सफला एकादशी पर श्रीहरि की पूजा के साथ करें तुलसी कवच का पाठ, प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु, जानें व्रत लाभ और पूजा विधि

सफला एकादशी पर श्रीहरि की पूजा के साथ करें तुलसी कवच का पाठ, प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु, जानें व्रत लाभ और पूजा विधि

Saphala Ekadashi 2024: सफला एकादशी का व्रत मंगलकारी माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है. यह साल 2024 की अंतिम एकादशी है. बता दें कि, सफला एकादशी का व्रत हर साल पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. इसे पौष कृष्ण एकादशी भी कहते हैं. कहा जाता है कि इस शुभ दिन व्रत रखने से घर में देवी लक्ष्मी का आगमन होता है. इसके अलावा, इस दिन तुलसी पूजा को भी शुभकारी माना गया है. इसलिए सफला एकादशी को व्रत के साथ तुलसी कवच का पाठ बहुत फलदायी हो सकता है. अब सवाल है कि आखिर साल 2024 में कब है सफला एकादशी व्रत? सफला एकादशी व्रत कैसे रखें? सफला एकादशी का व्रत क्यों रखा जाता है? क्या है तुलसी कवच पाठ? इस बारे में News18 को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

सफला एकादशी 2024 तारीख

पंचांग के अनुसार, इस साल पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 25 दिसंबर बुधवार को रात 10 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी. इस तिथि का समापन 26 दिसंबर को देर रात 12 बजकर 43 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर इस साल की अंतिम एकादशी यानी सफला एकादशी 26 दिसंबर गुरुवार को होगी.

क्यों रखें सफला एकादशी का व्रत

सफला एकादशी का दिन सबसे पावन दिनों में से एक है. इस दिन लोग भगवान विष्णु के लिए व्रत रख पूजा-अर्चना करते हैं. ज्योतिषाचार्यों की मानें तो कहते हैं कि इस तिथि पर तुलसी पूजन भी जरूर करना चाहिए. ऐसे करने वाले जातकों पर भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं.

सफला एकादशी का व्रत कैसे रखें

ज्योतिषाचार्य की मानें तो सफला एकादशी के दिन सुबह उठकर तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और उन्हें फूल, माला और मिठाई आदि चीजें अर्पित करें. इसके बाद उनके समक्ष देसी घी का दीपक जलाएं. फिर तुलसी कवच का पाठ करें और आरती से पूजा को समाप्त करें.

सफला एकादशी व्रत के लाभ

शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति सफला एकादशी व्रत विधि-विधान के साथ करता है उसे लंबी आयु की प्राप्ति होती है. सफला एकादशी व्रत के प्रभाव से जातक को अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है. सफला एकादशी व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं. ऐसा करने से आपका सोया हुआ भाग्य भी जाग जाएगा. इसके साथ ही घर में कभी धन से जुड़ी कोई समस्या नहीं आएगी.

।।तुलसी कवच पाठ..

तुलसी श्रीमहादेवि नमः पंकजधारिणी ।
शिरो मे तुलसी पातु भालं पातु यशस्विनी ।।
दृशौ मे पद्मनयना श्रीसखी श्रवणे मम ।
घ्राणं पातु सुगंधा मे मुखं च सुमुखी मम ।।
जिव्हां मे पातु शुभदा कंठं विद्यामयी मम ।
स्कंधौ कह्वारिणी पातु हृदयं विष्णुवल्लभा ।।
पुण्यदा मे पातु मध्यं नाभि सौभाग्यदायिनी ।
कटिं कुंडलिनी पातु ऊरू नारदवंदिता ।।
जननी जानुनी पातु जंघे सकलवंदिता ।
नारायणप्रिया पादौ सर्वांगं सर्वरक्षिणी ।।
संकटे विषमे दुर्गे भये वादे महाहवे ।
नित्यं हि संध्ययोः पातु तुलसी सर्वतः सदा ।।
इतीदं परमं गुह्यं तुलस्याः कवचामृतम् ।
मर्त्यानाममृतार्थाय भीतानामभयाय च ।।
मोक्षाय च मुमुक्षूणां ध्यायिनां ध्यानयोगकृत् ।
वशाय वश्यकामानां विद्यायै वेदवादिनाम् ।।
द्रविणाय दरिद्राण पापिनां पापशांतये ।।
अन्नाय क्षुधितानां च स्वर्गाय स्वर्गमिच्छताम् ।
पशव्यं पशुकामानां पुत्रदं पुत्रकांक्षिणाम् ।।
राज्यायभ्रष्टराज्यानामशांतानां च शांतये ।
भक्त्यर्थं विष्णुभक्तानां विष्णौ सर्वांतरात्मनि ।।
जाप्यं त्रिवर्गसिध्यर्थं गृहस्थेन विशेषतः ।
उद्यन्तं चण्डकिरणमुपस्थाय कृतांजलिः ।।
तुलसीकानने तिष्टन्नासीनौ वा जपेदिदम् ।
सर्वान्कामानवाप्नोति तथैव मम संनिधिम् ।।
मम प्रियकरं नित्यं हरिभक्तिविवर्धनम् ।
या स्यान्मृतप्रजा नारी तस्या अंगं प्रमार्जयेत् ।।
सा पुत्रं लभते दीर्घजीविनं चाप्यरोगिणम् ।
वंध्याया मार्जयेदंगं कुशैर्मंत्रेण साधकः ।।
साSपिसंवत्सरादेव गर्भं धत्ते मनोहरम् ।
अश्वत्थेराजवश्यार्थी जपेदग्नेः सुरुपभाक ।।
पलाशमूले विद्यार्थी तेजोर्थ्यभिमुखो रवेः ।
कन्यार्थी चंडिकागेहे शत्रुहत्यै गृहे मम ।।
श्रीकामो विष्णुगेहे च उद्याने स्त्री वशा भवेत् ।
किमत्र बहुनोक्तेन शृणु सैन्येश तत्त्वतः ।।
यं यं काममभिध्यायेत्त तं प्राप्नोत्यसंशयम् ।
मम गेहगतस्त्वं तु तारकस्य वधेच्छया ।।
जपन् स्तोत्रं च कवचं तुलसीगतमानसः ।
मण्डलात्तारकं हंता भविष्यसि न संशयः ।।

।।तुलसी माता की आरती।।

जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता ।।
मैय्या जय तुलसी माता।।
सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर।
रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता।
मैय्या जय तुलसी माता।।
बटु पुत्री है श्यामा, सूर बल्ली है ग्राम्या।
विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे, सो नर तर जाता।
मैय्या जय तुलसी माता।।
हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित।
पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता।
मैय्या जय तुलसी माता।।
लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में।
मानव लोक तुम्हीं से, सुख-संपति पाता।
मैय्या जय तुलसी माता।।
हरि को तुम अति प्यारी, श्याम वर्ण सुकुमारी।
प्रेम अजब है उनका, तुमसे कैसा नाता।
हमारी विपद हरो तुम, कृपा करो माता।
मैय्या जय तुलसी माता।।
जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता।
सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता।।
मैय्या जय तुलसी माता।।

ये भी पढ़ें:  6 दिन बाद अच्छे-बुरे कर्मों का फल देंगे कर्मफलदाता! नक्षत्र परिवर्तन कर रहे हैं शनिदेव, 4 राशिवालों की चमकेगी किस्मत

ये भी पढ़ें:  बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीया जलाने से क्या होगा? किस देवता का होता वास, जानें किन 4 परेशानियों से मिलेगी मुक्ति

Tags: Dharma Aastha, Lord vishnu, Religion

Source link

You May Have Missed