सावन का पहला प्रदोष व्रत कब है? 2 घंटे रहेगा पूजा का शुभ समय, जानें तारीख, मुहूर्त, महत्व

सावन का पहला प्रदोष व्रत कब है? 2 घंटे रहेगा पूजा का शुभ समय, जानें तारीख, मुहूर्त, महत्व

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सावन का पहला प्रदोष व्रत कब है? 2 घंटे रहेगा पूजा का शुभ समय, जानें तारीख

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sawan ka pehla pradosh vrat kab hai 2026 date: सावन का पहला प्रदोष व्रत सोमवार को त्रयोदयशी तिथि को होने से यह सोम प्रदोष व्रत होगा. यह कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत है. इस दिन पूजा के लिए 2 घंटे का शुभ मुहूर्त रहेगा. अगले दिन भोर में भद्रा लग जाएगी. आइए जानते हैं सोम प्रदोष व्रत की तारीख, मुहूर्त और महत्व के बारे में.

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सावन का पहला प्रदोष व्रत 2026 तारीख और मुहूर्त. (Photo: AI)

Som Pradosh Vrat August 2026 Date: सावन का पहला प्रदोष व्रत श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को है. उस दिन सोमवार होने की वज​​ह से वह सोम प्रदोष व्रत होगा. सावन माह में हर दिन शिव पूजा के लिए अच्छा होता है, लेकिन सावन में प्रदोष व्रत विशेष फलदायी होता है. सावन के पहले प्रदोष व्रत के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 2 घंटे तक है. इस समय में आपको जलाभिषेक और पूजा पाठ विधि विधान से कर लेना चाहिए. आइए जानते हैं कि सावन का पहला प्रदोष व्रत की तारीख, मुहूर्त, महत्व के बारे में.

सावन का पहला प्रदोष व्रत 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन मा​ह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी ति​थि 10 अगस्त को सुबह में 08:00 ए एम से शुरू होगी. इस ति​थि का समापन 11 अगस्त को प्रात: 04 बजकर 54 मिनट पर होगा. ऐसे में सावन का पहला प्रदोष व्रत या सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त को है. इसके बाद सावन शिवरात्रि है.

सोम प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त

सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 07 बजकर 05 मिनट से है और यह रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. इस समय में पूजा करना शुभ फलदायी होता है.

सोम प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:22 ए एम से 05:05 ए एम तक रहेगा. वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:00 पी एम से लेकर दोपहर 12:53 पी एम तक है. प्रदोष के दिन राहुकाल सुबह में 07:27 ए एम से सुबह 09:07 ए एम तक है.

वज्र योग और आर्द्रा नक्षत्र में सोम प्रदोष

इस सोम प्रदोष व्रत के दिन वज्र योग और आर्द्रा नक्षत्र है. प्रदोष पर वज्र योग प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, उसके बाद से सिद्धि योग बनेगा, जो अगले दिन सुबह तक है. वहीं उस दिन आर्द्रा नक्षत्र सुबह से लेकर दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक है, उसके बाद से पुनर्वसु नक्षत्र है.

त्रयोदशी तिथि के बाद भद्रा

त्रयोदशी तिथि के समापन के बाद यानि 11 अगस्त को प्रात: 04 बजकर 54 मिनट भद्रा का प्रारंभ होगा, जो प्रात: 05 बजकर 48 मिनट तक रहेगी. इस भद्रा का वास धरती पर है, इस​ वजह से भद्रा में कोई शुभ काम न करें.

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत सोम प्रदोष कहलाता है. इस दिन व्रत रखकर शिव पूजा करने से सुख, समृद्धि, मानसिक शांति की प्राप्ति होती है. कुंडली का चंद्र दोष भी दूर होता है. वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, सेहत ठीक रहती है.

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कार्तिकेय तिवारीDeputy News Editor

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…

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