अजन्मे हैं भगवान शिव, न मां, न पिता, फिर कैसे हुईं उनकी बहन? जिन्होंने देवी पार्वती को पैरों के दरारों में छिपाया

अजन्मे हैं भगवान शिव, न मां, न पिता, फिर कैसे हुईं उनकी बहन? जिन्होंने देवी पार्वती को पैरों के दरारों में छिपाया

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Shiv Ji Ki Bahan: महादेव अजन्मे हैं, न कोई उनका पिता है और उन ही उनकी कोई माता. न उनका आदि है और न ही कोई अंत.लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव की बहन कौन हैं? उनका का क्या नाम है? देवी पार्वती की ननद कौन है…और पढ़ें

शिवजी की माया से प्रकट हुईं उनकी बहन.

हाइलाइट्स

  • भगवान शिव की बहन का नाम असावरी देवी है.
  • असावरी देवी को अम्मावरी के नाम से भी जाना जाता है.
  • देवी असावरी ने देवी पार्वती को पैरों के दरारों में छिपाया.

देवों के देव महादेव सबसे निराले हैं, वे अजन्मे हैं, न कोई उनका पिता है और उन ही उनकी कोई माता. न उनका आदि है और न ही कोई अंत. वे काल के परे हैं, इसलिए महाकाल कहलाते हैं, वो त्रिकादर्शी हैं. वो आदियोगी हैं. माता सती के बाद देवी पार्वती का जन्म हुआ और शिव जी से उनका विवाह हुआ. उनसे दो पुत्र और एक पुत्री हुई. कार्तिकेय, गणेश और अशोकसुंदरी इनकी संतान हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव की बहन कौन हैं? उनका का क्या नाम है? देवी पार्वती की ननद कौन हैं? आइए जानते हैं उनके बारे में.

शिव-पार्वती विवाह
देवी पार्वती का भगवान शिव से विवाह हुआ तो वह कैलाश पर आ गईं, जहां पर शिवगण उनकी सेवा में लगे रहते थे. लेकिन कई बाद देवी पार्वती उदास हो जाती थीं क्योंकि भगवान शिव साधना में लीन हो जाते थे और देवी पार्वती अकेला महसूस करती थीं. भगवान शिव तो ​ठहरे त्रिकालदर्शी. उनको माता पार्वती के मन की बात पता चल गई. उन्होंने माता पार्वती से पूछा कि आप उदास क्यों हैं? तब माता पार्वती ने कहा कि उनकी कोई ननद नहीं है. उनको एक ननद चाहिए. तब महादेव ने पूछा कि क्या आप अपनी ननद से निभा पाओगी. इस पर देवी पार्वती ने कहा कि जब सबकी निभती है तो मेरी क्यों नहीं निभेगी.

शिवजी की माया से प्रकट हुईं उनकी बहन
देवी पार्वती की बातों को सुनकर महादेव ने अपनी माया से एक स्त्री को उत्पन्न किया, जिसका नाम असावरी देवी था, जिनको कहीं कहीं पर अम्मावरी के नाम से भी जाना जाता है. वह मोटी थीं, उनके पैर फटे हुए थे. भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा कि ये देव असावरी हैं, जो आपकी ननद हैं. उनको देखकर माता पार्वती बहुत खुश हुईं. उनके स्वागत के लिए माता पार्वती ने कई तर​ह के पकवान बनाएं.

पांव के दरारों में माता पार्वती को छिपाया
असावरी देवी ने स्नान किया और फिर अपनी भाभी से भोजन परोसने को कहा. देवी पार्वती ने उनके लिए खाना निकाला. देवी असावरी सारा खाना खा गईं और भंडार घर का पूरा अन्न भी खा गईं. यह देखकर माता पार्वती आश्चर्य में पड़ गईं. उसी बीच असावरी को भाभी से मजाक करने का सूझा. उन्होंने देवी पार्वती को अपने फटे हुए पैरों के दरारों के बीच छिपा दिया.

बहन की शरारत से चिंतित हुए महादेव
भगवान शिव माता पार्वती को खोज रहे थे. वे कहीं भी दिख नहीं रही थीं. तब महादेव देवी असावरी के पास आए और देवी पार्वती के बारे में पूछा कि वे कहां हैं? तब असावरी मुस्कुराने लगीं. उन्होंने कुछ नहीं बताया. शिवजी माता पार्वती के लिए चिंतित थे. तब असावरी ने अपनी भाभी को पैरों के दरारों से बाहर निकाला.

देवी असावरी को किया विदा
माता पार्वती अपनी ननद की इस शरारत से इतनी परेशान हो गईं कि उन्होंने भोलेनाथ से कहा कि आप ननद को उनके ससुराल भेज दें. उनसे गलती हो गई कि उन्होंने ननद को पाने की इच्छा की. उस घटना के बाद शिवजी ने देवी असावरी को वहां से विदा कर दिया.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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