कब है जितिया? संतान के लिए रखा जाता है जीवित्पुत्रिका व्रत, जानें पूजा मुहूर्त, पारण समय, महत्व

कब है जितिया? संतान के लिए रखा जाता है जीवित्पुत्रिका व्रत, जानें पूजा मुहूर्त, पारण समय, महत्व

जितिया को जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जानते हैं. जितिया का व्रत मुख्यत: बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में रखा जाता है. उस दिन माताएं अपने संतान के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और गंधर्व राजा जीमूतवाहन की विधि विधान से पूजा करती हैं. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जितिया का व्रत हर साल आश्विन मा​ह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव बता रहे हैं कि जितिया व्रत कब है? जीवित्पुत्रिका व्रत की पूजा का मुहूर्त और पारण समय क्या है?

किस दिन है जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत?

वैदिक पंचांग के अनुसार, जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत के लिए आवश्यक आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि इस साल 24 सितंबर दिन मंगलवार को दोपहर 23 बजकर 34 मिनट से शुरू होगी. इस तिथि का समापन 25 सितंबर दिन बुधवार को दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत 25 सितंबर बुधवार को रखा जाएगा.

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जितिया 2024 मुहूर्त

जितिया व्रत के दिन व्रती महिलाओं को ब्रह्म मुहूर्त में प्रात: 04:36 बजे से प्रात: 05:23 बजे के बीच दैनिक क्रियाओं से निवृत होकर स्नान आदि कर लेना चाहिए. उस दिन सूर्योदय 06:11 बजे होगा. सूर्योदय के बाद आप जितिया व्रत की पूजा कर सकती हैं. व्रत के दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 06:11 बजे से 07:41 बजे तक है, वहीं अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 07:41 बजे से 09:12 बजे तक है.

व्रत वाले दिन सूर्योदय से पूर्व महिलाओं को फल, मिठाई, चाय, पानी आदि ग्रहण कर लेना चाहिए. फिर सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक बिना कुछ खाएं-पिएं निर्जला व्रत रखा जाता है.

जितिया 2024 पारण समय

व्रत के अगले दिन यानी 26 सितंबर गुरुवार को माताएं सूर्योदय के बाद पूजा, पाठ और दान करें. पारण करके व्रत को पूरा करें. उस दिन सूर्योदय 06:12 बजे होगा. कई माताएं रात्रि के खत्म होने के बाद ही पानी पी लेती हैं. यदि सेहत से जुड़ी समस्याएं हैं तो आपको पंडित जी से पूछकर दूसरे विकल्पों को देखना चाहिए.

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जितिया व्रत का महत्व

जीवित्पुत्रिका व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार, यह व्रत पुत्र की सुरक्षा, उत्तम सेहत और उसके सुखी जीवन के लिए किया जाता है. वर्तमान परिपेक्ष्य में माताएं अपनी संतान चाहें बेटा हो या बेटी, उसके लिए व्रत रखती हैं और इसके सभी नियमों का पालन करती हैं.

Tags: Dharma Aastha, Religion

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