Achman Vidhi: हवन-पूजन से पहले आचमन जरूरी क्यों? क्या है इसकी सही विधि, पंडित जी से जानें इसका मंत्र और महत्व

Achman Vidhi: हवन-पूजन से पहले आचमन जरूरी क्यों? क्या है इसकी सही विधि, पंडित जी से जानें इसका मंत्र और महत्व

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Achman Importance And Vidhi: सनातन धर्म में किसी भी तरह के हवन-पूजन से पहले आचमन जरूर किया जाता है. यह पूजा की शुरुआत का पहले स्टेप होता है. मान्यता है कि पूजा करने से पहले आचमन से शरीर शुद्ध होता है. हालांकि, …और पढ़ें

पूजा के समय आचमन करने की विधि, मंत्र और महत्व. (Canva)

हाइलाइट्स

  • आचमन पूजा की शुरुआत का एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है.
  • आचमन से शरीर शुद्ध होता है और पूजा पूर्ण मानी जाती है.
  • आचमन करते समय ‘ॐ केशवाय नम:’ मंत्र का उच्चारण करें.

Achman Importance: सनातन धर्म में किसी भी हवन या पूजा-पाठ से पहले कुछ नियमों का जानना बेहद जरूरी है. शास्त्रों में भी इससे जुड़ी कई विधियों और नियमों के बारे में बताया गया है. इन्हीं नियमों में एक है आचमन की विधि. जी हां, आचमन का मतलब है कि पूजा की शुरुआत. यह पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. आचमन के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. यह शरीर को पवित्र करने की सबसे साधारण प्रक्रिया है. इसलिए शास्त्रों में आचमन की विधि, महत्व और लाभ के बारे में बताया गया है. अब सवाल है आखिर हवन-पूजन से पहले आचमन जरूरी क्यों होता है? आचमन की सही विधि क्या होती है? आचमन करते समय किस मंत्र का करें जाप? सनातन धर्म में आचमन का महत्व क्या है? इस बारे में News18 को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

क्या है पूजा में होने वाला आचमन?

किसी भी पूजा-पाठ में शरीर का शुद्ध होना बहुत जरूरी होता है. इसके लिए आचमन की प्रक्रिया बहुत जरूरी है. आचमन का स्पष्ट अर्थ होता है पवित्र जल को पीना. हालांकि, आचमन की प्रक्रिया हमेशा मंत्रों और शुद्ध जल के साथ की जाती है. ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, पूजा से पूर्व शुद्धि के लिए मंत्रोच्चारण के साथ शुद्ध जल को ग्रहण किया जाता है. शुद्ध जल को ग्रहण करने की यह प्रकिया ही आचमन कहलाती है.

आचमन करने से क्या होगा?

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, किसी भी पूजा की शुरुआत आचमन के साथ होती है. आचमन भी मंत्रों के साथ. माना जाता है कि, मंत्रोच्चारण के साथ तीन बार आचमन करने से पूजा में मन, वचन और कर्म तीनों की शुद्धता बनी रहती है और पूजा से भगवान प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं.

आचमन करने की सही विधि?

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, पूजा से पहले इससे संबंधित सभी सामग्रियों को एकत्रित कर लें. इसके अलावा, एक तांबे के पात्र में गंगाजल या शुद्ध जल भरकर रखें. अब इसमें तुलसी दल डालें. तांबे के पात्र में एक तांबे की आचमनी (एक छोटा सा चम्मच, जिससे जल निकाला जाता है) भी रखें. पूजा शुरू करने से पहले भगवान का ध्यान करते हुए आचमनी से जल निकालकर हथेली पर रखें और ग्रहण करें. इस प्रकिया को मंत्रों के साथ तीन बार किया जाता है.

आचमन के समय पढ़ें ये मंत्र

पं. ऋषिकांत मिश्र शास्त्री बताते हैं कि, आचमन के लिए शुद्ध जल ग्रहण करते समय मंत्रोच्चारण सबसे जरूरी है. इसलिए जब आचमन करें तो ‘ॐ केशवाय नम:।। ॐ नाराणाय नम:।। ॐ माधवाय नम:।। ॐ ह्रषीकेशाय नम:।।’ मंत्र का उच्चारण करें. हालांकि, ध्यान रहे कि, आचमन के बाद हाथ से माथा और कान से छूकर प्रणाम करें.

जल का वरुण देव से संबंध

जल को वरुण देव के रूप में पूजा जाता है और पुराणों में इस बात का जिक्र है कि जब किसी भी वस्तु की रक्षा जल से की जाती है तो उस पर वरुण देव की कृपा होती है. इसलिए जब भगवान के दिव्य रूप की आरती की परिक्रमा पूरी हो जाती है, तब उसकी लौ और ज्यादा दिव्य हो जाती है. इस आरती की ज्योति की पवित्रता बनाए रखने के लिए पानी से आचमन किया जाता है.

आचमन करते समय दिशा का रखें ध्यान

पूजा-पाठ की विधियों में दिशा का विशेष महत्व होता है क्योंकि गलत दिशा में की गई पूजा से इसका फल प्राप्त नहीं होता. आचमन करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपका मुख पूर्व, उत्तर या ईशान कोण की तरफ रहे.

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