Chanakya Niti: बिना एक भी सवाल पूछे लोगों की नीयत पहचानने के 5 तरीके, जानना चाहेंगे कैसे

Chanakya Niti: बिना एक भी सवाल पूछे लोगों की नीयत पहचानने के 5 तरीके, जानना चाहेंगे कैसे

होमफोटोधर्म

बिना एक भी सवाल पूछे लोगों की नीयत पहचानने के 5 तरीके, जानना चाहेंगे कैसे

Last Updated:

Chanakya Niti: आजकल लोगों की सही नीयत को पहचानना बेहद मुश्किल काम है. लोग कहते कुछ हैं और करते कुछ और ही हैं. आचार्य चाणक्य ने लोगों की असली नीयत को जानने के लिए एक नीति बनाई है, आप इन नीतियों के माध्यम से बिना किसी से बातचीत किए लोगों के मन में क्या चल रहा है, जान सकते हैं. आइए जानते हैं बिना एक भी सवाल पूछे लोगों की नीयत पहचानने के 5 तरीके…

Chanakya Niti: आज के दौर में लोगों की कथनी और करनी में साफ नजर आता है और यह मामला कॉरपोरेट वर्ल्ड में ज्यादा नजर आता है. लोग बोलते कुछ और हैं और करते हैं, जिसकी वजह से कई बार समझ में नहीं आता, किस पर विश्वास किया जाए और किस पर नहीं. पहले राज दरबारों में भी कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ बोल रहा है, यह जानना बहुत मुश्किल होता था इसलिए चाणक्य ने बिना बातचीत किए लोगों को पढ़ना सीखा. चाणक्य ने इसे लेकर एक नीति भी बनाई और उस नीति के माध्यम से बताया कि इंसान अपनी नीयत को हमेशा अपने व्यवहार, चुप्पी और दोहराव से जाहिर करता है. जब आप इन संकेतों को पहचानना सीख जाते हैं तो आप शक करने वाले नहीं बल्कि समझदार बन जाते हैं. आइए इसी नीति के माध्यम से जानते हैं आखिर लोगों से बातचीत किए भी कैसे उनकी नीयत के बारे में पहचानें.

चाणक्य ने उन पलों को बहुत अहमियत दी, जब किसी का स्वार्थ नहीं होता. जब ना कोई इनाम, ना पहचान, ना कोई रणनीतिक लाभ हो, तब लोग दिखावा करना छोड़ देते हैं. ऐसे समय में किसी का व्यवहार बताता है कि उनकी अच्छाई, वफादारी या नैतिकता असली है या सिर्फ लेन-देन के लिए. जब कोई देख नहीं रहा, जो बिना निगरानी के जिम्मेदारी निभाता है और जो नुकसान उठाकर भी ईमानदारी से पेश आता है, वह अपने कर्मों से अपनी नीयत दिखाता है. चाणक्य मानते थे कि यही सबसे शुद्ध सच है क्योंकि इसमें कोई स्वार्थ नहीं होता. अगर किसी की अच्छाई सिर्फ तब दिखती है जब उसे कुछ हासिल करना हो तो वही उसकी असली नीयत है.

आचार्य चाणक्य ने टालमटोल को कमजोरी नहीं बल्कि जानकारी माना. लोग चाहे कितनी भी आत्मविश्वास से बोलें, बड़े-बड़े वादे करें या लंबी-लंबी बातें करें लेकिन जो वे बार-बार टालते हैं, वही उनकी असली कहानी बताता है. जिम्मेदारी, स्पष्टता, वचनबद्धता या मुश्किल बातचीत से बचना अक्सर अंदरूनी विरोध या छुपी हुई मंशा का संकेत होता है. चाणक्य समझते थे कि इंसान स्वाभाविक रूप से उन हालातों से दूर भागता है, जो उसकी योजना के खिलाफ हों. अगर कोई बार-बार जिम्मेदारी से बचता है, फैसले टालता है या पारदर्शिता से इनकार करता है तो यह आमतौर पर भ्रम नहीं बल्कि नीयत होती है. समझदार लोग इन पैटर्न्स को नजरअंदाज नहीं करते बल्कि उन्हें समझते हैं.

Add News18 as
Preferred Source on Google

दबाव वही दिखाता है, जो शिष्टाचार छुपा लेता है. आचार्य चाणक्य मानते थे कि तनाव लोगों को बदलता नहीं, बल्कि उनका असली चेहरा दिखा देता है. जब नतीजे अनिश्चित हों, भावनाएं तेज हों या नियंत्रण चुनौती में हो तो लोग अपनी असली प्रवृत्ति पर लौट आते हैं. संकट के समय देखें कि कोई ईमानदार बनता है या चालाक, शांत रहता है या आक्रामक, जिम्मेदार बनता है या बचने की कोशिश करता है. ये प्रतिक्रियाएं अचानक नहीं होतीं बल्कि गहराई से जमी आदतें होती हैं. चाणक्य ने शासकों को सलाह दी थी कि नुकसान या आपात स्थिति में लोगों का व्यवहार देखें क्योंकि दिखावटी अच्छाई दबाव में टूट जाती है, जबकि असली नीयत बिना कोशिश के सामने आ जाती है.

आचार्य चाणक्य ने सिखाया कि असली वफादारी कभी जोर-जबरदस्ती से नहीं दिखाई जाती. लोग सार्वजनिक रूप से किसकी तारीफ करते हैं, यह देखने के बजाय, वे निजी तौर पर किसका सम्मान करते हैं, यह देखना चाहिए. कौन उनके फैसलों को प्रभावित करता है? किसकी राय वे कभी नजरअंदाज नहीं करते? किसकी सीमाओं का वे स्वाभाविक रूप से सम्मान करते हैं? सम्मान अक्सर मन में बनी हुई श्रेणी को दिखाता है. कोई व्यक्ति बहुतों की खुशामद कर सकता है, लेकिन झुकता सिर्फ कुछ के आगे है. चाणक्य मानते थे कि इस चुपचाप बनी श्रेणी को समझना वफादारी, डर, महत्वाकांक्षा और मेल-मिलाप को समझने में मदद करता है. लोगों की नीयत इस बात से बनती है कि वे किसकी मंजूरी चाहते हैं, चाहे वे इसे कभी कबूल ना करें.

आचार्य चाणक्य ने अंत में एक चेतावनी भी दी कि लोगों को कभी एक बार के काम से ना आंकें. कोई एक बार समझदारी से पेश आ सकता है. असली नीयत समय के साथ लगातार व्यवहार में दिखती है. बार-बार का व्यवहार एक पैटर्न बनाता है और पैटर्न कभी झूठ नहीं बोलते. अगर किसी ने काम करने का वादा किया है लेकिन वह बार बार उस काम को टाल रहा है तो यही उसकी सच्चाई है. अगर आपको सामने वाले व्यक्ति के इरादे नेक लगते हैं, लेकिन व्यवहार बार-बार उनका खंडन करता है तो जो दोहराता है, उसी को सच मानें. चाणक्य मानते थे कि असली समझदारी धैर्य में है, इतना इंतजार करने की ताकत कि सच खुद-ब-खुद सामने आ जाए.

Source link

You May Have Missed