Krishna Leela: श्री कृष्ण ने गोपियों के वस्त्र चुराकर जानिए क्या संदेश दिया ! पद्म पुराण और गरुड़ पुराण में भी है इसका जिक्र

Krishna Leela: श्री कृष्ण ने गोपियों के वस्त्र चुराकर जानिए क्या संदेश दिया ! पद्म पुराण और गरुड़ पुराण में भी है इसका जिक्र

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भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के वस्त्र चुराकर उन्हें सिखाया कि बिना वस्त्र स्नान नहीं करना चाहिए, क्योंकि जल देवता और पूर्वज भी उपस्थित होते हैं. गरुड़ पुराण में भी इसका जिक्र है.

 Lord Krishna Leela : द्वापर युग में जन्म लेने वाले भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्री कृष्ण ने अपने बचपन से ही अनेकों करतब और लीलाएं दिखाना शुरू कर दी थी. हिंदू धर्म में अनेकों पुराण और धर्म ग्रंथो में इन लीलाओं का जिक्र किया गया है. भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का एक निश्चित संदेश होता है. इन्हीं लीलाओं में से एक भगवान के द्वारा स्नान करती वक्त गोपियों के वस्त्र चुराने की लीला का जिक्र है. आई विस्तार से जानते हैं कि आखिर भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के वस्त्र स्नान करते वक्त क्यों चुरा लिए थे.

पद्म पुराण में स्नान का प्रसंग मिलता है : पद्म पुराण में इसका प्रसंग मिलता है. दैनिक दिनचर्या के लिए जब गोपियां एक तालाब में स्नान करने के लिए एकत्रित हुई. अपने वेस्टन को उतार कर गोपिया जब तालाब में चली गई तो स्वयं श्री कृष्ण वहां बैठकर सारा दृश्य देख रहे थे. लौट कर आने पर जब गोपियां अपने कपड़े वहां नहीं पाती हैं तो वह घबरा जाती हैं. जब उन्हें पता चलता है कि पेड़ पर बैठे कृष्णा उनकी वस्त्र चुरा चुके हैं तो भी नटखट कान्हा से अपने वस्त्र देने का आग्रह करने लगती है. इस पर गोपियों से श्री कृष्ण ने कहा कि बाहर निकालो जल से और अपने वस्त्र ले लो. गोपियों ने कहा कि निर्वस्त्र होकर वह बाहर कैसे आ सकती हैं. श्री कृष्ण ने गोपियों से कहा कि आपके बिना वस्त्र के जल में नहाते हुए लाज नहीं आई. गोपियों ने उत्तर दिया कि जब वह स्नान के लिए आई तब यहां कोई नहीं था.

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कृष्ण ने दिया संदेश : इस संवाद के दौरान भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों से कहा कि आपने ऐसा कैसे सोच लिया कि यहां पर कोई नहीं था. मैं इस संसार के कान-कान में मौजूद हूं यहां जीव जंतु पेड़ पौधे पशु पक्षी आदि मौजूद हैं. जल के देव वरुण देव भी यहां मौजूद है. इन सब ने तो आपको निश्चित रूप से निर्वस्त्र देखा होगा. यहां श्री कृष्ण ने गोपियों के वस्त्र न चुराकर बल्कि उन्हें एक संदेश देने का कार्य किया.

गरुण पुराण में है स्नान करने का जिक्र: गरुड़ पुराण में इस बात का जिक्र किया गया है कि हमें कभी भी बिना वस्त्र पहने स्नान नहीं करना चाहिए. स्नान के दौरान हमारे पितृ हमारे आसपास ही होते हैं और स्नान के दौरान गिरने वाले जल को हमारे पूर्वज ग्रहण करते हैं. अगर बिना वस्त्र के कोई मनुष्य स्नान करता है तो पूर्वज उस जल को ग्रहण नहीं करते हैं. ऐसे में वे अतृप्त रह जाते हैं. अपने संतान से रुष्ट हो जाते हैं और उस व्यक्ति का धन, बल, सुख, संपत्ति सब छीन लेते हैं. इसलिए कभी भी निर्वस्त्र होकर स्नान नहीं करना चाहिए.

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श्री कृष्ण ने गोपियों के वस्त्र चुराकर जानिए क्या संदेश दिया !

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