स्टडी टेबल पर न रखें ये चीजें, नहीं तो भटक सकता है बच्चों का ध्यान, जानिए नियम

स्टडी टेबल पर न रखें ये चीजें, नहीं तो भटक सकता है बच्चों का ध्यान, जानिए नियम

अंबाला: आज के दौर में माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं देने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं. दरअसल, महंगे स्कूल, कोचिंग और डिजिटल गैजेट्स पर हजारों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन एक ऐसी बात अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, जो बच्चों की पढ़ाई और एकाग्रता पर सीधा असर डाल सकती है. वह है बच्चों के स्टडी रूम का वातावरण. बता दें कि वास्तु शास्त्र के अनुसार अध्ययन कक्ष की दिशा, रंग, रोशनी और व्यवस्था बच्चों की मानसिक ऊर्जा, फोकस और सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर स्टडी रूम का माहौल नीरस, अव्यवस्थित या नकारात्मक ऊर्जा वाला हो, तो बच्चे पढ़ाई में जल्दी ऊबने लगते हैं और उनका ध्यान बार-बार भटकता है. इसके विपरीत, यदि कमरे को सही दिशा, हल्के रंगों और सकारात्मक वातावरण के साथ तैयार किया जाए तो पढ़ाई के प्रति रुचि और आत्मविश्वास दोनों बढ़ सकते हैं.

पूर्व और उत्तर दिशा को माना गया है शुभ

वहीं, इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि पारंपरिक वास्तु मान्यताओं के अनुसार बच्चों के अध्ययन के लिए पूर्व और उत्तर दिशा सबसे उपयुक्त मानी जाती है. उन्होंने कहा कि पूर्व दिशा ज्ञान, बुद्धि और एकाग्रता का प्रतीक मानी जाती है, जबकि उत्तर दिशा सकारात्मक ऊर्जा और सफलता का संचार करती है. उनका कहना है कि वास्तु नियम किसी चमत्कार का दावा नहीं करते, लेकिन सकारात्मक और व्यवस्थित वातावरण बच्चों को बेहतर ढंग से पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है.

स्टडी रूम के लिए इन रंगों को माना जाता है बेहतर

उन्होंने बताया कि वास्तु के अनुसार स्टडी रूम की दीवारों का रंग भी सोच-समझकर चुनना चाहिए. सफेद रंग मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ाने वाला माना जाता है, जबकि क्रीम रंग शांति और संतुलन का अहसास कराता है. वहीं हल्का पीला रंग सीखने और याद रखने की क्षमता को प्रोत्साहित करता है. हल्का हरा आंखों को आराम देने के साथ तनाव कम करने में सहायक माना जाता है. आसमानी रंग बच्चों के मन को शांत रखने और रचनात्मक सोच विकसित करने में मददगार माना जाता है. इसके विपरीत, बहुत गहरे या चटक रंग बच्चों का ध्यान भटका सकते हैं.

कमरे में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा जरूरी

उन्होंने यह भी सलाह दी है कि स्टडी रूम में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का पर्याप्त इंतजाम होना चाहिए. इसलिए कमरा हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहे, क्योंकि बिखरा हुआ वातावरण बच्चों के मन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है.

स्टडी टेबल पर इन चीजों को रखने से बचें

उन्होंने बताया कि स्टडी टेबल पर केवल जरूरी किताबें, कॉपियां और पढ़ाई से जुड़ी सामग्री ही रखनी चाहिए. पेन-पेंसिल व्यवस्थित हों, प्रेरणादायक विचारों वाले चार्ट लगाए जा सकते हैं और छोटे इनडोर पौधे भी सकारात्मक माहौल बनाने में सहायक माने जाते हैं. वहीं टूटी हुई घड़ी, खराब पेन, रद्दी कॉपियां, अनावश्यक सजावटी सामान या खाने-पीने की चीजें टेबल पर रखने से बचना चाहिए.

दीवारों पर लगाएं सकारात्मक तस्वीरें

उन्होंने कहा कि बच्चों के स्टडी रूम की दीवारों पर मां सरस्वती की शांत तस्वीर, उगते हुए सूर्य या प्रेरणादायक संदेशों वाली तस्वीरें लगाना शुभ माना जाता है. वहीं हिंसा, युद्ध, डरावने या उदासी भरे दृश्य दर्शाने वाली तस्वीरों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है.

सकारात्मक माहौल से बढ़ सकता है पढ़ाई पर फोकस

जानकारों का मानना है कि पढ़ाई के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करना केवल सुविधा नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी बन सकता है.

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