मार्गशीर्ष के इस सोमवार पर बना दुर्लभ संयोग, शिव पूजा से मिलेगा 1000 महाशिवरात्रि व्रत का पुण्य लाभ, इतनी संख्या में जलाएं दीप

मार्गशीर्ष के इस सोमवार पर बना दुर्लभ संयोग, शिव पूजा से मिलेगा 1000 महाशिवरात्रि व्रत का पुण्य लाभ, इतनी संख्या में जलाएं दीप

मार्गशीर्ष माह में आने वाला आर्द्रा नक्षत्र का दिन शिव पूजा के लिए सबसे उत्तम है. इस दिन व्रत और शिव पूजा करने से व्यक्ति को 1000 महाशिवरात्रि का पुण्य लाभ प्राप्त होता है. इस दिन आप शिव आराधना करके अपने कष्टों और संकटों से मुक्ति पा सकते हैं. शिव कृपा से आपकी मनोकमानाएं पूरी हो सकती हैं. उज्जैन के महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी का कहना है कि मार्गशीर्ष माह की आर्द्रा नक्षत्र को पहली बार भगवान शिव ज्योतिर्मय स्तंभस्वरूप में प्रकट हुए थे. 27 नक्षत्रों में आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी महादेव हैं. इस दिन शिव पूजा और दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति महादेव का प्रिय हो जाता है. आइए जानते हैं कि मार्गशीर्ष माह में आर्द्रा नक्षत्र कब है? मार्गशीर्ष आर्द्रा नक्षत्र में शिव पूजा करने का महत्व क्या है?

16 दिसंबर सोमवार को ​शिव पूजा का दुर्लभ संयोग
ज्योतिषाचार्य डॉ. तिवारी के अनुसार, इस साल 16 दिसंबर को आर्द्रा नक्षत्र और सोमवार दिन का दुर्लभ संयोग बना है. उस दिन शुक्ल और ब्रह्म योग बनेंगे. शुक्ल योग प्रात:काल से लेकर रात 11 बजकर 23 मिनट तक है, उसके बाद से ब्रह्म योग है.

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16 दिसंबर को भगवान शिव के ज्योतिर्मय स्तंभस्वरूप का प्रकाट्य दिवस है और सोमवार शिव पूजा को समर्पित दिन है. सोमवार के दिन आर्द्रा नक्षत्र के संयोग से यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो गया है.

मार्गशीर्ष आर्द्रा नक्षत्र पर शिव पूजा विधि
मार्गशीर्ष आर्द्रा नक्षत्र वाले दिन शिव जी का पूजन और दर्शन जरूर करना चाहिए. यदि आपके पास समय हो तो विधि विधान से शिव जी की पूजा करें और उनकी आरती उतारें. भोलेनाथ को प्रसाद चढ़ाएं. उसके बाद अपने पूजा घर या शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ के लिए 11, 21, 51 या 108 घी के दीप जलाएं. इस दिन दीप जलाने का भी अत्यधिक महत्व है.

मार्गशीर्ष आर्द्रा नक्षत्र का महत्व
शिव पुराण की कथा के अनुसार, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के बीच सर्वश्रेष्ठ होने को लेकर बहस चल रही थी, तभी निराकार भगवान शिव उनके समक्ष शिवलिंग के रूप में पहली बार प्रकट हुए थे. उस ज्योतिर्मय शिवलिंग का कोई ओर और छोर नहीं था. दोनों को शिव का महत्व पता चला. तब भगवान विष्णु और ब्रह्म देव ने शिवलिंग की पहली बार पूजा की.

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मार्गशीर्ष आर्द्रा नक्षत्र में शिव पूजा के फायदे
1. जो लोग इस दिन भगवान भोलेनाथ के साथ माता पार्वती या शिवलिंग के दर्शन करते हैं, वह व्यक्ति महादेव को भगवान कार्तिकेय से भी अधिक प्रिय हो जाता है.

2. इस दिन शिव परिवार की पूजा करने और भोलेनाथ का अभिषेक करने से हजारों महाशिवरात्रि के पूजन के बराबर पुण्य फल मिलता है.

शिव पुराण में मार्गशीर्ष आर्द्रा नक्षत्र का वर्णन है—
यत्पुनः स्तंभरूपेण स्वाविरासमहं पुरा॥
स कालो मार्गशीर्षे तु स्यादार्द्रा ऋक्षमर्भकौ॥
आर्द्रायां मार्गशीर्षे तु यः पश्येन्मामुमासखम्॥
मद्बेरमपि वा लिंगं स गुहादपि मे प्रियः॥
अलं दर्शनमात्रेण फलं तस्मिन्दिने शुभे॥
अभ्यर्चनं चेदधिकं फलं वाचामगोचरम्॥

Tags: Dharma Aastha, Lord Shiva

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