Chaitra Navratri 2026: चामुंडा देवी सिर, माता शैलजा आंख, कौन सी देवी किस अंग की करती हैं र

Chaitra Navratri 2026: चामुंडा देवी सिर, माता शैलजा आंख, कौन सी देवी किस अंग की करती हैं र

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कौन सी देवी किस अंग की करती हैं रक्षा, जानें दुर्गा सप्तशती के कवच का महात्म्य

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुके हैं. इन नौ दिनों में भक्तगण व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की आराधना करते हैं. माना जाता है कि इस दौरान सच्चे मन से की गई पूजा और भक्ति से मां दुर्गा सभी कष्टों को दूर करती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि माता रानी अपनी हर शक्ति के साथ हर अंग पर विराजमान रहती हैं. आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के कवच का महात्म्य…

Chaitra Navratri 2026: सनातन धर्म में भगवती की आराधना को समर्पित चैत्र नवरात्रि का पर्व विशेष महत्व रखता है. नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जिनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं. मान्यता है कि इन नौ दिनों में शक्ति की आराधना से भक्ति, शक्ति और आस्था के साथ आरोग्य का वरदान माता देती हैं. साथ ही, हर प्रकार के भय, चिंता, कष्ट से भी मुक्त करती हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि हमारे शरीर के हर अंग पर मां आदि शक्ति की एक शक्ति विराजमान रहती हैं और उनकी रक्षा करती हैं. आइए जानते हैं कौन सी देवी किस अंग की रक्षा करती हैं और चैत्र नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के कवच का महात्म्य भी जानें…

नवरात्रि में कई भक्त पूरे नौ दिन व्रत रखकर माता दुर्गा की आराधना, पूजा-पाठ करते हैं. इस दौरान दुर्गा कवच (देवी कवच) का पाठ बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह मार्कंडेय पुराण में वर्णित दुर्गा सप्तशती का एक शक्तिशाली हिस्सा है, जिसे ब्रह्माजी ने ऋषि मार्कंडेय को बताया था. दुर्गा कवच मां दुर्गा के नौ रूपों द्वारा साधक के पूरे शरीर की रक्षा करता है.

यह स्तोत्र ना केवल शारीरिक रक्षा करता है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है. धर्म शास्त्रों में वर्णित है कि दुर्गा सप्तशती के नित्य पाठ करने से भय, नकारात्मकता की समस्या, शत्रु, रोग से मुक्ति मिलती है. यह आरोग्य, समृद्धि, मनोकामना पूर्ति, सुख-शांति और मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है.

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दुर्गा सप्तशती के कवच में उल्लेखित है कि दुर्गा के विभिन्न रूप भक्तों के अलग-अलग अंगों की रक्षा करते हैं. यह कवच साधक को हर प्रकार के भय से मुक्त रखता है और सभी रोगों का नाश करता है. सच्चे मन से पाठ करने वाले को हर संकट से सुरक्षा मिलती है. नवरात्रि में सुबह या शाम इस कवच का पाठ करने से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

दुर्गा सप्तशती के कवच में उल्लेखित है कि चामुंडा देवी सिर की रक्षा, माता शैलजा आंखों की विशालाक्षी कानों की रक्षा करती हैं. माहेश्वरी माता नाक, महाकाली मुंह की महा सरस्वती जीभ की और वाराही देवी गर्दन की रक्षा करती हैं. माता अंबिका हृदय की रक्षा करती हैं और माता कौमारी भुजाओं की रक्षा करती हैं.

दुर्गा सप्तशती के कवच में बताया है कि माता चंडिका हाथों की रक्षा, नारायणी उदर (पेट) की रक्षा करती हैं और माता माहेश्वरी कमर की रक्षा करती हैं. देवी महालक्ष्मी जांघों की रक्षा, देवी भैरवी घुटनों की रक्षा, महाकाली पिंडलियों (जांघों के पीछे) की रक्षा तो ब्रह्मांड की देवी (दुर्गा) पैरों और पूरे शरीर की रक्षा करती हैं.

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