Bina mangi Salah Ka Asar: पढ़ाई से लेकर शादी तक, हर काम खुद बिगाड़ रहे आप, आज ही बदल दें ये 1 आदत! फिर देखें कमाल
Unsolicited Advice Habit: हमारे देश में एक आदत बहुत आम है. लोग सामने वाले से पूछे बिना ही उसे सलाह देने लगते हैं. किसी ने अपनी परेशानी बताई नहीं, फिर भी राय देने का सिलसिला शुरू हो जाता है. घर हो, ऑफिस हो या फिर सोशल मीडिया, हर जगह लोग खुद को एक्सपर्ट मानकर बोलने लगते हैं. कई बार यह आदत सामने वाले को चुभ जाती है, लेकिन सलाह देने वाला इसे अपना फर्ज समझता है. ज्योतिष में इस आदत को सिर्फ व्यवहार से नहीं, बल्कि ग्रहों की स्थिति से भी जोड़ा गया है. खास तौर पर देव गुरु बृहस्पति का नाम इसमें सामने आता है. कहा जाता है कि जब कुंडली में बृहस्पति कमजोर होता है, नीच राशि में होता है या राहु के असर में आ जाता है, तब इंसान बिना मांगे सलाह देने लगता है. ऐसे लोग खुद नहीं समझ पाते कि कब बोलना है और कब चुप रहना बेहतर है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
बिना मांगे सलाह देना क्यों बन जाती है आदत
अक्सर लोग सोचते हैं कि वे सामने वाले की मदद कर रहे हैं. उन्हें लगता है कि उनका अनुभव ज्यादा है, इसलिए बोलना जरूरी है, लेकिन कई बार यह मदद नहीं, बल्कि दखल बन जाती है. सामने वाला न तो राय चाहता है और न ही रास्ता पूछ रहा होता है. ऐसे लोग हर बातचीत में खुद को सही साबित करने की कोशिश करते हैं. उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने कुछ नहीं कहा तो बात अधूरी रह जाएगी. यही सोच धीरे-धीरे आदत बन जाती है.
ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह का रोल
बृहस्पति को ज्ञान, समझ, संयम और सही समय पर सही बात कहने का ग्रह माना जाता है. जब बृहस्पति मजबूत होता है, तब इंसान बोलने से पहले सोचता है. उसे पता होता है कि कहां बोलना है और कहां चुप रहना ज्यादा सही है, लेकिन जब बृहस्पति कमजोर हो जाए, नीच राशि में बैठा हो या राहु के साथ हो, तब इंसान की समझ डगमगा जाती है. वह बिना मांगे सलाह देने लगता है. ऐसे लोग ज्ञान दिखाने की कोशिश में खुद की इमेज खराब कर लेते हैं.
बिना मांगे सलाह देने वाले लोगों की पहचान
ऐसे लोग हर बात में अपनी राय जरूर जोड़ते हैं. कोई अपना दुख शेयर कर रहा हो, तो वे तुरंत समाधान बताने लगते हैं. सामने वाला बस सुनना चाहता है, लेकिन उन्हें लगता है कि बोलना जरूरी है. ये लोग अकसर कहते हैं, “मैं तो तुम्हारे भले के लिए बोल रहा हूं,” लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि हर किसी को सलाह नहीं, सिर्फ समझ चाहिए होती है.
बृहस्पति कमजोर होने से जीवन पर असर
जब बृहस्पति कमजोर होता है, तो सिर्फ बोलचाल ही नहीं, जीवन के कई हिस्सों पर असर दिखता है. ऐसे लोगों को सम्मान कम मिलता है. लोग उनकी बात सुनना पसंद नहीं करते. धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी आने लगती है. ऑफिस में भी ऐसे लोग सीनियर्स और जूनियर्स दोनों को चिढ़ा देते हैं. बिना मांगे सलाह वहां भी नुकसान पहुंचा सकती है.
इस आदत से कैसे बचा जा सकता है
इसका सबसे आसान उपाय है खुद पर कंट्रोल रखना. जब तक कोई आपसे न पूछे, तब तक बोलने से बचें. हर बात पर राय देना जरूरी नहीं होता, अगर सामने वाला खुद सलाह मांगे, तभी बोलें. इससे आपकी बात की कीमत भी बढ़ेगी और लोग आपको गंभीरता से लेंगे.

बोलने से पहले सोचने की आदत डालें
खुद से एक सवाल पूछें -“क्या सामने वाला सच में मेरी राय चाहता है?” अगर जवाब नहीं है, तो चुप रहना ही बेहतर है. कई बार चुप्पी सबसे समझदार जवाब होती है. ज्योतिष में भी कहा गया है कि बृहस्पति को मजबूत करने के लिए संयम जरूरी है. कम बोलना और सही समय पर बोलना, यही असली बुद्धि है.
बिना मांगे सलाह रोकने से क्या फायदा होगा
जब आप यह आदत छोड़ते हैं, तो लोग आपकी बात को ज्यादा अहमियत देने लगते हैं. रिश्तों में मिठास आती है. लोग आपसे खुलकर बात करने लगते हैं क्योंकि उन्हें डर नहीं रहता कि सामने से फौरन सलाह मिलेगी. धीरे-धीरे आपकी इमेज एक समझदार इंसान की बनती है, न कि हर बात में टोकने वाले की.
बिना मांगे सलाह देना भले ही छोटी आदत लगे, लेकिन इसका असर गहरा होता है. ज्योतिष में इसे बृहस्पति की कमजोरी से जोड़ा गया है, अगर जीवन में सम्मान, शांति और अच्छे रिश्ते चाहते हैं, तो बोलने से पहले सोचना सीखिए. जब कोई पूछे, तभी बोलिए.


