Holi 2025: होलिका में क्यों चढ़ाई जाती है गुलरी की माला? ज्योतिष शास्त्र में क्या है इसका महत्व, पंडितजी से जानें

Holi 2025: होलिका में क्यों चढ़ाई जाती है गुलरी की माला? ज्योतिष शास्त्र में क्या है इसका महत्व, पंडितजी से जानें

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होलिका दहन पर गोबर की गुलरी जलाने की परंपरा है, जिससे नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर की परेशानियां दूर होती हैं. गाय के गोबर को शुभ माना जाता है और इससे वातावरण शुद्ध रहता है.

होलिका में गुलरी की माला चढ़ाने का महत्व और परंपरा. (News18)

हाइलाइट्स

  • होलिका दहन पर गोबर की गुलरी जलाने की परंपरा है.
  • गुलरी जलाने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है.
  • गाय के गोबर से वातावरण शुद्ध रहता है.

Holika Dahan 2025: भारत संस्कृति विविधताओं से भरा हुआ देश है. यहां परंपराओं ने संस्कृति को जीवंत बनाए रखा है. इसलिए हर त्योहार को पूरी निष्ठा और परंपरा के साथ मनाया जाता है. होली का त्योहार भी इनमें से एक है. जी हां, होली हिंदुओं के लिए सबसे खास त्योहारों में से एक है. माना जाता है कि, होलिका दहन के साथ सभी बुराइयों का नाश होता है. होलिका की अग्नि में कुछ ऐसी चीजों को भी जलाया जाता है, जिनका ज्योतिष में भी विशेष महत्व है. ऐसी ही चीजों में से एक हैं गोबर की गुलरी.

जब हम होलिका दहन के पर्व की बात करते हैं तब उसमें गोबर के उपले (गुलरी) जलाने की खास परंपरा है. इसके लिए होलिका दहन की रात महिलाएं गुलरी की माला बनाकर होली पर चढ़ाती हैं और पूजा करती हैं. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर होली पर गुलरी की माला चढ़ाते क्यों हैं? गाय के गोवर की ही क्यों बनाई जाती हैं गुलरी? इस बारे में News18 को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

होलिका दहन की रात पूजा के साथ चढ़ाते गुलरी की माला

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, होली पर गोवर के छोटे-छोटे गुलरी या बल्ला-बल्लियां बनाई जाते हैं. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इसे किसी और नाम से भी जाना जा सकता है. इसके बाद सभी को एक रस्सी में इनको पिरोकर माला तैयार की जाती है. होलिका दहन की रात महिलाएं इस माला को होली पर चढ़ाती हैं और पूजा करती हैं.

…तो इसलिए होली पर चढ़ाई जाती है गुलरी की माला

नकारात्मक शक्तियों का नाश: ज्योतिष आचार्यों की मानें तो गोबर के उपले शुभता का प्रतीक माने जाते हैं. इन्हें जलाने से इनसे निकले धुआं से आसपास की नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं. यही वजह है कि यज्ञ और हवन में भी गाय के गोवर का इस्तेमाल होता है.

परेशानियां होती दूर: होली पर होलिका दहन के लिए गोबर से बनी गुलरियां जलाई जाती है. इसके लिए गोबर के छोटे-छोटे बनाकर उसमें बीच से छेद करके सुखाया जाता है और उनकी माला बनाई जाती हैं. माना जाता है कि, गुलरियों को जलाने से घर की परेशानियां दूर होती हैं.

खास क्यों गाय का गोबर: हिन्दू धर्म में गाय को पूज्यनीय माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है. ऐसे में गाय की पूजा करने से कई ज्योतिष लाभ मिलते हैं. गाय के गोबर से बने उपले जलाने से घर का वातावरण शुद्ध बना रहता है.

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Holi 2025: होलिका में क्यों चढ़ाई जाती है गुलरी की माला? जानें इसका महत्व

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