Shiv ji ki Aarti Lyrics: ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा, शिवजी की आरती हिंदी में

Shiv ji ki Aarti Lyrics: ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा, शिवजी की आरती हिंदी में

Shiv ji ki Aarti Lyrics: भगवान शिव जी की पूजा के लिए सावन का महीना बहुत ही उत्तम माना गया है. इस माह के सभी दिन शिव पूजा के लिए विशेष होते हैं. गंगाजल से अभिषेक करके बेलपत्र, भांग, धतूरा, अक्षत्, चंदन, फूल आदि से शिव पूजा करें. उसके बाद शिव जी की आरती करें. शिव जी की आरती का प्रारंभ ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा से होता है. इसका समापन कर्पूरगौरं मंत्र से करना चाहिए. आइए जानते हैं शिव जी की आरती, विधि और मंत्र के बारे में.

शिव जी की आरती (Shiv ji ki Aarti ka poora lyrics)

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा…

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा…

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा…

अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा…

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा…

कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा…

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा…

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा…

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा…

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा…

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥

कर्पूरगौरं मंत्र

कर्पूरगौरं करुणावतारं, संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे, भवं भवानीसहितं नमामि॥

शिव जी की आरती कब और कैसे करनी चाहिए?

भगवान शिव की आरती आप हमेशा पूजा के समापन के समय करें. सावन सोमवर व्रत, प्रदोष व्रत, शिवरात्रि, महाशिवरात्रि, सोमवार व्रत की पूजा करें, तो उसके अंत में शिव जी की आरती जरूर करें. इसके अलावा आप प्रतिदिन शिव पूजा करते हैं तो भी उसका समापन शिव जी की आरती से करें. आरती करने से पूजा पूर्ण हो जाती हैं, उसमें जो कमियां होती हैं, वह उससे पूरी हो जाती हैं.

शिव जी की आरती के लिए आप गाय के घी वाले दीपक का उपयोग करें. जब आरती कर लें तो उस दीपक को शिव जी दाएं रखें. यदि आपके पास घी नहीं है तो परेशान न हों, कपूर से भी शिव जी की आरती कर सकते हैं. आरती के समय घंटी बजानी चाहिए, लेकिन शंख का उपयोग न करें. शिव पूजा में शंख वर्जित है.

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