जूझ रहा है तो भगवान कुबेर और शिव परिवार मिलकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. कहा जाता है कि इस मंदिर में शिव परिवार के साथ भगवान कुबेर गुप्त काल से विराजमान हैं और भक्तों की हर मुराद को पूरा करते हैं. दीवाली के मौके पर मंदिर को खास तौर पर सजाया जाता है और दूर-दूर से भक्त अपनी मुराद लेकर भगवान कुबेर की पूजा करने आते हैं. इस मंदिर की खास बात ये है कि मंदिर में बने गर्भगृह पर कभी ताला नहीं लगाया जाता है. सालों साल मंदिर भक्तों के लिए खुला रहता है.

7वीं शताब्दी की है प्रतिमा
कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण मराठों के शासनकाल में हुआ था और मंदिर में मौजूद प्रतिमा लगभग 7वीं शताब्दी में स्थापित की गई थी, लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि मंदिर को खिलजी के शासनकाल में बनाया गया था, जिसकी वजह से गांव का नाम खिलचीपुरा पड़ा. भगवान शिव और कुबेर भगवान का मंदिर ज्यादा बड़ा नहीं है और मंदिर पर किसी तरह की नक्काशी भी नहीं है. कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना बिना मंदिर की नींव रखे हुई है, जिसकी वजह से मंदिर का निर्माण आगे नहीं हो पाया.

भगवान कुबेर की है चतुर्भुजी प्रतिमा
बता दें कि उत्तराखंड में भगवान केदारनाथ मंदिर में भगवान शिव के साथ कुबेर भगवान विराजमान हैं और दूसरा मंदिर खिलचीपुरा में बना ये मंदिर है, जहां कुबेर भगवान शिव परिवार के साथ दर्शन देते हैं. इस वजह से भी इस मंदिर को केदारनाथ की तरह पूजनीय माना गया है. साथ ही इस मंदिर में स्थापित प्रतिमाएं भी बहुत खास हैं. भगवान कुबेर की प्रतिमा चतुर्भुजी प्रतिमा है, जिनके हाथ में धन की पोटली, प्याला और अस्त्र-शस्त्र हैं. कुबेर की प्रतिमा नेवले पर सवार है.

धनतेरस पर तंत्र पूजा
धनतेरस के दिन सुबह 4 बजे तक तंत्र पूजा होती है, इसके बाद ही भक्तों को दर्शन करने का मौका मिलता है. लोगों की मान्यता है कि तंत्र से छुटकारा पाने में ही भगवान कुबेर सहायक होते हैं. गर्भगृह में भगवान शिव की प्रतिमा भी मौजूद है, जिस पर भक्त जल अर्पित करते हैं, लेकिन ये जल जलकुंडी से बाहर नहीं निकलता. भक्तों का मानना है कि यहां चढ़ाया जल सीधा भगवान शिव और भगवान कुबेर तक पहुंचता है.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें

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यहां शिव परिवार के साथ विराजते हैं कुबेर देव, धनतेरस पर होती है तंत्र पूजा

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