Binsar Mahadev Temple History: यहां बिना बुलावे के नहीं पहुंच सकता कोई, देवदार के जंगलों क

Binsar Mahadev Temple History: यहां बिना बुलावे के नहीं पहुंच सकता कोई, देवदार के जंगलों क

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यहां बिना बुलावे के नहीं पहुंच सकता कोई, देवदार के जंगलों के बीच बसे महादेव

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Binsar Mahadev Temple History: देवों के देव महादेव के पूरे विश्व में कई मंदिर और ज्योतिर्लिंग मौजूद हैं. आज हम आपको देवभूमि में स्थित महादेव के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर कोई बिना बुलावे के नहीं पहुंच सकता. जब तक महादेव के मर्जी नहीं होगी, तब तक कोई मंदिर के द्वार पर नहीं पहुंच सकता. यहां भगवान शिव की शिवलिंग स्वयंभू है और यहां हर भक्त की इच्छा पूरी होती है.

Binsar Mahadev Temple History: देवभूमि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीन मंदिरों के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. यहां पहाड़ों, नदियों और घने जंगलों के बीच ऐसे कई मंदिर बसे हुए हैं, जिनसे जुड़ी आस्था और मान्यताएं लोगों को अपनी ओर खींच लेती हैं. इन्हीं में से एक है अल्मोड़ा के पास स्थित बिनसर महादेव मंदिर, जो देवदार के घने जंगलों के बीच बसा हुआ एक बेहद पवित्र और रहस्यमयी धाम माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बिनसर महादेव मंदिर में दर्शन करने मात्र से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं बिनसर महादेव मंदिर के बारे में खास बातें…

प्रकृति की गोद में छिपा हुआ दिव्य स्थल – रानीखेत से करीब 22 किलोमीटर दूर और बिनसर क्षेत्र के सघन वनों के बीच स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. यहां पहुंचते ही ऐसा लगता है जैसे प्रकृति की गोद में कोई दिव्य स्थल छिपा हुआ है. मंदिर के आसपास फैले देवदार के ऊंचे-ऊंचे पेड़ और पक्षियों की मधुर आवाज श्रद्धालुओं को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव कराते हैं.

बिनसर महादेव मंदिर का इतिहास – बिनसर महादेव मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना माना जाता है. कहा जाता है कि यह मंदिर 14वीं शताब्दी का है और यहां भगवान शिव स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं. स्थानीय लोगों के बीच एक खास मान्यता भी प्रचलित है कि इस मंदिर तक हर कोई नहीं पहुंच पाता. कहा जाता है कि जिस भक्त को भगवान शिव का बुलावा होता है, वही यहां तक पहुंच पाता है.

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बिनसर महादेव मंदिर की मान्यता – एक और मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में यहां के एक राजा इस स्थान पर तपस्या कर रहे थे. उसी दौरान भगवान भोलेनाथ हिमालय से यहां आए और इस स्थान पर प्रकट हुए. इसके बाद यह स्थान भगवान शिव की कृपा से पवित्र हो गया. इसलिए इस स्थान को भी शिवभक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है.

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हर इच्छा होती है पूरी – हर साल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं. खासकर सावन और महाशिवरात्रि के समय यहां भक्तों की भीड़ देखने लायक होती है. मान्यता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन और श्रद्धा के साथ आता है, भगवान शिव उसकी हर इच्छा पूरी करते हैं.

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