Mangal Dosh: अमंगल की ओर ले जा रहा मंगल दोष? कुंडली में कैसे लगता है यह दोष, मुक्ति दिलाएंगे ये 4 महा उपाय!

Mangal Dosh: अमंगल की ओर ले जा रहा मंगल दोष? कुंडली में कैसे लगता है यह दोष, मुक्ति दिलाएंगे ये 4 महा उपाय!

Mangal Dosh Upay: सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित है. इसी तरह मंगलवार के दिन हनुमान जी एवं मंगल देव की पूजा का विधान है. धार्मिक मान्यता है कि मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा से कुंडली में मंगल ग्रह मजबूत होता है. साथ ही मंगल दोष का प्रभाव भी समाप्त होता है. अगर आप भी मगंल दोष से निजात पाना चाहते हैं, तो मंगलवार को ये उपाय जरूर करें. इन उपायों के बारे में News18 को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

कुंडली में कैसे लगता है मंगल दोष?

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, किसी जातक की कुंडली के प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में मंगल ग्रह होने पर मंगल दोष लगता है. मंगल का स्वभाव क्रोधी माना गया है. जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल की स्थिति कमजोर होती है, तो व्यक्ति का विवाह होने में समस्याएं उत्पन्न होती हैं. जातक के मांगलिक होने पर दोष निवारण अनिवार्य है.

कुंडली से मंगल दोष दूर करने के उपाय

लाल वस्तुएं दान करें: यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष है और निजात पाना चाहते हैं, तो मंगलवार के दिन लाल रंग की चीजें जरूरतमंदों को दें. इसमें आप मसूर दाल, लाल मिर्च, लाल रंग की मिठाई, लाल रंग का वस्त्र आदि का दान कर सकते हैं. ऐसा करने से मंगल मजबूत होता है.

सिंदूर अर्पित करें: हर मंगलवार के दिन स्नान-ध्यान के बाद हनुमान जी की पूजा करें. इस समय हनुमान चालीसा का पाठ करें. इसके बाद हनुमान जी के चरणों में सिंदूर अर्पित करें. इस उपाय को करने से भी मंगल दोष दूर होता है.

अशोक का पेड़ लगाएं: मांगलिक जातकों को मंगलवार के दिन बाग या किसी गार्डन में अशोक के पेड़ लगाना चाहिए. इस उपाय को करने से भी मंगल दोष दूर होता है. साथ ही, मंगल का निगेटिव प्रभाव कम होता है.

श्री अंगारक स्तोत्रम् का पाठ करें

अंगारकः शक्तिधरो लोहितांगो धरासुतः।
कुमारो मंगलो भौमो महाकायो धनप्रदः ॥
ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृत् रोगनाशनः।
विद्युत्प्रभो व्रणकरः कामदो धनहृत् कुजः ॥
सामगानप्रियो रक्तवस्त्रो रक्तायतेक्षणः।
लोहितो रक्तवर्णश्च सर्वकर्मावबोधकः ॥
रक्तमाल्यधरो हेमकुण्डली ग्रहनायकः।
नामान्येतानि भौमस्य यः पठेत् सततं नरः॥
ऋणं तस्य च दौर्भाग्यं दारिद्र्यं च विनश्यति।
धनं प्राप्नोति विपुलं स्त्रियं चैव मनोरमाम् ॥
वंशोद्योतकरं पुत्रं लभते नात्र संशयः ।
योऽर्चयेदह्नि भौमस्य मङ्गलं बहुपुष्पकैः।
सर्वं नश्यति पीडा च तस्य ग्रहकृता ध्रुवम् ॥

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Tags: Astrology, Dharma Aastha, Lord Hanuman

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