किस उद्देश्य के लिए हुआ था राधा रानी का अवतार? उनके पिता ने कब मांगा था वरदान, जानें पौराणिक कथा

किस उद्देश्य के लिए हुआ था राधा रानी का अवतार? उनके पिता ने कब मांगा था वरदान, जानें पौराणिक कथा

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Radha Rani ka Avatar :भगवान श्री कृष्ण ने मोहिनी रूप धारण किया, जिससे सभी देवता मोहित हो गए. सूर्य देव ने मोहिनी को पुत्री रूप में चाहा. कालांतर में राधा रानी का जन्म वृषभानु महाराज के घर हुआ.

राधा रानी का अवतार प्रेम की स्थापना के लिए हुआ था.

हाइलाइट्स

  • भगवान श्री कृष्ण ने मोहिनी रूप धारण किया.
  • राधा रानी का जन्म वृषभानु महाराज के घर हुआ.
  • राधा रानी का अवतार प्रेम की स्थापना के लिए हुआ.

Radha Rani ka Avatar : जब भगवान श्री कृष्ण ने मोहिनी रूप धारण किया तो उनके सौंदर्य पर सभी देवता मोहित हो गये. उन देवताओं के मन में यही कामना हुई कि ऐसी सुंदरी उनकी पत्नी बन जाए तो उनका जीवन धन्य हो जाये. इस सब से अलग सिर्फ सूर्य देव एकमात्र देवता थे. जिनके मन में मोहिनी के प्रति इस तरह का भाव नहीं आया. उन्होंने मन ही मन सोचा कि ये यदि मेरी पुत्री बने तो कितना अच्छा हो. भगवान श्री कृष्ण ने उनकी भावना को समझकर उन्हें आश्वस्त किया कि आपकी इच्छा पूरी होगी.

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सूर्यदेव ने लिया जन्म : कालांतर में जब सूर्यदेव ने बृज भूमि में वृषभानु महाराज के रूप में जन्म लिया और तपस्या की और ब्रह्म जी से प्रार्थना की की उन्हें ठाकुर जी की पुत्री के रूप मे प्राप्ति हो. ब्रह्मजी ने उनकी प्रार्थना को श्रीहरि तक पहुंचाया. ठाकुर जी को ज्ञात था कि उन्हें नन्द और यशोदा के यहां जन्म लेने वाले हैं लेकिन प्रेम की स्थापना के लिये एक विशेष अवतार लेना होगा. ठाकुर जी ने अपने आप को शीशे मे देखा तो ऐसा रुप दिखा जो स्वयं ठाकुर जी को भी मोहित कर गया. यह ठाकुर जी का स्त्री रूप था. प्रभू ने इस स्वरुप को स्थिर किया और लक्ष्मी जी के वस्त्र, आभूषण और श्रंगार से उसको तैयार किया. उस स्वरूप को देखकर ऐसा लगा मनुष्य और चंद्रमा दोनों का मिलन हो गया हो. वह इतना दिव्य स्वरूप था कि ठाकुर जी भी अपनी आंखें मूंदते रह गए.यह राधा रानी का दिव्य स्वरुप था.

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राधारानी का हुआ अवतार : श्री राधा की प्राकट्य का समय सुबह चार बजे का था. राधा रानी की जन्म पर वृषभानु महाराज और कीर्तिदा माता के घर उत्सव मनाया गया. सभी गोपी और गोपियों तथा बृजवासी आनंद से झूम उठे. जन्म के समय राधा रानी अपनी आंखें नहीं खोल रही थी इससे सभी लोग चकित थे.अनेकों प्रयासों से भी राधारानी ने अपनी आँखें नहीं खोली. देवताओं के आग्रह पर नारद मुनि वहां गये और उन्होंने वहां बैठकर उनकी स्तुति की. उस स्तुति से राधारानी ने नारद मुनि की ओर देखा. उस समय राधारानी ऐसी थीं जैसी मृगनयनी सुंदर बालिका अपने पालने से झांक रही हो. इस दृश्य को देखकर वृषभानु महाराज भावविभोर हो गये और राधारानी को प्रणाम किया. उन्हें ये सब देखकर यह एहसास हो गया कि उनकी पुत्री कोई साधारण बालिका नहीं है बल्कि साक्षात देवी हैं.

प्रेम की स्थापना के लिये हुआ अवतार : इस प्रकार ठाकुर जी का यह अवतार प्रेम की स्थापना के लिये हुआ. ठाकुर जी ने ज्ञान, धर्म और वैराग्य की स्थापना के लिये अनेकों अवतार लिये. प्रेम की स्थापना के लिये केवल राधा रानी का अवतार हुआ.

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