क्या 28 साल के बाद खत्म हो जाता है मंगलदोष का प्रभाव, ज्योतिष से जानें इसका कारण और निवारण के उपाय

क्या 28 साल के बाद खत्म हो जाता है मंगलदोष का प्रभाव, ज्योतिष से जानें इसका कारण और निवारण के उपाय

हाइलाइट्स

मंगल देव को साहस और ऊर्जा का कारक ग्रह माना जाता है. मंगल कमजोर है तो सिर्फ करियर बल्कि शादी में भी कई दिक्कतें आती हैं.

Mangal Dosh: ज्योतिष शास्त्र में मंगल देव को साहस और ऊर्जा का कारक ग्रह माना जाता है. जिन जातकों की कुंडली में मंगल मजबूत होते हैं, उनके करियर और बिजनेस में मनचाही सफलता प्राप्त होती है. वहीं जिन लोगों की कुंडली में मंगल कमजोर होता है, उन्हें ना सिर्फ करियर बल्कि शादी में भी कई दिक्कतें आती हैं. भोपाल निवासी ज्योतिष आचार्य पंडित योगेश चौरे मंगल देव को मजबूत करने के लिए जातक को हनुमान जी की पूजा करने की सलाह देते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि मंगल दोष कैसे लगता है? और क्या 28 साल बाद मंगल दोष समाप्त हो जाता है? इसको लेकर आइए जानते हैं सब कुछ.

कैसे लगता है मंगल दोष?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कुंडली के पहले, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में मंगल रहते हैं तो ऐसे में जातक को मंगल दोष लग जाता है और व्यक्ति मांगलिक कहलाता है. वहीं मांगलिक होने के कारण व्यक्ति का विवाह बड़ी कठिनाईयों के साथ देरी से होता है और कई बार विवाह के बाद वैवाहिक जीवन भी कष्टों के साथ बीतता है. हालांकि मंगल दोष के निवारण के साथ सभी चीजें समान्य हो जाती हैं.

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मंगल दोष परिहार
मंगल दोष को लेकर कई ज्योतिषियों का मत है कि 28 साल के बाद इसका प्रभाव समाप्त हो जाता है हालांकि इसके लिए किसी प्रकांड पंडित से सलाह की आवश्यकता लेनी चाहिए. जो कि कुंडली का विचार सही तरीके से कर पाए. वैसे ज्योतिषियों का यह भी कहना है कि कई बार ग्रहों की स्थिति ऐसी भी होती है कि मंगल दोष का खुद ब खुद परिहार समाप्त हो जाता है. लेकिन इस स्थिति में मंगल दोष का निवारण जरूरी नहीं है.

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मंगलदोष निवारण के लिए करवाएं भात पूजन
ज्योतिषियों की मानें तो जब मंगल स्वराशि के साथ होता है तो दोष का परिहार हो जाता है. लेकिन अगर गुरु और शुक्र के साथ रहता है तो मंगल का प्रभाव क्षीण हो जाता है. इसलिए मंगल का विचार बहुत बारीकी से और किसी प्रकांड पंडित से करवाना उचित माना जाता है. इसके साथ ही अगर कोई व्यक्ति शीघ्र विवाह और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए मंगल दोष का निवारण कर लेता है तो यह श्रेष्ठ माना जाता है. इसके साथ ही मंगल दोष के निवारण के लिए मंगलनाथ मंदिर में भात पूजन भी करवा सकते.

Tags: Astrology, Dharma Aastha, Religion

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